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High Court Decision

Interim Order प्रभावी रहने के दौरान उसकी अवहेलना पर हो सकती है अवमानना कार्रवाई : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी Interim Order का उल्लंघन उसके प्रभावी रहने की अवधि में हुआ हो, तो मुख्य कार्यवाही खारिज होने मात्र से उल्लंघन का दोष खत्म नहीं हो जाता. Interim Order की अवहेलना इसको लेकर दाखिल अवमानना याचिका को सुनवाई हेतु 14 अक्टूबर को पेश करने…

High Court Decision

Investigation Report की कापी दिये बिना फैसला सुनना गलत, कोर्ट ने रद किये डायरेक्टर बेसिक और बीएसए कुशीनगर के आदेश

याचिकाकर्ता को Investigation Report की प्रति दिये बिना ही उसके द्वारा प्रस्तुत रीप्रजेंटेशन को निस्तारित कर दिये जाने को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने डायरेक्टर बेसिक एजुकेशन उत्तर प्रदेश लखनऊ और जिला बेसिक ​शिक्षा अधिकारी कुशीनगर के आदेश को रद…

High Court Decision

भर्ती के समय Recruit के मानसिक विकारों का पता नहीं लगाया जा सकता, बाद में पता चलने पर दिव्यांगता पेंशन का हक नहीं

भर्ती के 4 सप्ताह में चल गया था बीमारी का पता, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिव्यांगता पेंशन की मांग में दाखिल याचिका की खारिज भर्ती के समय Recruit के मानसिक विकारों का पता नहीं लगाया जा सकता है. भर्ती के बाद ट्रेनिंग के दौरान इसका पता चलता और यह भी…

High Court Decision

नाबालिग की Custody से संबंधित कार्यवाही केवल प्रतिस्पर्धी दावेदारों के कानूनी अधिकारों के आधार पर निर्धारित नहीं की जानी चाहिए

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिता को सौंपी बच्चों की Custody, मां के सम्पर्क में बने रहने के लिए तय की व्यवस्था किसी नाबालिग की Custody से संबंधित कार्यवाही केवल प्रतिस्पर्धी दावेदारों के कानूनी अधिकारों के आधार पर निर्धारित नहीं की जानी चाहिए. न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते…

High Court Decision

Departmental Proceeding शुरू करने का मतलब यह नहीं है कि अनुशासनात्मक अधिकारी केवल बड़ी सजा देने को बाध्य होगा

हाई कोर्ट ने कहा, तथ्यों व परिस्थितियों पर विचार के बाद अफसर तय करेगा कि कर्मचारी को छोटी सजा दी जाएगी या बड़ी Departmental Proceeding शुरू करने का मतलब यह नहीं है कि अगर कार्यवाही नियम 14(1) के तहत शुरू की गई है, तो अनुशासनात्मक अधिकारी पर केवल बड़ी सजा…

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प्रदेश में Medical negligence की शिकायत के लिए कोई तय प्रक्रिया नहीं, राज्य सरकार को एसओपी बनाने के लिए 3 हफ्ते का समय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में Medical negligence के मामलों में पीड़ित व्यक्ति के लिए शिकायत की कोई स्पष्ट व्यवस्था न होने पर चिंता जताई है. जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को Medical negligence के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया  तैयार कर अदालत के…

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नीट-यूजी Answer Key पर अकेले उम्मीदवार की आपत्ति से विशेषज्ञ राय जरूरी नहीं : इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा की Answer Key आने के बाद विवादित प्रश्नों और उनके उत्तर विकल्पों को विशेषज्ञ के पास तभी भेजा जा सकता है, जब अदालत के सामने ऐसी ठोस सामग्री हो जो विशेषज्ञ राय लेने की जरूरत दिखाती हो. केवल एक उम्मीदवार की ओर से Answer…

High Court Decision

Information के अभाव में कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता, केवल इसके आधार पर किसी पुलिस अधिकारी को कोई दण्ड नहीं दिया जा सकता

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के दरोगा को दिये गये दण्ड को पुष्ट करने वाला ट्रिब्यूनल का आदेश किया रद पुलिस information के आधार पर कार्रवाई करती है, कार्रवाई के लिए information का अभाव होने पर कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता है और केवल इसके आधार…

High Court Decision Supreme Court Decision

Church of North India विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज की पक्षकारों की सहमति, 3 माह में दूसरी अपील निस्तारित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने Church of North India विवाद में पक्षकारों की सहमति दर्ज करने के बाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इसे लेकर दाखिल द्वितीय अपील को तीन महीने के भीतर निस्तारित करे. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच Church…

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घटना स्थल पर किसी Eyewitness गवाह की मौजूदगी संदिग्ध है, तो अभियोजन की कहानी की प्रमाणिकता अविश्वसनीय, हत्या का आरोपित 40 साल बाद बरी

कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि यदि घटना स्थल पर किसी Eyewitness गवाह की मौजूदगी संदिग्ध है, तो अभियोजन पक्ष की कहानी की सच्चाई और प्रमाणिकता के बारे में ऐसे गवाह की Eyewitness गवाही बहुत संदिग्ध और अविश्वसनीय हो जाती है. ऐसी स्थिति में, ऐसे संदिग्ध और अविश्वसनीय सबूतों…