भाजपा सांसद डॉ. विनोद बिंद के खिलाफ Election Petition खारिज, हाई कोर्ट ने कहा ठोस आधार नहीं, वाद कारण स्पष्ट नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ललितेश पति त्रिपाठी की तरफ से दाखिल Election Petition को तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया है. यह Election Petition भदोही संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद के निर्वाचन को चुनौती देते हुए दाखिल की गयी थी. जस्टिस राज बीर सिंह की सिंगल बेंच ने यह आदेश कांग्रेस/समाजवादी गठबंधन के हारे हुए संयुक्त प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी की Election Petition पर दिया है. याचिका पर अधिवक्ता एनके पांडेय व विपक्षी सांसद के अधिवक्ता के आर सिंह ने बहस की.
बता दें कि चुनाव आयोग ने 16 मार्च 2024 को लोक सभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी की थी. भदोही सीट पर नामांकन की अंतिम तिथि 6 मई और जांच की तिथि 7 मई 2024 थी. लोक सभा सीट पर चुनाव लड़ने के लिए कुल 10 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था. निर्वाचन आयोग की तरफ से तय की गयी डेट के अनुसार 25 मई 2024 को मतदान और 4 जून 2024 को मतगणना हुई.
चुनाव के दिन कुल 10,85,742 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. वोटों की गिनती के बाद निर्वाचन आयोग की तरफ से घोषित किये गये रिजल्ट के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी डॉ. विनोद कुमार बिंद को 4,59,982 मत प्राप्त हुए. उनके निकटतम प्रतिद्वन्दी रहे कांग्रेस और सपा के संयुक्त प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी को 4,15,910 वोट मिले. आयोग ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. बिंद विजयी घोषित कर दिया.
चुनाव परिणाम को Election Petition में इस आधार पर चुनौती दी गई कि डॉ. बिंद का नामांकन पत्र अनुचित रूप से स्वीकार किया गया
निर्वाचन आयोग की तरफ से घोषित किये गये चुनाव परिणाम को Election Petition में इस आधार पर चुनौती दी गई कि डॉ. बिंद का नामांकन पत्र अनुचित रूप से स्वीकार किया गया. डॉ. बिंद निषाद पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिए बिना भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. Election Petition में तर्क दिया गया था कि भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत एक पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दिये बिना दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना उन्हें अयोग्य बनाता है.
Election Petition में यह भी कहा गया कि नामांकन पत्र दाखिल करने वाले प्रत्याशी जिया-उल-हक और लल्ती देवी के नामांकन पत्र अनुचित रूप से खारिज किए गए. ऐसा करने से संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन हुआ. भाजपा और निषाद पार्टी के बीच कथित समझौते के तहत रिश्वतखोरी का भ्रष्ट आचरण अपनाया गया. डॉ. बिंद ने इसके जवाब में सिविल प्रोसीजर कोड की धारा 7 नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल कर कहा कि Election Petition में कोई ठोस तथ्य नहीं दिए गए और यह वाद-कारण प्रकट नहीं करती.
अदालत ने माना कि डॉ. बिंद ने निषाद पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से त्याग दी थी, जिससे वे विधानसभा सदस्यता के लिए 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य हुए. लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 102(2) के तहत यह अयोग्यता केवल सदन की सदस्यता ‘बने रहने’ पर लागू होती है, न कि सांसद पद के लिए ‘चुने जाने’ पर.
इसलिए इस आधार पर कोई वाद-कारण नहीं बनता. कोर्ट ने कहा कि Election Petition में याचिकाकर्ता ने केवल यह आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ, लेकिन यह नहीं बताया कि कैसे और किस तरह परिणाम प्रभावित हुआ. धारा 100(1)(डी) के तहत यह दिखाना अनिवार्य है कि परिणाम वास्तव में भौतिक रूप से प्रभावित हुआ.
Election Petition में जिया-उल-हक और लल्ती देवी के नामांकन किस आधार पर खारिज हुए, इसका कोई ठोस विवरण नहीं दिया गया था. कोर्ट ने इसे अस्पष्ट और सामान्य आरोप बताया. कोर्ट ने कहा कि भ्रष्ट आचरण का आरोप आपराधिक आरोप जैसा गंभीर होता है और इसे पूरी सटीकता से साबित करना पड़ता है. Election Petition में यह नहीं बताया गया कि कथित समझौता कब, कहां और किन के बीच हुआ, और डॉ. बिंद की इसमें व्यक्तिगत सहमति कैसे थी.
अदालत ने पाया कि पांचों आधार आवश्यक तथ्यों से रहित हैं और कोई वाद-कारण प्रकट नहीं करते. इसी आधार पर सिविल प्रोसीजर कोड के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन स्वीकार करते हुए पूरी Election Petition खारिज कर दी गई.