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पिता के पास रहेगी Custody, 7 साल की बच्ची ने मां को पहचानने से किया इन्कार

पिता के पास रहेगी Custody, 7 साल की बच्ची ने मां को पहचानने से किया इन्कार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात वर्षीय बच्ची अनुष्का की Custody उसके पिता सतेंद्र कुमार के पास बरकरार रखी है. कौशांबी के पश्चिम शरीरा थाने की पुलिस ने कोर्ट के 30 जुलाई 2026 के आदेश के तहत बच्ची को अदालत में पेश किया था. जस्टिस संदीप जैन ने बच्ची से सीधे बातचीत की, जिसमें उसने बताया कि वह कक्षा एक में पढ़ती है और अपने पिता के साथ रहने में सहज है. बच्ची ने अपनी मां अर्चना को पहचानने से इन्कार कर दिया और स्पष्ट कहा कि वह उनके साथ नहीं रहना चाहती.

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता मां अर्चना ने अदालत को बताया कि पति ने उसके साथ क्रूरता की और उसे ससुराल से निकाल दिया, जिसके बाद वह अपने पिता-भाई के साथ रह रही है और सिलाई तथा सब्जी की दुकान से रोजाना करीब 500 रुपये कमाती है. उसने आरोप लगाया कि पति ने दूसरी शादी कर ली है.

Custody मां को सौंपना बच्ची के लिए मानसिक रूप से कष्टकारी हो सकता है

पिता सतेंद्र कुमार ने आरोपों से इन्कार करते हुए स्वीकार किया कि वह दूसरी महिला के साथ लिव-इन में रह रहा है, जिससे दो बच्चे भी हुए हैं. उसने बच्ची की अच्छी परवरिश और स्कूली पढ़ाई का दावा किया. कोर्ट ने बच्ची की भावनात्मक स्थिति और उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए कहा कि अभी Custody मां को सौंपना बच्ची के लिए मानसिक रूप से कष्टकारी हो सकता है. हालांकि, मां-बेटी के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने के लिए अदालत ने मां को मुलाकात का अधिकार  दिया है.

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वह रोज शाम 6 से 9 बजे के बीच वीडियो कॉल पर बात कर सकेगी और स्कूल की छुट्टियों में बच्ची को अस्थायी रूप से अपने पास रख सकेगी. साथ ही, पिता को भी अपनी छोटी बेटी (जो फिलहाल मां के पास है) से मिलने का अधिकार दिया गया है. इस तरह कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया.

गलत आदेश पारित कर रहे जिला विद्यालय निरीक्षक, निदेशक माध्यमिक शिक्षा को हाजिर होने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य पद के वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में जिला विद्यालय निरीक्षकों  द्वारा बार-बार गलत आदेश पारित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है. जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने इसे “गंभीर और अवमाननापूर्ण” करार दिया.

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याची स्मित तिवारी के अधिवक्ता अनुराग शुक्ला ने बताया कि पहले अदालत ने वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में तय कानून के आधार पर डीआईओएस को याची को प्रधानाचार्य पद का बकाया व वर्तमान वेतन तीन माह में देने का आदेश दिया था. लेकिन डीआईओएस-2, कानपुर नगर ने सिंगल जज के उस पुराने फैसले के आधार पर आदेश पारित कर दिया, जिसे स्पेशल अपील में पहले ही संशोधित किया जा चुका था.

अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मिलते-जुलते मामले आ रहे हैं जहां विभिन्न डीआईओएस निर्देशों के बावजूद गलत आदेश जारी कर रहे हैं. इससे पहले प्रमोद कुमार व अन्य  मामले में भी अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को हलफनामा दाखिल करने को कहा था, और सुनील कुमार मिश्रा मामले में भी इस मुद्दे पर संज्ञान लिया गया था.

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अदालत ने निर्देश दिया है कि निदेशक, शिक्षा (माध्यमिक) अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि अधिकारी अदालत के आदेशों और वीरेश चंद्र मिश्रा प्रकरण में तय कानूनी स्थिति की खुलेआम अवहेलना क्यों कर रहे हैं. मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे होगी.

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