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24 घंटे की Illegal Detention पर हाई कोर्ट ने ने 10 हजार रुपये का हर्जाना, अफसरों से वसूली की छूट

थाने का सीसीटीवी खराब तो Detention का रिकॉर्ड जीडी में दर्ज करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाई कोर्ट

24 घंटे की Illegal Detention पर हाई कोर्ट ने ने 10 हजार रुपये का हर्जाना, अफसरों से वसूली की छूट
Atul Shridharan J.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछताछ के नाम पर एक व्यक्ति को Illegal Detention में रखने को गंभीरता से लेते हुए पुलिस पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को और कोई केस पेंडिंग न होने पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने जुर्माने की राशि याचिकाकर्ता को Illegal Detention में रखने वाले अफसर से वसूल करने की छूट दी है.

इसके साथ कोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे खराब होने की स्थिति में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं. बेंच ने कहा कि सीसीटीवी उपलब्ध न होने पर थाने में पूछताछ या गिरफ्तारी के लिए लाए गए हर व्यक्ति की एंट्री, पूछताछ और रिहाई का विवरण जीडी  में तत्काल दर्ज करना होगा.

बता दें कि पिछले दिनों देवरिया जिले से भी इसी तरह का एक प्रकरण सामने आया था. उसमें तीन व्यक्तियों को Illegal Detention में रखने का आरोप लगाया गया था. उस वक्त भी थाने का सीसीटीवी खराब होने का तथ्य कोर्ट में पेश किया गया था खास तौर पर उस समय का जिस वक्त कथित आरोपियों को थाने लेकर आया गया और फिर उन्हें छोड़ दिया गया.

देवरिया जिले से भी इसी तरह का एक प्रकरण सामने आया था उसमें तीन व्यक्तियों को Illegal Detention में रखने का आरोप लगा था

उस प्रकरण में भी सीसीटीवी फुटेज अनुपलब्ध होने पर कोर्ट ने थाने की जीडी मंगवाई और थानेदार के साथ एसपी को कोर्ट में तलब किया तो पता चला कि कहीं कोई इंट्री ही नहीं की गयी है. तब भी इसी बेंच ने Illegal Detention पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए हर्जाना लगाया था.

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देवरिया जिले के केस की सुनवाई के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य जो सामने आया था वह यह था कि Illegal Detention की शिकायत किये जाने के बाद भी जिम्मेदार थानेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी. असलियत जानने के लिए कोर्ट ने जांच रिपोर्ट तलब कर ली थी. बाद में इस केस में एसपी खुद कोर्ट के सामने पेश हुए तब बताया गया कि संबंधित एसओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करा दी गयी है और जांच में उन्हें दोषी पाया गया है.

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Achal Sachdev J.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार सीसीटीवी सिस्टम चालू हो जाने के बाद उसे 24 घंटे, 365 दिन काम करना चाहिए. अगर सिस्टम खराब होता है तो एसएचओ को जीडी में खराबी का समय और इसकी सूचना जिस अधिकारी को लिखित रूप से दी गई, उसका विवरण दर्ज करना होगा. जिले के एसपी को भी सूचित कर सीसीटीवी को जल्द से जल्द ठीक कराना होगा.

सीसीटीवी बंद रहने के दौरान पूछताछ के लिए बुलाए गए व्यक्ति की रिहाई का समय भी दर्ज करना होगा और पुलिस को उसकी रिहाई की रसीद लेनी होगी. इसमें यह भी दर्ज किया जाना चाहिए कि व्यक्ति को किसके साथ या किसके सुपुर्द किया गया. कोर्ट ने कहा कि इन सुरक्षा उपायों का पालन नहीं होने पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 119(जी) के तहत पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया जा सकता है.

यह मामला राघवेंद्र दुबे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें आसनसोल से उठाकर चित्रकूट के सरधुवा थाने लाया गया और Illegal Detention में रखा गया. कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पाया कि वह 13 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे थाने पहुंचे और 10:19 बजे जांच अधिकारी के साथ बाहर गए. उन्हें रात 8:24 बजे वापस थाने लाया गया, जबकि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का समय दोपहर 3:30 बजे दर्ज था.

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कोर्ट ने यह भी पाया कि थाने के अंदर की निगरानी करने वाले तीन सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं थी, जबकि दो अन्य कैमरों की फुटेज मौजूद थी. अदालत ने माना कि गायब फुटेज को जानबूझकर डिलीट किया गया या डीवीआर में सेव नहीं किया गया. कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज को सिक्योर करने के लिए जरूरी कदम उठाने का आदेश देने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गिरफ्तार के लिए तय किये गये प्रावधानों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्तिच करने के लिए जरूरी कदम उठाने का भी आदेश दिया है.

दोनों पक्षों के तर्कों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी को रद्द कर दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता न हो तो याचिकाकर्ता की रिहाई को तत्काल रिहा कर दिया जाय. कोर्ट ने 24 घंटे की Illegal Detention के लिए 10,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया.

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