RTI Act के तहत अनाप शनाप सूचनाएं मांगने पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 6,70,000 रुपये हर्जाना, याचिका खारिज
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होना मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि कोर्ट के विवेकाधिकार पर निर्भर एक सुविधा मात्र : इलाहाबाद हाई कोर्ट

उनकी अपील इस आधार पर खारिज हुई थी कि उन्हें RTI Act के तहत मांगी गई जानकारी रजिस्टर्ड डाक से पहले ही 11 जनवरी 2023 को भेजी जा चुकी थी. कोर्ट के रजिस्ट्रार आरटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 4 जून से 17 जुलाई 2026 के बीच सिर्फ इसी मामले से जुड़ी कोर्ट कार्यवाही के बारे में RTI Act के तहत 24 आवेदन दाखिल किए.
इनमें चीफ जस्टिस सचिवालय की आंतरिक फाइलों की प्रति, कोर्ट की इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लॉग और सर्वर बैकअप रिकॉर्ड, कोर्ट की अटेंडेंस रजिस्टर और बेंच सेक्रेटरी लॉग, सिस्को वेबेक्स के सेशन कमांड लॉग, नेटवर्क सर्वर लॉग और लॉगिन-लॉगआउट टाइमलाइन, फाइल मूवमेंट रजिस्टर व ट्रांजिट लॉगबुक, रोस्टर व्यवस्था संबंधी नोटिफिकेशन, मामलों को पास्ड ओवर चिह्नित करने के कारण जैसी जानकारियां मांगी गयी थी.
हाई कोर्ट ने RTI Act के तहत इन आवेदनों को बेवजह और अस्पष्ट करार देते हुए कहा कि इनसे न्यायिक कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है और न्याय प्रशासन में बाधा पड़ती है. 24 जुलाई 2026 के पिछले आदेश में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर हों. लेकिन 5 अगस्त को वे फिर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए. जिसे कोर्ट ने अपने आदेश की अवहेलना माना.
याचिकाकर्ता ने हैदराबाद से करीब 2000 किमी की दूरी और लॉजिस्टिक समस्याओं का हवाला देकर व्यक्तिगत उपस्थिति से इन्कार किया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होना मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि कोर्ट के विवेकाधिकार पर निर्भर एक सुविधा मात्र है. एक अन्य विवादास्पद बिंदु यह रहा कि याचिकाकर्ता ने फार्मर रिटेन डिक्लेरेशन आप प्रोटेस्ट शीर्षक से एक ईमेल भी दाखिल किया जो न तो शपथ आयुक्त और न ही नोटरी से सत्यापित था. कोर्ट ने इस शीर्षक को अस्पष्ट और अवमाननापूर्ण बताया.
याचिकाकर्ता ने विपक्षी पर जवाबी हलफनामा न दाखिल करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए एक आवेदन दाखिल किया था. कोर्ट ने पाया कि यह आवेदन तथ्यात्मक रूप से गलत था. प्रतिवादी राज्य सूचना आयोग आयुक्त की ओर से RTI Act के तहत जवाब पहले ही दाखिल हो चुका था और उसकी प्रति याचिकाकर्ता के वकील को दी जा चुकी थी. साथ ही, प्रतिवादी 1, 3 और 4 को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया ही नहीं गया था. इस आधार पर कोर्ट ने इस आवेदन को 50,000 के हर्जाने के साथ खारिज कर दिया.
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को RTI Act के तहत जो सूचना चाहिए थी, वह पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, इसलिए मूल याचिका को खारिज कर दिया गया. साथ ही कोर्ट ने यह भी नोट किया कि रिकॉर्ड में मौजूद एक रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता एक शिकायतकर्ता महिला और उसकी बेटी को परेशान कर रहा था. कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि चार हफ्तों के भीतर हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी के बैंक खाते में जमा की जाए. निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माने की राशि का भुगतान न किये जाने पर रजिस्ट्रार जनरल धनराशि की वसूली के लिए उचित कार्रवाई करेंगे.
RTI Act के दुरुपयोग पर किस मद में कोर्ट ने लगाया कितना जुर्माना
- गलत आवेदन पर: 50,000 रूपये
- 24 RTI Act के तहत आवेदनों पर 5,000 रूपये प्रत्येक:कुल 1,20,000 रुपये
- न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए अतिरिक्त: 5,00,000 रुपये
- कुल:6,70,000 रूपये (छह लाख सत्तर हजार रुपये)