Investigation Report की कापी दिये बिना फैसला सुनना गलत, कोर्ट ने रद किये डायरेक्टर बेसिक और बीएसए कुशीनगर के आदेश

याचिकाकर्ता को Investigation Report की प्रति दिये बिना ही उसके द्वारा प्रस्तुत रीप्रजेंटेशन को निस्तारित कर दिये जाने को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने डायरेक्टर बेसिक एजुकेशन उत्तर प्रदेश लखनऊ और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कुशीनगर के आदेश को रद करते हुए याची को उसके मूल तैनाती स्थान पर बहाल करने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी जोड़ा है कि याची को Investigation Report की प्रति करायी जाय और जांच को पूरी किया जाय.
यह रिट याचिका जयराम सिंह की ओर से दाखिल की गयी थी. वह मूल रूप से अपर प्राइमरी स्कूल, लोहेपार 1-8 कम्पोजिट, मोतीचक क्षेत्र (ग्रामीण), जिला कुशीनगर में तैनात थे. उन्हें परिनिन्दा प्रविष्टि दिये जाने के बाद मूल पोस्टिंग विद्यालय से हटाकर अपर प्राइमरी स्कूल, बरवा बावन 1-8 कम्पोजिट, ब्लॉक/नगर क्षेत्र मोतीचक, जिला कुशीनगर में असिस्टेंट टीचर के पद पर तैनात कर दिया गया था.
याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि इस मामले में पहले रिट-A नंबर 17039/2025 (जयराम सिंह बनाम यूपी राज्य और 2 अन्य) दायर की गई थी. इसमें कानपुर देहात के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के 17 अक्टूबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी. इसके तहत याचिकाकर्ता को निंदा प्रविष्टि दी गई थी और उनका तबादला कर दिया गया था.
सजा का आदेश याचिकाकर्ता को Investigation Report दिए बिना ही पारित कर दिया गया था
इस रिट याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया था कि वे शिक्षा निदेशक (बेसिक), यूपी, लखनऊ के समक्ष नियम, 1973 के नियम 5 के उप-नियम (2) के तहत अपना पक्ष (रिप्रेजेंटेशन) रखें. इसके अनुपालन में याचिकाकर्ता ने विस्तृत पक्ष रखा, जिसमें विशेष रूप से यह आधार लिया गया कि सजा का आदेश याचिकाकर्ता को Investigation Report दिए बिना ही पारित कर दिया गया था.
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकील ने भी स्वीकार किया कि विवादित आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को Investigation Report नहीं दी गई थी. इसी को देखते हुए कोर्ट ने दोनों विवादित आदेश रद्द कर दिये और रिट याचिका स्वीकार कर ली.
कोर्ट ने मामले को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कुशीनगर के पास भेजा दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को Investigation Report की एक कापी उपलब्ध करावें और उसके बाद चार सप्ताह में कानून के अनुसार जांच पूरी करें. कोर्ट ने कहा कि चूंकि विवादित आदेश रद्द कर दिए गए हैं, जिसका मतलब है कि पूरी सजा का आदेश भी खत्म हो गया है. इसलिए याचिकाकर्ता को मूल पोस्टिंग स्कूल में काम करने की अनुमति दी जाएगी.
बीपी शुक्ल यूको बैंक के स्थाई अधिवक्ता नियुक्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीरेंद्र प्रसाद शुक्ल यूको बैंक के स्थाई अधिवक्ता नियुक्त किए गए हैं.इस आशय का आदेश जोनल कार्यालय वाराणसी द्वारा जारी किया गया है. इन्हें बैंक की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वादों की पैरवी के लिए अधिकृत किया गया है. श्री शुक्ल उ प्र राज्य विधि अधिकारी भी है.