नाबालिग बच्ची की Illegal detention मामले में एसपी हमीरपुर तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की के Illegal detention के मामले में गंभीर संज्ञान लेते हुए हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक को 25 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया है. छतरपुर (मध्य प्रदेश) निवासी चंद्रशेखर रजक की 16 वर्षीय नाबालिग बेटी सुमन रजक 26 मई 2026 से लापता है. पिता ने 27 मई 2026 को थाना ओरछा रोड, जिला छतरपुर में धारा 137(2) बीएनएस के तहत एफआईआर दर्ज कराई.
इसके बाद पिता को विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि अभियुक्त ने उनकी बेटी को हमीरपुर जिले के गुलाबनगर, राठ थाना कोतवाली राठ में अवैध रूप से रखा (Illegal detention) हुआ है. 28 मई 2026 को पिता ने एसएचओ कोतवाली राठ को आवेदन देकर बेटी को Illegal detention से छुड़ाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. 9 जून 2026 को फिर रजिस्टर्ड डाक से आवेदन भेजा गया, तब भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
लड़की 26 मई से अवैध हिरासत (Illegal detention) में है
जस्टिस तेज प्रताप तिवारी ने इस स्थिति को “बेहद दुखद” बताते हुए कहा कि एक 16 साल की लड़की 26 मई से अवैध हिरासत (Illegal detention) में है और पिता की तमाम लिखित अर्जियों के बावजूद पुलिस ने आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की. यह अत्यंत खेद का विषय है. हाईकोर्ट ने एसपी हमीरपुर को रिकॉर्ड के साथ उपस्थित रहने का आदेश दिया है. साथ ही रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया गया है कि यह आदेश तत्काल जिला एवं सत्र न्यायाधीश, हमीरपुर तथा एसपी हमीरपुर को भेजा जाए. अगली सुनवाई 25 जून 2026 को होगी.
युवती को भगा ले जाने के आरोपित को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दी जमानत
युवती को भगा ले जाने के आरोप में करीब दो महीने से जेल में बंद युवक को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहत दे दी है. कोर्ट ने उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आवेदक ट्रायल के दौरान जमानत की आजादी का दुरुपयोग करता है, तो उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए BNSS की धारा 84 के तहत उद्घोषणा (proclamation) जारी की जा सकती है. अगर आवेदक तय तारीख पर अदालत में पेश नहीं होता है, तो ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार उसके खिलाफ BNS की धारा 209 के तहत कार्रवाई शुरू करेगा.
यह जमानत अर्जी आवेदक अंकित की ओर से केस क्राइम नंबर 69/2026 में दायर की गई थी जो थाना कादरीगेट, जिला-फर्रुखाबाद में BNS की धारा 137(2) और 87 के तहत दर्ज है. आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि आवेदक निर्दोष है और उसे इस मामले में झूठा फँसाया गया है. उन्होंने कहा कि BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान के अनुसार, पीड़िता की उम्र 18 साल बताई गई है.
इसके अलावा, पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि उसने खुद आवेदक को बुलाया था।. पीड़िता ने यह भी कहा है कि उसके और आवेदक के बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं बना. उन्होंने कहा कि आवेदक 09.04.2026 से जेल में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. आवेदक जमानत पर रिहा होने का हकदार है. जमानत मिलने पर वह आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा और मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करेगा. AGA ने आवेदक को जमानत देने की मांग का विरोध किया.
अपराध की प्रकृति, सबूत, आरोपी की संलिप्तता, सजा की गंभीरता, दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए और मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने कहा कि यहां जमानत का मामला बनाता है. आवेदक-अंकित, जो उक्त केस क्राइम में शामिल है, को संबंधित अदालत की संतुष्टि के अनुसार उतनी ही राशि का एक पर्सनल बॉन्ड और दो जमानतदार पेश करने पर जमानत पर रिहा किया जाए.