New tax system को चुनने के बाद हाईकोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22 डी के तहत तय कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने को चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज की नए टैक्स सिस्टम के खिलाफ याचिका पर केंद्र सरकार व विभाग से चार हफ्ते में मांगा जवाब

विभाग के अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल ने जानकारी दी और बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली टैक्स बार एसोसिएशन केस में कहा है कि New tax system में अलग से उपबंध नहीं किया गया है इसलिए New tax system में छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता. इसके बाद कोर्ट के आदेश पर उन्होंने New tax system पर काउंटर एफीडेविट दाखिल करने के लिए समय मांगा तो कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह का समय दे दिया..
जस्टिस जैन ने New tax system को चुनने के बाद अपनी कुल आय से हाईकोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22 डी के तहत तय कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने को चुनौती दी है. धारा 22 डी हाईकोर्ट जज के ऑफिशियल घर, आने-जाने की सुविधाओं, सत्कार अलाउंस और लीव ट्रैवल कंसेशन की कीमत को आयकर से छूट देता है.
New tax system के तहत इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर छूट का दावा करने की इजाजत नहीं

जस्टिस जैन ने जब New tax system के तहत फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर-2) फाइल करने की कोशिश की तो आयकर पोर्टल ने कथित तौर पर उन्हें कानूनी न्यायिक भत्ते के लिए 9.85 लाख रुपये की छूट का दावा करने की इजाजत नहीं दी, जिससे पता चला कि यह फायदा सिर्फ पुराने टैक्स सिस्टम के तहत ही मिलता था.
इसके बाद जस्टिस जैन ने सीबीडीटी और केंद्रीय वित्त मंत्री को प्रत्यावेदन दिया. जवाब में, उन्हें सिर्फ 12 सितंबर, 2025 के ऑफिस मेमोरेंडम का जिक्र करते हुए एक कम्युनिकेशन मिला. मेमोरेंडम में कहा गया है कि New tax system को चुनने वाले टैक्सपेयर ऐसी छूट क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि यह New tax system पहले से ही लिबरल टैक्स स्लैब, कम टैक्स रेट और ज्यादा रिबेट देता है. इसमें कहा गया है कि इसके अलावा छूट देना डबल फायदा देना होगा.
बिना चार्जशीट निलंबन आदेश पर रोक राज्य सरकार से कोर्ट ने मांगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिजली विभाग सोनभद्र के कवर अभियंता शैलेष प्रजापति के निलंबन आदेश पर प्रभावी रोक लगा दी है. याची का कहना था कि उसे विभागीय जांच कार्यवाही की चार्जशीट अभी तक नहीं दी गई है और लंबे समय से बिना जांच निलंबित रखा गया है. निलंबन आदेश अधीक्षण अभियंता राज्य विद्युत निगम ने पारित किया है.जस्टिस दिनेश पाठक ने याचिका की सुनवाई की. याचिकाकर्ता के वकील ऋतेश श्रीवास्तव और श्वेता सिंह ने तीन मुख्य आधार पर आदेश को चुनौती दी.
यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड एम्प्लॉईज (डिसिप्लिन एंड अपील) रेगुलेशन्स, 2020 के नियम 4(i) के प्रावधान के अनुसार, निलंबन तभी किया जा सकता है जब आरोप इतने गंभीर हों कि साबित होने पर मेजर पेनल्टी लगे. साथ ही आदेश जारी करने से पहले नियुक्ति प्राधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड मंगाकर उनकी जांच करनी चाहिए थी और तर्कसंगत आदेश पारित करना चाहिए था. इस पर 2023 के इम्तियाज अहमद अंसारी केस और डॉ. अरविंद कुमार राम केस का हवाला दिया गया.
तर्क दिया गया कि बिना किसी अनुशासनिक कार्यवाही पर विचार किए ही निलंबन कर दिया गया. इसके समर्थन में मीरा तिवारी बनाम चीफ मेडिकल ऑफिसर (2001) केस का हवाला दिया गया. काफी समय बीत जाने के बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक आरोप-पत्र नहीं दिया गया. अजय कुमार चौधरी बनाम भारत संघ केस का हवाला दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निलंबन 3 महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता बिना चार्जशीट के.
कोर्ट ने माना कि मामले पर विचार की आवश्यकता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 3 हफ्ते का समय दिया और अगली सुनवाई की तिथि 23 सितंबर 2026 नियत की गई. अगले आदेश तक निलंबन आदेश का प्रभाव स्थगित रहेगा यानी याचिकाकर्ता फिलहाल राहत में है.