Allahabad High Court बार एसोसिएशन से निष्कासित सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव निलंबित, 17 को बार चुनाव में वोट डालने की मिली अनुमति

याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार शर्मा व अन्य ने बार काउंसिल ऑफ यूपी के अध्यक्ष द्वारा 22 अगस्त 2026 को पारित उस आदेश को Allahabad High Court में चुनौती दी थी, जिसमें एचसीबीए के प्रस्ताव पर रोक लगाई गई थी और मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी. Allahabad High Court ने पाया कि बार काउंसिल ऑफ यूपी के पास एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 35 या धारा 9-ए के तहत ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, इसलिए अध्यक्ष के इस आदेश पर भी रोक लगा दी गई.
Allahabad High Court बार एसोसिएशन का चुनाव 17 को
अन्य याचिका में रफीका अनीस खान और ऋतेश श्रीवास्तव सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की सदस्यता एचसीबीए ने समाप्त कर दी थी, जिसके विरुद्ध उन्होंने याचिका दाखिल की. Allahabad High Court ने पाया कि जब 17 सितंबर 2026 को चुनाव की घोषणा हो चुकी है, तो कार्यकारी निकाय ऐसे नीतिगत मामले पर निर्णय नहीं ले सकता. इसलिए कोर्ट ने सदस्यता समाप्ति के प्रस्तावों को निलंबित कर दिया. बार एसोसिएशन की ओर से तर्क दिया गया कि यह मामला सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत रजिस्ट्रार के समक्ष जाना चाहिए, कोर्ट में नहीं.
Allahabad High Court ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बी.डी. कौशिक (2011) मामले का हवाला देते हुए कहा कि “कोर्ट-अनुबद्ध” बार एसोसिएशन सामान्य वकील संगठनों से अलग श्रेणी में आते हैं क्योंकि वे न्याय प्रशासन तंत्र का हिस्सा होते हैं. इस आधार पर याचिका की पोषणीयता की आपत्ति खारिज कर दी गई. कोर्ट ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि निष्कासित सदस्यों को 17 सितंबर को होने वाले एचसीबीए चुनाव में मतदान की अनुमति दी जाए. मामले की अगली सुनवाई की तिथि 22 अक्टूबर 2026 को तय की गई है.