24 करोड़ रुपए Maintenance के लिए CM को भेजे गए पत्र के संबंध में CJ से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल, किसी भी कीमत पर मासिक किराया न देने का प्रस्ताव

इसके बाद आगे आंदोलन की रूपरेखा तय की जायेगी. इसके साथ ही गत 6 जुलाई 2026 को संघर्ष समिति ने Maintenance और चैंबर आवंटन के संबंध में केवल 7 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा था, किसी तरह कोई अंडरटेकिंग नहीं थी, चैम्बर एलाटमेंट समिति की ओर फैलाये जा रहे झूठ की कड़ी निन्दा की गयी. उक्त निर्णय रविवार को दोपहर में कालिंदीपुरम में वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण कुमार गुप्ता के आवास पर चैंबर आवंटन संघर्ष समिति की हुई बैठक में लिए गए.
बैठक में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओक्षा ने कहा कि चैंबर आवंटन के मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं इसलिए बरिष्ठ अधिवक्ताओं को विश्वास में लिया जाय एवं Maintenance और चार्ज के लिए हर महीने वसूले जा रहे 1500 रूपए किराया शुल्क को किसी भी कीमत पर नहीं दिया जायेगा. पूर्व महासचिव ए सी तिवारी ने कहा कि धरोहर राशि लखनऊ पीठ में बने चैंबर की तरह मुख्य एलाटी से 50 हजार रुपए और को एलाटी से 25 हजार रुपए लिए जाय, Maintenance के लिए मासिक शुल्क किसी भी कीमत नहीं दिया जायेगा.
Maintenance के लिए मासिक शुल्क न लिया जाये
बरिष्ठ अधिवक्ता अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि सीनियर अधिवक्ता तो हर तरह सक्षम है लेकिन जूनियर अधिवक्ताओं के हितों का ख्याल रखना चाहिए और Maintenance के लिए मासिक शुल्क नहीं लिया जाये. धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि धरोहर राशि ₹50000-25000 रूपए लखनऊ पीठ की तरह ली जाती है तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन Maintenance के लिए मासिक शुल्क पूरी तरह माफ किया जाय, इस मुद्दे पर अधिवक्ताओं में बहुत आक्रोश है इस पर अधिवक्ता कोई समझौता नहीं करेगा.
धर्मेंद्र यादव ने कहा कि लखनऊ में चैम्बर 2016 में बनकर तैयार हो गए लेकिन आवंटन 2021 तक नहीं हो पाया, अधिवक्ता अधिक धरोहर राशि देने को तैयार नहीं थे, तब 50 हजार रुपए और 25 हजार रुपए के फार्मूले पर सहमति बनी और आवंटन हुआ, यहां अलग नीति से आवंटन गलत है. हरवंश सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट की बिल्डिंगों का जिस तरह Maintenance होता है उसी प्रकार मल्टीलेवल चैम्बर्स बिल्डिंग का किया जाय.
शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर बार का कोई सहयोग नहीं कर और उससे कोई उम्मीद भी नहीं है विधानसभा का सत्र कल से शुरू हो रहा है इस मुद्दे को वहां उठवाया जाय, मासिक शुल्क के मुद्दे पर अधिवक्ताओं में बहुत बड़ा रोष है इस पर कोई समझौता नहीं होगा. ममता मौर्या ने कहा कि नये अधिवक्ताओं की परेशानी Maintenance के लिए मासिक शुल्क 1500 रुपए और बढ़ायेगा क्यों वे आवास का किराया, बच्चों की फीस मुश्किल से दे पाते हैं, इस मासिक शुल्क को पूरी तरह खत्म किया जाए, इस मुद्दे पर महिला अधिवक्ता सबके साथ आंदोलन में भाग लेंगी.
चंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि मासिक शुल्क के मुद्दे पर अधिवक्ता ओं में बहुत रोष है वह किसी भी कीमत पर नहीं देगा. प्रशांत सिंह रिंकू ने कहा कि Maintenance चार्ज पर सरकार पर दबाव बनाया जाय और आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ने के लिए बड़ी बैठक बुलाई जाय. बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने किया, बैठक में संघर्ष समिति के संयोजक राजेश खरे, समिति के अध्यक्ष आरपी तिवारी, महासचिव जगदीश सिंह बुंदेला, संतोष कुमार पाण्डेय, श्रीमती सरिता सिंह, सुनील कुमार, जेएस बघेल, सुशील कुमार यादव आदि उपस्थित रहे.