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High Court Decision

यदि Victim है बालिग और आचरण से उसकी सहमति स्पष्ट है, तो बलात्कार या अपहरण के आरोप में सजा कायम नहीं रखा जा सकता

22 साल पुराने अपहरण के मुकदमे के सभी जीवित आरोपित इलाहाबाद हाई कोर्ट से बरी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी मुकदमे में यदि Victim बालिग है और उसकी गतिविधियों व आचरण से उसकी सहमति स्पष्ट होती है, तो बलात्कार या अपहरण के आरोपों…

High Court Decision

37 साल पुराने Criminal Case में ‘कुंभकरण’ को आजीवन कारावास की सजा इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रखी बरकरार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक Criminal Case पर अपना फैसला सुनाते हुए लगभग 37 साल पुराने मामले में निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह से बरकरार रखा है. जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने Criminal अपील संख्या 1697/1989 में फैसला देते हुए अपीलकर्ता कृष्ण…

High Court Decision

Child witness के बयान पर सजा सुनाया जाना संभव लेकिन संदेह होने पर भरोसेमंद सबूतों का महत्व ज्यादा, 41 साल बाद हत्या के आरोप बरी

कोई Child witness तथ्यों के बारे में बयान देने में सक्षम है, तो उसके बयान के आधार पर सजा सुनाई जा सकती है. लेकिन सावधानी के नियम के तौर पर कोर्ट को रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य भरोसेमंद सबूतों से उसके बयान की पुष्टि देखनी चाहिए. कम उम्र होने के कारण…