Facts की जानकारी के बजाय कानूनी जानकारी देने पर पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के डिप्टी चीफ इंजीनियर हाईकोर्ट में 29 जून को तलब

Facts की जानकारी के बजाय कानूनी जानकारी देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वोत्तर रेलवे के डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (निर्माण), गोरखपुर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश एसटीएस इंफ्राटेक लि. की याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया.
रेलवे की ओर से पेश वकील ने अदालत के समक्ष डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर द्वारा भेजे गए लिखित निर्देश प्रस्तुत किए. अदालत ने पाया कि इन निर्देशों में मामले के Facts की जानकारी देने की बजाय कानूनी व्याख्याएं और न्यायिक दृष्टांत भरे पड़े हैं.
Facts की जानकारी देने की बजाय इंजीनियर ने अपने निर्देशों में यह बताने की कोशिश की कि मामले को मध्यस्थता के लिए क्यों नहीं भेजा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले क्या कहते हैं, इसकी जानकारी दी. व्यावसायिक अनुबंधों में याचिका क्यों नहीं सुनी जानी चाहिए. कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, कहा डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को किसी वकील की जरूरत ही नहीं है.
अदालत ने कहा कि इंजीनियर के निर्देश तथ्यात्मक (Facts) जानकारी कम और कानूनी सलाह ज्यादा लगते हैं, जो कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. कोर्ट ने डिप्टी चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को 29 जून 2026 (सोमवार) को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया.
निर्देश कानूनी सलाह की तरह क्यों लिखे गए. मांगी गई तथ्यातमक (Facts) जानकारी क्यो नही
कहा उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनके निर्देश कानूनी सलाह की तरह क्यों लिखे गए. मांगी गई तथ्यातमक (Facts) जानकारी क्यो नही है. कोर्ट ने अंतरिम आदेश अगली तारीख तक जारी रखने का आदेश दिया. रजिस्ट्रार अनुपालन को निर्देश दियाग गया कि यह आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गोरखपुर के माध्यम से इंजीनियर को तत्काल भेजा जाय.
दो अभ्यर्थियों को सहायक अभियोजन अधिकारी की मेंस परीक्षा में शामिल होने की अनुमति
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की तरफ से सहायक अभियोजन अधिकारी पर चयन के लिए चलायी जा रही भर्ती प्रक्रिया के अभ्यर्थियों लवली और प्रियंका गौतम को मेंस परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान कर दी है. कोर्ट ने दोनों अभ्यर्थियों को निर्देश दिया है कि वह निर्धारित समय से पहले मेंस के लिए आवेदन कर दिये जाने पर प्रमाण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, इसके बाद आयोग इन्हें प्रवेश पत्र जारी करेगा.
Facts के अनुसार याची लवली ने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन फॉर्म भरा और 15 मई 2026 को हार्ड कॉपी व सभी आवश्यक दस्तावेज भेजे, जो 18 जून 2026 को आयोग कार्यालय में ट्रैकिंग रिपोर्ट के अनुसार प्राप्त हो गए. इसके बावजूद आयोग ने उनकी अभ्यर्थिता इस आधार पर रद्द कर दी कि ऑनलाइन फॉर्म का प्रिंटआउट नहीं भेजा गया.
जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने मामले को विचारणीय मानते हुए आयोग को अंतरिम आदेश दिया कि याचिकाकर्ता का 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन फॉर्म सत्यापित किया जाय. नए हार्ड कॉपी की मांग किए बिना प्रवेश पत्र जारी किया जाए. परिणाम घोषित करने का अधिकार आयोग के पास सुरक्षित रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर परिणाम सीलबंद लिफाफे में अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा. कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया गया है. अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी.
उधर याचिकाकर्ता प्रियंका गौतम के तरफ से इसी कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता ने 2026 की रिट-ए संख्या 9235 (ज्योति गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 4 अन्य) में समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के संबंध में जारी किए गए निर्देशों पर भरोसा जताया जिसमें एक अंतरिम उपाय के माध्यम से, रिट याचिका के नतीजे के अधीन, उम्मीदवारों को अनंतिम रूप से उपस्थित होने की अनुमति दी गई थी.
याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि वह समान रूप से तैनात है और उसने कट-ऑफ तिथि, यानी 29.05.2026 से बहुत पहले अपेक्षित दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन पत्रों की हार्ड कॉपी भेज दी थी. डाक अधिकारियों की ओर से एक त्रुटि के कारण, इन्हें कट-ऑफ तिथि के बाद वितरित किया गया. कोर्ट ने याची को परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हुए उत्तरदाताओं को चार सप्ताह की अवधि के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.