Information के अभाव में कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता, केवल इसके आधार पर किसी पुलिस अधिकारी को कोई दण्ड नहीं दिया जा सकता
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के दरोगा को दिये गये दण्ड को पुष्ट करने वाला ट्रिब्यूनल का आदेश किया रद

पुलिस information के आधार पर कार्रवाई करती है, कार्रवाई के लिए information का अभाव होने पर कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता है और केवल इसके आधार पर किसी पुलिस अधिकारी को कोई दण्ड नहीं दिया जा सकता है. इस कमेंट के साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक नरेश सिंह को कर्तव्य पालन में लापरवाही बताकर दी गयी परिनिन्दा दण्ड की सजा को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के उस फैसले को भी रद कर दिया है जिसमें सजा की पुष्टि की गयी थी.
तथ्यों के अनुसार पहला मामला 7 नवंबर, 2023 को मुजफ्फरनगर जिले के खतौली थाना क्षेत्र में सामने आया था. इस दिन information के आधार पर पुलिस टीम ने शादाब नाम के व्यक्ति के घर से छापा मारकर भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त किया था. इसके करीब ढाई महीने बाद 22 जनवरी 2024 को उसी शादाब के घर में भीषण धमाका हुआ.
information के आधार पर पुलिस टीम ने शादाब नाम के व्यक्ति के घर से छापा मारकर भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त किया
धमाका इतना तीव्र था कि मकान के कंक्रीट का एक स्लैब गिर गया. घटना में दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई. याचिकाकर्ता पर आरोप लगाया गया कि उसने विस्फोटक जमा होने दिए और कोई कार्रवाई नहीं की. विस्फोट के लिए उपनिरीक्षक को लापरवाह बताया गया. याचिकाकर्ता की ओर से वकील विनोद कुमार मिश्रा और राज्य की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल वकील शरद चंद उपाध्याय ने पक्ष रखा.
याचिकाकर्ता दरोगा को विस्फोट की घटना के लिए लापरवाह बताते हुए एसएसपी मुजफ्फरनगर ने 23.03.2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया. कारण बताओ नोटिस में लगाये गये आरोपों के अनुसार प्रकरण की एसपी सिटी द्वारा प्रारंभिक जांच की गई थी.
शुरुआती जांच से पुष्टि हुई कि 08 नवंबर 2023 को खतौली थाने में रशीद, असलम, इरशाद, हसीन उर्फ भूरा और शादाब जो कैलावाड़ा गांव, खतौली के निवासी हैं, के खिलाफ पटाखे बनाने और जमा करने के आरोप में IPC की धारा 286 और विस्फोटक अधिनियम, 1884 की धारा 9B(1)(A) के तहत मुकदमा नंबर 475/23 दर्ज किया गया. विस्फोट की घटना की जांच के बाद चार्ज शीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है.
कारण बताओ नोटिस में कहा गया था कि आरोपी दरोगा ने इसकी जानकारी (information) उच्च अधिकारियों को नहीं दी और न ही नियमों के अनुसार कोई कार्रवाई की कि 07 नवंबर की घटना के बाद शादाब ने अपने घर में फिर से विस्फोटक जमा करना और बनाना शुरू कर दिया था. नोटिस में कहा गया था कि दरोगा का यह व्यवहार सरकारी ड्यूटी के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमानी को दिखाता है. बाद में इसी के आधार पर उन्हें परिनिन्दा दण्ड प्रदान किया गया.

सुनवाई के दौरान स्टेट के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने विभाग से मिले निर्देश को रखा. इसके अनुसार याचिकाकर्ता का बचाव यह था कि वह केवल चौकी इंचार्ज था, इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नहीं. विस्फोटक मिलने के बाद, वह और विस्फोटक जमा होने से रोकने की अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहा, जिसके कारण विस्फोट हुआ.
इन हालात में, लापरवाही साबित हुई और इसलिए निंदा की एंट्री का आदेश दिया गया. उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि इसमें किसी दखल की जरूरत नहीं है. जांच अधिकारी के सामने याचिकाकर्ता ने कहा कि रेड के बाद विस्फोटक जमा होने के बारे में उसे कोई जानकारी (information) नहीं थी.
फाइनल आर्डर में कहा गया था कि 07 नवंबर 2023 को आरोपी शादाब समेत अन्य आरोपियों के पास से विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद, और इस उम्मीद को देखते हुए कि 22 जनवरी 2024 को राम जन्मभूमि मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए पटाखे और आतिशबाजी तैयार की जाएगी, याचिकाकर्ता की यह अहम जिम्मेदारी थी कि वह उन घरों/आरोपियों पर कड़ी नजर रखे जिनके पास से पहले बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, पटाखे और निर्माण सामग्री बरामद की गई थी.
याचिकाकर्ता अपने इलाके में खुफिया जानकारी (information) जुटाने में विफल रहा. उसने केवल यह सफाई दी कि शादाब के घर पर पटाखे बनाने के बारे में उसे किसी भी स्तर पर कोई information नहीं दी गई थी. न तो आरोपी के पड़ोसियों, न ही परिवार के सदस्यों और न ही बीट कांस्टेबल ने.
कोर्ट के पूछने पर श्री उपाध्याय रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से हमें ऐसा कुछ भी नहीं दिखा पाए जिससे यह पता चले कि 7 नवंबर, 2023 को या उसके बाद चौकी में विस्फोटक लाने-ले जाने और जमा करने के बारे में कोई information याची को दी गयी थी या मिली थी.
कोर्ट ने कहा कि राज्य यह साबित नहीं कर पाया है कि नए सिरे से विस्फोटक जमा करने के बारे में मिली किसी information/खुफिया सूचना पर ड्यूटी में कोई लापरवाही बरती गई. पुलिस information मिलने पर ही कार्रवाई करती है. Information न मिलने के कारण कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता. इसके अलावा, रिकॉर्ड से पता चलता है कि विस्फोट होने पर याचिकाकर्ता ने तुरंत कार्रवाई की थी.