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न्याय होना ही काफी नहीं, न्याय होते हुए दिखना भी जरूरी है, Bail को लेकर दाखिल 80 अर्जियों पर जस्टिस ने किया खुद को सुनवाई से अलग

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पक्षकार के जज से सम्पर्क करने की कोशिश को बताया इतिहास का काला दिन, चीफ जस्टिस को भेजी फाइलें

न्याय होना ही काफी नहीं, न्याय होते हुए दिखना भी जरूरी है, Bail को लेकर दाखिल 80 अर्जियों पर जस्टिस ने किया खुद को सुनवाई से अलग

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक Bail Application पर आदेश जारी करने से पहले स्वयं को सुनवाई से अलग कर लिया और अन्य पीठ नामित करने के लिए लगभग 80 Application चीफ जस्टिस को भेज दी. पक्षकार ने जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि इतिहास का यह काला दिन है. कोर्ट ने कहा न्याय होना ही नहीं होते हुए दिखना भी चाहिए. जस्टिस कृष्ण पहल की अदालत में भोला प्रसाद की Bail Application की सुनवाई चल रही थी. अदालत ने सभी मामलों की सुनवाई पूरी कर ली थी और आदेश बाद में सुनाया जाना था.

Bail Application पर सुनवाई के बाद पक्षकारों की ओर से कथित तौर पर पीठासीन जज तक सीधे पहुंच बनाने और संपर्क साधने की कोशिश की गई. अदालत ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है और अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो न्यायपालिका में जनता का भरोसा कमजोर होगा.

अपने आदेश में न्यायमूर्ति पहल ने कहा कि यह घटना अदालत के इतिहास में एक “काला दिन” है. उन्होंने कहा कि न्याय होना ही काफी नहीं, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी जरूरी है. अगर फैसला उसी पक्ष के हक में आता जिसका पक्ष सुनवाई में मजबूत लग रहा था, तो इससे यह गलत धारणा बन सकती थी कि फैसला बाहरी दबाव में दिया गया.

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इन हालात को देखते हुए अदालत ने Bail Application पर सुनवाई से खुद को मामले से अलग करने  का फैसला लिया और सभी संबंधित लगभग 80 Bail Application को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया, ताकि उन्हें किसी उपयुक्त पीठ को सौंपा जा सके. सभी Bail Application मामलों पर अब 7 अगस्त 2026 को सुनवाई होगी. कोर्ट ने वकीलों और वादकारियों को चेतावनी दी कि न्यायिक स्वतंत्रता कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि हर नागरिक को मिला संवैधानिक अधिकार है, और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश की सख्त निंदा की जानी चाहिए.

गोली मारने के आरोपी की Bail Application मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर जिले के बिलासपुर थाना क्षेत्र में दर्ज एक आपराधिक मामले में आरोपी गुरशान सिंह को Conditional bail दे दी है. जस्टिस कृष्ण पहल की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया. 4 अप्रैल 2026 को गुरशान सिंह ने अपने भाई कुलदीप सिंह के उकसाने पर सूचनाकर्ता के पिता को गोली मारकर घायल कर दिया था. आरोपी पर बीएनएस 2023 की धारा 352, 109(1), 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/27 के तहत मामला दर्ज है. आरोपी 5 अप्रैल 2026 से जेल में बंद था.

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Bail Application में आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई और उसमें घटना का समय दर्ज नहीं है. यह मामला दोनों पक्षों के बीच “क्रॉस-वर्जन” का है. सह-आरोपी कुलदीप को भी चोटें आई थीं, जिनका मेडिकल परीक्षण उसी पुलिसकर्मी ने कराया था जो घायल को अस्पताल ले गया था. वर्ष 2025 में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ एफआईआर पहले भी दर्ज हो चुकी हैं. दोनों पक्ष एक ही परिवार के सदस्य हैं और उनके बीच संपत्ति को लेकर पुरानी रंजिश है और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.

सूचनाकर्ता के वकील और अपर शासकीय अधिवक्ता ने Bail Application का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि गुरशान सिंह ही मुख्य हमलावर था, हालांकि वे यह मानने से इन्कार नहीं कर सके कि सह-आरोपी कुलदीप को भी चोटें आई थीं.

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सभी तथ्यों, दोनों पक्षों के बीच पुरानी मुकदमेबाजी और सह-आरोपी की चोटों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए प्रथमदृष्टया आरोपी की सशर्त जमानत मंजूर कर ली और व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया, इस शर्त के साथ कि वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ या गवाहों को धमकाएगा नहीं और विचारण न्यायालय के समक्ष हाजिर होता रहेगा. किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकती है.

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