हाई कोर्ट का आदेश: Village Heads को प्रशासक बनाने के आदेश में कोई गलती नहीं, यूपी में 3 महीने के भीतर कराएं पंचायत चुनाव
दो जजों की बेंच ने 11 याचिकाओं को एक साथ किया निस्तारित, ओबीसी कमीशन पर सवाल कोर्ट ने किया खारिज

यह फैसला दो जजों की बेंच ने बुधवार 14 अक्टूबर को ओपन कोर्ट में सुनाया. खबर अपलोड किये जाने के समय (देर रात तक) तक फैसला हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था. बता दें कि ग्राम (Village) पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानों को ही Village Administrators के रूप में तैयार करने का आदेश जारी किया था. सरकार के इस फैसले को अवैध बताते हुए याचिका में चुनौती दी गयी थी.
इसके अलावा पंचायतों में आरक्षण तय करने के लिए कमेटी के गठन को भी चुनौती दी गयी थी. याचिका में तीसरी मांग पंचायत चुनाव तत्काल कराने की मांग की गयी थी. इन मांगों को लेकर कुल 11 याचिकाएं दाखिल की गयी थीं, जिसमें से छह जनहित याचिका के रूप में थीं. दो जजों की बेंच एक साथ सभी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.
निवर्तमान Village Heads (ग्राम प्रधान) ही प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे
हाईकोर्ट ने कहा कि निवर्तमान Village Heads (ग्राम प्रधान) ही प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे. करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने सुनाया.

कुल 11 याचिकाओं में समय से Village पंचायत चुनाव कराने और प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिकाओं में प्रदेश सरकार के अलावा निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था.
हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव से जुड़ी सभी याचिकाओं को संबद्ध कर दिया था और सभी पर एक साथ सुनवाई हुई. याची दशरथ यादव समेत अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र की ओर से दाखिल याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रही थी. इससे पहले शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान आबीसी कमीशन की रिपोर्ट पेश की गयी थी. इस रिपोर्ट को परखने के बाद कोर्ट ने इसे लेकर गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए यहां तक कह दिया था कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए फील्ड वर्क किया ही नहीं गया है. इसे दफ्तर में ही बैठकर कुछ लोगों ने तैयार कर दिया है.
पिछली सुनवाई के दौरान किये गये कमेंट को देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा था कि कोर्ट आरक्षण तय करने के लिए गठित ओबीसी कमीशन को लेकर भी अपना फैसला निगेटिव रखेगा लेकिन बुधवार को जब फैसला खुली कोर्ट में सुनाया गया तब इस प्वाइंट पर कोर्ट ने कुछ भी नहीं कहा. कमेटी के गठन की वैधता को चुनौती को खारिज कर दिया. इसके बाद कोर्ट ने तीन महीने में Village पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया.
बता दें कि उत्तर प्रदेश में Village पंचायत चुनाव के लिए वोटर लिस्ट को अपडेट करने का काम पहले ही पूरा कराया जा चुका है. तय समय के अनुसार पंचायत चुनाव मई महीने में पूरा कर लिया जाना था लेकिन, ओबीसी आरक्षण कमेटी के गठन में देरी के चलते पंचायत चुनावों को टाल दिया गया था.
इसके बाद सरकार ने वर्तमान Village Heads को ही प्रशासक के रूप में काम करने का आदेश दिया था. जिन गावों के प्रधानों की मौत हो गयी या जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया उन ग्राम पंचायतों में कार्यभार ग्राम पंचायत सचिवों को सौंप दिया गया था. मतदाता सूची के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 12.50 करोड़ से अधिक मतदाता आने वाले चुनाव में गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे.