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Principal के निलंबन आदेश पर रोक, डीआईओएस की मंजूरी से पहले सुनवाई जरूरी है या नहीं, बड़ी बेंच  करेगी तय

Principal के निलंबन  आदेश पर रोक, डीआईओएस की मंजूरी से पहले सुनवाई जरूरी है या नहीं, बड़ी बेंच  करेगी तय

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्रुखाबाद के कायमगंज स्थित कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की Principal डॉ. विश्वमोहिनी पांडेय के निलंबन और उस पर जिला विद्यालय निरीक्षक की मंजूरी  आदेशों को फिलहाल स्थगित कर दिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है. जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच ने यह आदेश देते हुए मामला बड़ी पीठ को भेजने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है. अब इस प्रकरण की सुनवाई लार्जर बेंच ही करेगी.

याचिकाकर्ता कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की Principal डॉ. पांडेय ने कॉलेज प्रबंधक के 1 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश और डीआईओएस के 4 अगस्त 2026 के अनुमोदन आदेश को चुनौती दी है. कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की Principal डॉ. पांडेय का कहना है कि निलंबन का आधार बनी जांच रिपोर्ट उन्हें कभी नहीं दी गई. अनुमोदन की सुनवाई में प्रबंधक का पक्ष उनकी गैरमौजूदगी में सुना गया और उन्हें जवाब का मौका नहीं मिला.

किसान यूनियन के कार्यकर्ता कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की Principal के खिलाफ लगातार शिकायतें करते रहे

याचिका के अनुसार, एक छात्रा के पिता, जो किसान यूनियन के कार्यकर्ता हैं, कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की Principal के खिलाफ लगातार शिकायतें करते रहे. 2025 में तीन सदस्यीय समिति की जांच (रिपोर्ट 5 दिसंबर 2025) में आरोप निराधार पाए गए थे. इसके बाद दोबारा बनी समिति की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन हुआ. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे व प्रदीप कुमार द्विवेदी ने कहा कि धारा 16-जी(7) के तहत मंजूरी देते समय डीआईओएस को शिक्षक और प्रबंधन दोनों को सुनवाई का मौका देना और तर्कसंगत आदेश पारित करना चाहिए.

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प्रतिवादी के अधिवक्ता योगेश कुमार सक्सेना ने कहा कि निलंबन दंड नहीं है और अधिनियम या विनियमों में मंजूरी के चरण पर सुनवाई का कोई प्रावधान नहीं है. कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस को सिर्फ प्रथम दृष्टया संतुष्टि दर्ज करनी होती है कि आरोपों में बल है या नहीं, और वह आरोपों के गुण-दोष में नहीं जा सकता. साथ ही उसे संक्षिप्त कारण वाला आदेश देना जरूरी है.

लेकिन सुनवाई के सवाल पर हाई कोर्ट की दो खंडपीठों के फैसलों में मतभिन्नता है. एक पक्ष में सुनवाई जरूरी बताई गई है, दूसरे में नहीं. कोर्ट ने कहा कि एकल पीठ के लिए किसी खंड पीठ से असहमति जताना उचित नहीं होगा, इसलिए मामला बड़ी पीठ को भेजा जाए.

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धारा 16-जी(6) व (7) और विनियम 39 के तहत निलंबन की मंजूरी या नामंजूरी के चरण पर क्या प्रबंधन, शिक्षक या Principal को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए? कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया पूरी कार्यवाही जिला प्रशासन की जांच से उपजी लगती है, जबकि कार्यवाही शुरू करना शिक्षा अधिकारियों का क्षेत्राधिकार है. इसी आधार पर दोनों आदेश अगले आदेश तक स्थगित रहेंगे.

कोकिल अग्रवाल पीडीए की पैनल अधिवक्ता नियुक्त

इलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता सुश्री कोकिल अग्रवाल प्रयागराज विकास प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता नियुक्त की गई है.जो प्राधिकरण की ओर से हाई कोर्ट में वादों की पैरवी करने के लिए अधिकृत की गई है. इस आशय का आदेश प्राधिकरण के विधि अधिकारी ने जारी किया है.

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