गिरफ्तारी मेमो कम्प्लीट नहीं, काउंटर एफीडेविट में सही जवाब नहीं, आरोपित को हाई कोर्ट से interim relief

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले में कानपुर के गिरफ्तार अर्जुन यादव को interim relief के रूप में जमानत देते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस से कार्रवाई को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने अवैध निरूद्धि के खिलाफ दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर यह आदेश दिया है.
अर्जुन यादव को किदवई नगर थाने में दर्ज एफआईआर के तहत गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि उन्होंने सह-अभियुक्त मनीष कुमार के खाते में रूपये 20,55,499 ट्रांसफर किए और एक संगठित गिरोह में शामिल रहे. हालांकि अर्जुन यादव का कहना है कि यह रकम हैदराबाद में विश्वविद्यालय खोलने के लिए दिया गया कर्ज था, जिसके एवज में मनीष कुमार ने रूपये 10 लाख का चेक सुरक्षा के रूप में दिया था.
याची अधिवक्ता का कहना था कि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का समय 18 मई 2026, दोपहर 1:04 बजे दर्शाया गया है, जबकि सीसीटीवी फुटेज से साफ है कि अर्जुन यादव को 17 मई 2026 को शाम 3:53 बजे ही हिरासत में ले लिया गया था, जब वे अपनी पत्नी और डेढ़ साल के बच्चे के साथ कहीं जा रहे थे.
फुटेज यह भी दिखाता है कि उनकी कार 17 मई की रात 11:47 बजे संजय वन पुलिस चौकी पर खड़ी थी. अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी मेमो में परिवार को सूचित किए जाने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है. मेमो में गंगा सागर यादव का नाम और मोबाइल नंबर तो दर्ज है, लेकिन उनके और श्रीमती बीना यादव के हस्ताक्षर लिए गए या नहीं, यह स्पष्ट नहीं किया गया.
सरकारी जवाबी हलफनामे में भी इस बिंदु पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. अदालत ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण सहित पूरक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
interim relief के रूप में अर्जुन यादव को रूपये 50,000 के व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदार पेश करने होंगे
कोर्ट ने interim relief के रूप में अर्जुन यादव को रूपये 50,000 के व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदार (समान राशि) कानपुर नगर के सी जे एम की संतुष्टि के अनुसार प्रस्तुत करने पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया. अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को होगी.
अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न के दोषी अफसर की सजा बरकरार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के 12 वर्षीय बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न के दोषी अफसर की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस संतोष राय ने यह फैसला सुनाया. वर्ष 2015 में रामपुर जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में दर्ज इस मामले में अभियुक्त अफसर पर आरोप था कि उसने 25 मार्च 2015 को बाजार से 12 वर्षीय बच्चे को बहला-फुसलाकर बैटरी चालित रिक्शे में बिठाया और शाहाबाद गेट के पास एक खेत में ले जाकर उसकेग साथ जबरदस्ती अप्राकृतिक यौनाचार किया.
रामपुर की विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने 15 मई 2023 को अफसर को धारा 323, 377 भारतीय दंड संहिता तथा पाक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी पाया था और सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. जिसको जेल अपील दाखिल कर चुनौती दी गई थी. जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पीड़ित के बयान और ट्रायल के दौरान लिए गए साक्ष्य, दोनों में कोई विरोधाभास नहीं पाया गया.पाक्सो अधिनियम की धारा 29 व 30 के अंतर्गत अभियोजन पक्ष ने आधारभूत तथ्य साबित किए हैं. ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई स्पष्ट त्रुटि या विकृति नहीं है. कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अभियुक्त अब तक लगभग सात वर्ष जेल में बिता चुका है और उसे धारा 428 सीआरपीसी के तहत इस अवधि का लाभ मिलेगा.
एसपी, एसडीएम और एसओ को नोटिस, 48 घंटे में दाखिल करें जवाबी हलफनामा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शामली जिले के पुलिस अधीक्षक, उप-जिलाधिकारी (ऊन) और थाना थानाध्यक्ष को नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. रवींद्र कुमार की याचिका की सुनवाई जस्टिास जेजे मुनीर और जस्टिस अरुण कुमार की खंडपीठ ने की. कोर्ट ने पाया कि कैराना स्थित सिविल जज (जूनियर डिवीजन), शामली द्वारा 31 मार्च 2026 को अस्थायी निषेधाज्ञा के आदेश की प्रतिवादी संख्या 6 से 17 द्वारा खुलेआम अवहेलना की जा रही है. इनमें विशेष रूप से प्रतिवादी संख्या 17 अनिल उर्फ बबलू का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो इस मामले को सिविल अवमानना के रूप में संज्ञान लेकर अवमानना मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि इस आदेश की सूचना आज ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, शामली के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दी जाए. अगली सुनवाई 25 जून 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है. याचिका पर अधिवक्ता प्रद्युम्न त्रिपाठी ने बहस की.