इलाहाबाद हाई कोर्ट bar Association के 3 बैंक खातों के संचालन पर एल्डर कमेटी ने लगायी रोक, बैंक को भेजा पत्र

हाईकोर्ट bar Association के तीन बैंक खातों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है. यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट bar Association का चुनाव घोषित किये जाने के बाद व्यवस्था संचालित कर रही एल्डर्स कमेटी ने लिया है. बता दें कि एक दिन पहले ही एल्डर कमेटी ने निवर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाने से इंकार कर दिया था. इसके बाद bar Association के अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा संचालित bar Association के तीन बैंक खातों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्णय लिया है.
कमेटी के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सिंह ने 18 सितंबर 2026 को इंडियन बैंक, सिविल लाइंस शाखा के शाखा प्रबंधक को पत्र भेजकर खातों का संचालन अगले निर्देश तक रोकने को कहा है. पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट bar Association की वर्ष 2025-26 की निर्वाचित कार्यकारिणी का कार्यकाल 12 अगस्त 2025 को कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से एक वर्ष पूरा होने के बाद समाप्त हो चुका है.
13 माह पूरे होने के bar Association के प्रशासनिक कार्य एल्डर्स कमेटी के नियंत्रण में आ जाते हैं
नियम 17 के अनुसार कार्यकारिणी का कार्यकाल एक वर्ष का होता है. इसके बाद चुनाव नहीं होने की स्थिति में एक माह की अतिरिक्त अवधि तक व्यवस्था जारी रहती है. 13 माह पूरे होने के bar Association के प्रशासनिक कार्य एल्डर्स कमेटी के नियंत्रण में आ जाते हैं.
एल्डर्स कमेटी ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि नियम 17 के तहत कमेटी को नई गवर्निंग काउंसिल का चुनाव कराने की जिम्मेदारी मिली है. चुनाव होने तक कमेटी bar Association के आवश्यक दैनिक कार्यों का संचालन करेगी, लेकिन कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेगी.कमेटी ने बैंक को भेजे पत्र में तीन खातों के संचालन पर रोक लगाने को कहा है.
इनमें अधिवक्ता निधि, एडवोकेट वेलफेयर फंड ऑफ एचसीबीए और जनरल अकाउंट (एचसीबीए) शामिल हैं. पत्र के साथ 18 सितंबर 2026 को पारित एल्डर्स कमेटी के प्रस्ताव की प्रति भी संलग्न की गई है. कमेटी के अध्यक्ष वीके सिंह ने बैंक से कहा है कि bar Association की निवर्तमान कार्यकारिणी के अधिकृत व्यक्तियों द्वारा इन खातों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए और एल्डर्स कमेटी के आगामी निर्देशों तक इसे जारी रखा जाए.
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी बरेली से मांगा जवाब, पूछा जांच आदेश के 12 साल बाद क्यों दी कारण बताओ नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पदोन्नति से वंचित रहे चैनमैन हरिओम सिंह के खिलाफ 12साल बाद शुरू हुई विभागीय जांच कार्यवाही पर रोक लगा दी है. यह आदेश जस्टिस मनीष कुमार निगम ने याची अधिवक्ता सैयद वाजिद अली को सुनकर दिया है. बरेली जिले की सदर तहसील में तैनात चैनमैन हरिओम सिंह के विरुद्ध वर्ष 2015 में मीरगंज तहसील में तैनाती के दौरान उपजिलाधिकारी द्वारा एक विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी. इस कार्यवाही का कारण बताओ नोटिस नियमानुसार तत्काल न देकर, पूरे 12 वर्ष के विलंब के बाद 25 जून 2026 को तामील कराया गया था.
इस लंबित विभागीय कार्यवाही की आड़ लेकर जिलाधिकारी बरेली द्वारा 04 जून 2026 को हरिओम सिंह से कनिष्ठ 8 चैनमैनों को लेखपाल के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था, जबकि पात्रता सूची में वरिष्ठ होने के बावजूद हरिओम सिंह का प्रमोशन रोक दिया गया. प्रमोशन से वंचित किए जाने और 12 साल पुराने मामले में नोटिस के विरुद्ध याचिका दायर की गई. याचिका में विभागीय कार्यवाही को निरस्त करने और कनिष्ठों की पदोन्नति तिथि (04 जून 2026) से ही हरिओम सिंह को भी लेखपाल पद पर प्रमोशन देने की मांग की गई है.
जिलाधिकारी बरेली से कोर्ट ने पूछा है कि “ 07 मई 2015 का कारण बताओ नोटिस, 12 वर्ष बीत जाने के बाद 25 जून 2026 को क्यों प्राप्त कराया गया?” न्यायालय ने इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.अगली सुनवाई 28 सितम्बर 2026 को नियत की गई है और तब तक के लिए हरिओम सिंह के विरुद्ध चल रही समस्त विभागीय कार्यवाहियों पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है.