National Law University प्रयागराज: जातिगत भेदभाव केस प्रोफेसर की अपील पर सुनवाई से चीफ जस्टिस ने खुद को अलग किया

चीफ जस्टिस भंसाली National Law University यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं. यह अपील चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने तब आई, जब इससे पहले एक डिवीजन बेंच ने रिट याचिका में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई और न्यायिक अधिकारियों के जरिए आरोपों की जांच कराने के सिंगल जज के फैसले पर सवाल उठाया था. बेंच ने कहा कि National Law University यूनिवर्सिटी के ‘इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल’ (समान अवसर सेल) को, पहली नजर में, आरोपों की जांच करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
कोर्ट ने निर्देश दिया कि स्पेशल अपील की अगली सुनवाई की तारीख तक रिट-सी में आगे की कार्यवाही रुकी रहेगी. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर न्यायिक अधिकारियों की रिपोर्ट दाखिल की जाती है तो उसे सीलबंद लिफाफे में रखा जाए. यह मामला National Law University के दो छात्रों, एक पीएचडी रिसर्च स्कॉलर और पांचवें सेमेस्टर के बीए छात्र (जो यूनिवर्सिटी का एलएलबी (ऑनर्स) छात्र भी है) द्वारा लॉ डिपार्टमेंट के हेड और बॉयज हॉस्टल के वार्डन के खिलाफ उठाए गए मुद्दों से जुड़ा है.
National Law University के लॉ डिपार्टमेंट के हेड और बॉयज हॉस्टल के वार्डन ने अपने अधिकार का इस्तेमाल जाति-आधारित अपमान के हथियार के तौर पर किया
उनकी शिकायत थी कि प्रतिवादी National Law University के लॉ डिपार्टमेंट के हेड और बॉयज हॉस्टल के वार्डन (डॉ. दीपक शर्मा जो अब हाईकोर्ट में अपीलकर्ता हैं) ने अपने एकेडमिक और प्रशासनिक अधिकार का इस्तेमाल “जाति-आधारित अपमान और बदले की भावना” के हथियार के तौर पर किया. पांचवें सेमेस्टर के छात्र ने 20 अगस्त, 2026 को National Law University के वाइस-चांसलर को शिकायत सौंपी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि बार-बार याद दिलाने और और शिकायतें करने के बावजूद यूनिवर्सिटी ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की.