Department of Post की लापरवाही के भुक्तभोगी छात्र नहीं हो सकते, चयन प्रक्रिया से बाहर करने पर रोक, 16 अक्टूबर तक दस्तावेज पेश करने की मोहलत

यह निर्णय जस्टिस मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने अनुराधा द्वारा दायर रिट याचिका (रिट-ए संख्या 16630/2026) पर सुनवाई के दौरान दिया. तथ्यों के अनुसार चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न पदों पर भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था. इस विज्ञापन के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन करने और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई थी, जबकि आवेदन फॉर्म की हार्ड कॉपी और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र आयोग के कार्यालय में By Post जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 (शाम 5:00 बजे तक) तय की गई थी.
याचिकाकर्ता ने पूरी सतर्कता बरतते हुए 31 अगस्त 2026 को ही अपना ऑनलाइन आवेदन और निर्धारित शुल्क जमा कर दिया था. इसके बाद विज्ञापन में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 8 सितंबर 2026 को ही रजिस्टर्ड Post के माध्यम से सभी आवश्यक दस्तावेजों की हार्ड कॉपी आयोग के लिए प्रेषित कर दी थी.
ब्रिक्स लीडर्स समिट’ के चलते प्रशासनिक व्यवस्था और व्यवधान तथा छुट्टियों के कारण Post पहुँचने में विलंब हो गया
इसी बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित ’18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट’ के चलते प्रशासनिक व्यवस्था और Post service में आए व्यवधान तथा छुट्टियों के कारण डाक पहुँचने में विलंब हो गया. परिणामस्वरूप, जो लिफाफा समय पर भेजा गया था, वह आयोग के कार्यालय में 16 सितंबर 2026 को यानी निर्धारित अंतिम तिथि के ठीक एक दिन बाद पहुँचा. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने एक दिन की इस मामूली देरी को आधार बनाते हुए लिफाफे (Post) पर “अस्वीकृत” लिख कर वापस लौटा दिया और आवेदन स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया.
सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के दो चर्चित मामलों, सदाफ इमरान बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और आशुतोष अग्निहोत्री बनाम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का हवाला दिया. इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह सिद्धांत स्थापित किया है कि यदि अभ्यर्थी ने समय सीमा के भीतर स्पीड पोस्ट (Speed Post) या रजिस्टर्ड माध्यम से दस्तावेज प्रेषित कर दिए हैं, तो पारगमन में हुई देरी के लिए उसे उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन दृष्टांतों और अपने ही पूर्व के फैसलों (ऋषिश प्रकाश बनाम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग) का गहराई से विश्लेषण किया. अदालत ने माना कि जब प्रेषण का कार्य पूरी तरह से अभ्यर्थी के नियंत्रण में था और उसने तय समय पर रजिस्टर्ड Post का विकल्प चुनकर अपने हिस्से की औपचारिकता पूरी कर ली थी, तो ऐसे में Department of Post की सुस्ती या प्रशासनिक कारणों से हुई देरी के कारण किसी की मेहनत पर पानी नहीं फेरा जा सकता.
मामले की गंभीरता को समझते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें विलंब से हार्ड कॉपी मिलने का हवाला देकर उम्मीदवारी रद्द की गई थी. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी केवल इसलिए समाप्त नहीं की जा सकती क्योंकि Post पारगमन की प्रक्रिया बाहरी कारकों से प्रभावित हुई थी.
हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन की हार्ड कॉपी और सभी दस्तावेजों को स्वीकार करे. अदालत ने यह भी आदेशित किया है कि यदि याची निर्धारित समयावधि (16 अक्टूबर 2026, शाम 5:00 बजे तक) के भीतर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करती है, तो आयोग विज्ञापन की शर्तों और नियमों के मुताबिक उसकी उम्मीदवारी पर निष्पक्ष रूप से विचार करे.
इसे भी पढ़ें… अपीलीय आदेश के खिलाफ सजा निलंबित करना न्यायिक अनुशासनहीनता: इलाहाबाद हाई कोर्ट