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Board of Revenue में तीन सदस्यीय बेंच से सुनवाई के आदेश पर सवाल, अगली सुनवाई 4 अगस्त को

Board of Revenue में तीन सदस्यीय बेंच से सुनवाई के आदेश पर सवाल, अगली सुनवाई 4 अगस्त को

इलाहाबाद हाईकोर्ट में Board of Revenue, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के अध्यक्ष द्वारा सामान्य मामलों की सुनवाई तीन सदस्यीय बेंच से कराए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. यह याचिका बार एसोसिएशन Board of Revenue यूपी, प्रयागराज ने दाखिल की है. अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी. जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रशाद की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बहस की, जिनकी सहायता अधिवक्ता उमंग श्रीवास्तव ने की.

राज्य की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता जेएन मौर्य ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता पीके शाही के साथ पक्ष रखा. वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यूपी Board of Revenue संहिता नियमावली के नियम 10 और 12 राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष को यह अधिकार नहीं देते कि वे प्रवेश स्तर पर मामलों की नियमित सुनवाई तीन सदस्यों की बेंच से कराने का निर्देश दें, सिवाय उन मामलों के जहां किसी बड़ी बेंच को संदर्भ भेजा गया हो.

Board of Revenue में हर मामले में तीन सदस्यीय बेंच बनाना व्यावहारिक नहीं है

उनका कहना था कि बोर्ड में परंपरागत रूप से केवल संदर्भ के मामलों में ही तीन सदस्यीय पूर्ण बेंच गठित की जाती रही है. चूंकि राजस्व मामलों में लगभग हर वाद में गांव सभा एक आवश्यक पक्षकार होती है, इसलिए Board of Revenue में हर मामले में तीन सदस्यीय बेंच बनाना व्यावहारिक नहीं है और इससे बोर्ड का पूरा कामकाज ठप पड़ जाएगा. मुख्य स्थायी अधिवक्ता जेएन मौर्य ने मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए समय की मांग की. इसी बीच याचिकाकर्ता के वकील ने अंतरिम राहत आवेदन पर तत्काल सुनवाई की तत्परता का भी अनुरोध किया.

न्याय हित को ध्यान में रखते हुए और दोनों पक्षों को उचित सुनवाई का अवसर देने के लिए खंडपीठ ने मामले को स्थगित कर दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि यह मामला अब 4 अगस्त, 2026 को पुनः सूचीबद्ध किया जाए और यह स्पष्ट किया कि यदि अगली तारीख तक राज्य सरकार तर्कों का जवाब देने के लिए निर्देश प्राप्त नहीं कर पाती, तो कोर्ट अगली सुनवाई की तिथि पर अंतरिम राहत आवेदन पर विचार करने के लिए आगे बढ़ेगी.

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सीजीएचएस मेरठ  रिश्वत प्रकरण : अकाउंटेंट रईस अहमद की याचिका पर सीबीआई से मांगी जानकारी

सीजीएचएस मेरठ में कथित 50 लाख रुपये रिश्वत मांगने के आरोपी रईस अहमद निवासी  शास्त्री नगर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जानकारी मांगी है तथा मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को नियत की है. याचिका के अनुसार, रईस अहमद पिछले लगभग 25 वर्षों से डॉ. आशीष जैन के संस्थानों जेएमसी मेडिकल सिटी, हाईफील्ड स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं जैन मेडिकल स्टोर, मेरठ में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थे.

सभी संस्थान सीजीएचएस के पैनल पर हैं तथा अस्पतालों के संचालन संबंधी कार्यों के कारण बिलों एवं अन्य प्रशासनिक विषयों में वह डॉ. आशीष जैन के निर्देश पर सीजीएचएस कार्यालय के अधिकारियों से संपर्क करते रहते थे. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने जस्टिस विक्रम डी चौहान के समक्ष बहस में बताया कि 8 जुलाई 2025 को सीजीएचएस मेरठ के तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर डॉ. अजय कुमार तथा कार्यालय अधीक्षक लवलेश सोलंकी ने अस्पताल के निरीक्षण में कथित रूप से पाई गई कमियों के संबंध में कार्रवाई न करने के बदले 50 लाख रुपये रिश्वत की मांग की.

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यह भी कहा गया है कि अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. आशीष जैन के निर्देश पर डायरेक्टर ऑपरेशन विशाल कुमार, रईस अहमद को साथ लेकर कथित रिश्वत की राशि 5 लाख पहली किस्त  देने सीजीएचएस कार्यालय पहुंचे थे, जहां लवलेश सोलंकी ने कथित रूप से उन्हें अगले दिन राशि लेकर आने के लिए कहा और विशाल के कहने पर रईस अहमद 5 लाख का बैग लेकर अपने घर जा रहा था.

इसी बीच विशाल कुमार द्वारा की गई शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए डॉ. अजय कुमार, लवलेश सोलंकी तथा रईस अहमद के विरुद्ध भ्रस्टाचार निवारण अधिनियम व अन्य की धाराओं में  मामला दर्ज कर जेल भेज दिया और 5 लाख रुपये की बरामदगी दर्शाते हुए रईस अहमद को भी गलत तरीके से आरोपी बना दिया.

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याची का कहना है कि वह किसी अवैध लेन-देन का लाभार्थी नहीं था, बल्कि अपने नियोक्ता के निर्देश पर विशाल कुमार के साथ बैग लेकर गया था और उसे गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है.जमानत होने के बाद याची ने चार्जशीट व संज्ञान आदेश को चुनौती दी है.याची अधिवक्ता का कहना है कि याची ने न कोई मांग किया है और न ही कोई याची के पास से रिश्वत की रकम मिली है बल्कि याची के पास ही रिश्वत की रकम थी जो विशाल के साथ गया था.

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