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दूल्हे के हत्या मामले में आरोपी को राहत, 2 महीने में समर्पण कर Bail लेने तक Arrest पर लगी रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जौनपुर जिले के भोले राजभर की अग्रिम Bail याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया  है लेकिन 60 दिन के भीतर रेग्युलर कोर्ट में हाजिर होकर Arrest पर रोक या रेग्युलर Bail की अर्जी पर सुनवाई तक गिरफ्तारी…

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, एक साथ नहीं लगायी जा सकती IPC की धारा 420 और 406

कोर्ट ने रद की मेरठ के सिविल लाइंस थाने में दर्ज अभिषेक गौतम के खिलाफ केस को संज्ञान लेने और सम्मन की कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 420 और 406 एक साथ नहीं लगायी जा सकती. किसी…

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याचिकाकर्ता के Defence पर ध्यान न देना और दोषी होने के निष्कर्षों की पुष्टि करते समय कारण दर्ज न करना दर्शाता है कि अनुशासनात्मक प्राधिकरण की तरफ से दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया गया

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मोहनलालगंज के तत्कालीन एसडीएम को दी बड़ी राहत, कार्रवाई को रद किया, सभी लाभ तीन महीने में देने के आदेश याचिकाकर्ता के Defence पर ध्यान न देना और दोषी होने के निष्कर्षों की पुष्टि करते समय कारण दर्ज न करना, अनुशासनात्मक प्राधिकरण की तरफ से दिमाग…

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विशेष लोक अभियोजक की जनवरी 2026 में दर्ज एफआईआर में Arrest पर रोक, राज्य सरकार से जवाब तलब

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा के एक विशेष लोक अभियोजक विनायक वशिष्ठ की Arrest पर अंतरिम रोक लगा दी है. जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश दिया. याची आगरा जनपद मे विशेष लोक अभियोजक के रूप में कार्यरत हैं. उनके विरुद्ध थाना न्यू…

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Illegal detention, शांति भंग में पुलिस की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त, लगाया 25000 रुपये प्रतिदिन हर्जाना, अफसरों की सैलरी से हर्जाना राशि की वसूली की छूट

हाई कोर्ट ने कहा, किसी व्यक्ति को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लेने के बाद उसे शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने का वचन देते हुए एक पर्सनल बॉन्ड भरना होगा, जमानतदार की जरूरत नहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को 24…

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कानून स्पष्ट है कि 1 बार Loan का सेटलमेंट हो जाने और एनओसी मिल जाने के बाद बैंक की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी शर्त के टाइटल डॉक्यूमेंट वापस करे

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मेसर्स आरएस कॉन्ट्रैक्टर्स एंड इंजीनियर्स के पार्टनर्स को राहत देने से किया इंकार, कहा, उनके पास DRT प्रभावी वैकल्पिक उपाय मौजूद कानून स्पष्ट है कि एक बार Loan का सेटलमेंट हो जाने और एनओसी मिल जाने के बाद बैंक की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह बिना…

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राज्य सरकार दुष्कर्म के परिणामस्वरूप जन्मे बच्चों के Independent rights की सुरक्षा के लिए अलग कानूनी ढांचा बनाने पर विचार करे

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता के बच्चे की Independent rights की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. न्यायालय ने सिफारिश की कि राज्य सरकार दुष्कर्म के परिणामस्वरूप जन्मे बच्चों के Independent rights की सुरक्षा के लिए एक…

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तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के दोषी अभियुक्त आबिद की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंजूर की Conditional bail

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में हुए बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अभियुक्त आबिद को Conditional bail प्रदान कर दी है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने यह आदेश आपराधिक अपील में दाखिल अर्जी पर दिया. 25 जनवरी 2005 को थाना…

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Family dispute को लेकर याचिका पर एकलपीठ ने पति याची पर लगाया 15 लाख रुपए हर्जाना, डबल बेंच ने लगायी रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने सिंगल बेंच द्वारा Family dispute को लेकर पति पर लगाये गये 15 लाख रुपये हर्जाना की वसूली पर रोक लगा दी है और पत्नी से इस सबंध में जबाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया हर्जाना हुए नुकसान के एवज…

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Prima facie cognizable offence बनता हो, जांच में पर्याप्त साक्ष्य पाये गये हों तो केस को दुर्भावनापूर्ण मंशा का नतीजा नहीं मान सकते

Prima facie cognizable offence बनता हो, जांच में पर्याप्त साक्ष्य पाये गये हों तो मुकदमे को दुर्भावनापूर्ण मंशा का नतीजा नहीं माना जा सकता और केस रद नहीं किया जा सकता है. ट्रायल कोर्ट को cognizable offence के तथ्यों और सबूतों को परखने का पूरा मौका देना ही उचित होगा.…