Interim Order प्रभावी रहने के दौरान उसकी अवहेलना पर हो सकती है अवमानना कार्रवाई : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी Interim Order का उल्लंघन उसके प्रभावी रहने की अवधि में हुआ हो, तो मुख्य कार्यवाही खारिज होने मात्र से उल्लंघन का दोष खत्म नहीं हो जाता. Interim Order की अवहेलना इसको लेकर दाखिल अवमानना याचिका को सुनवाई हेतु 14 अक्टूबर को पेश करने का निर्देश दिया है. जस्टिस विकास बुधवार ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की अवमानना याचिका यह आदेश दिया. याचिका में अरविंदर कुमार चौहान व 7 अन्य के विरुद्ध अदालत के Interim Order की अवहेलना करने का आरोप है.
याची ने आरोप लगाया है कि आयुक्त, सहारनपुर मंडल ने 27 नवंबर 2025 को सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स, सहारनपुर के 28 मई 2025 के आदेश पर रोक लगाई थी. साथ ही सोसायटी/ट्रस्ट के क्रियाकलापों पर भी रोक लगी थी. इसके बावजूद दूसरे पक्ष को रामलीला के आयोजन की अनुमति दी जा रही है. यह Interim Order का जानबूझकर उल्लंघन है.
28 मई 2025 के आदेश से सहायक रजिस्ट्रार ने संस्था के 25 मार्च 2023 के चुनाव को अस्वीकार कर प्रबंध समिति को कालातीत घोषित किया था. वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए सीए सचिन जैन को नामित किया गया था और संस्था के क्रियाकलापों पर रोक लगाई गई थी. इस आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर 03 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया था.
Interim Order अंतिम आदेश में विलीन हो गया, इसलिए उसके उल्लंघन पर अवमानना नहीं बनती
राज्य के स्थायी अधिवक्ता पवन कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट ने आदेश नहीं छेड़ा था, पर आयुक्त के आदेश से उसका संचालन रुक गया था. दूसरा पक्ष पिछले वर्षों से रामलीला कराता आ रहा था, इसलिए सुविधा और निरंतरता के लिहाज से उसे यह अनुमति दी गई. कहा कि वाद खारिज हो चुका है. उनके अनुसार Interim Order अंतिम आदेश में विलीन हो गया, इसलिए उसके उल्लंघन पर अवमानना नहीं बनती.
याची ने स्वयं पैरवी करते हुए कहा कि बाद में कार्यवाही खारिज होने से Interim Order के दौरान हुआ उल्लंघन मिट नहीं जाता. कोर्ट ने कहा कि यह प्रश्न अब पूर्णतः नया नहीं है. कोर्ट के अनुसार अंतरिम आदेश की अवधि में उल्लंघन करने वाला पक्ष बाद में मुख्य कार्यवाही खारिज होने के आधार पर परिणामों से नहीं बच सकता. कोर्ट ने याचिका पर जवाब मांगा है.