+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के कैमरी में Firing के आरोपी को दी जमानत, 15 महीने से बंद था जेल में

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के कैमरी में Firing के आरोपी को दी जमानत, 15 महीने से बंद था जेल में

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर जिले के कैमरी थाना क्षेत्र में Firing के आरोपी इंद्रजीत सिंह की सशर्त जमानत  स्वीकार कर ली है. जस्टिस संतोष राय की एकलपीठ ने यह आदेश दिया. Firing के आरोपी इंद्रजीत सिंह की दूसरी जमानत अर्जी थी. इससे पहले उनकी पहली जमानत अर्जी  कोर्ट ने 10 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था.

आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस मिश्र व चंद्रकेश मिश्रा ने बहस करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को सिविल विवाद के चलते Firing के आरोप में  झूठा फंसाया गया है. बताया गया कि आरोपी की ओर से एक सिविल वाद दायर किया गया था, जिसमें सक्षम सिविल कोर्ट ने उनके पक्ष में निषेधाज्ञा आदेश पारित किया था.

यह भी दलील दी गई कि आरोपी ने निजी बचाव के तहत चोट पहुंचाई. कोर्ट का ध्यान घटनास्थल के नक्शे की ओर दिलाते हुए कहा गया कि Firing के कारतूस आरोपी के घर से बरामद दिखाए गए हैं, लेकिन घटनास्थल की सही स्थिति नक्शे में स्पष्ट नहीं है और घटनास्थल बदलता रहा है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.

पर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि आरोपी की भूमिका Firing में गंभीर है

राज्य की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि आरोपी की भूमिका Firing में गंभीर है और एफआईआर के अनुसार घायल को Firing से चोट पहुंचाने का मुख्य आरोप उन्हीं पर है. गवाहों और स्वयं घायल रियाज़ुद्दीन के बयान में भी आरोपी का नाम लिया गया है, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से भी होती है. जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर Firing में इस्तेमाल हथियार भी बरामद हुआ. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के कन्हैया बनाम मध्य प्रदेश राज्य और पंकज बनाम राजस्थान राज्य मामलों के फैसलों का हवाला भी दिया गया.

इसे भी पढ़ें….Select इसमें कोई विवाद नहीं कि राज्य सरकार के पास वेतनमान तय करने और कर्मचारियों के बीच Cadre Classification करने की शक्ति है

Firing के इस मामले में आरोपी की मां सुखदीप कौर को भी सह-आरोपी बनाया गया था, जिन पर उकसाने का आरोप था. लेकिन जांच अधिकारी को उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले और चार्जशीट में उन्हें यह कहते हुए बरी कर दिया गया कि घटना के समय वे भारत में मौजूद ही नहीं थीं.

मामले में ट्रायल शुरू हो चुका है. अभियोजन पक्ष के दो प्रत्यक्षदर्शी/घायल गवाह नियाज अहमद और रियाजुद्दीन के साथ-साथ तीसरे गवाह आरिफ  की गवाही भी पूरी हो चुकी है. कोर्ट ने पाया कि इन प्रमुख गवाहों की गवाही पूरी हो जाने के बाद अब गवाहों को डराने-धमकाने की आशंका नहीं रह जाती.

इसे भी पढ़ें…. Surrogacy (Regulation) Act 2021 के तहत उम्र की पाबंदी सख्ती से लागू करना प्रजनन संबंधी स्वायत्तता का उल्लंघन: हाई कोर्ट

कोर्ट ने आरोपी की लंबी हिरासत अवधि (करीब 15 महीने), आपराधिक इतिहास न होने, ट्रायल पूरा होने में लगने वाले अनिश्चित समय और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की.  कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना पारित किया गया है.

इसे भी पढ़ें…. हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्डियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6(a) के तहत, Minor children की कस्टडी आम तौर पर माँ के पास होती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *