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समय पर बहस करने नहीं पहुंचने पर Senior counsel को 50 हजार जमा करने का आदेश, घायल अधिवक्ता को दी जाएगी राशि

समय पर बहस करने नहीं पहुंचने पर Senior counsel को 50 हजार जमा करने का आदेश, घायल अधिवक्ता को दी जाएगी राशि

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान याची के senior counsel के बहस के लिए उपस्थित न होने पर उन्हें 50 हजार रुपये जमा करने का आदेश दिया जो राशि घायल counsel जागृति शुक्ला की सहायता के लिए दी जाएगी जो वर्तमान में एसजीपीजीआई लखनऊ में भर्ती हैं. जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ में बुधवार को जितेंद्र सिंह गौतम की याचिका लगी थी. याची की ओर से कोई counsel उपस्थित नहीं हुआ. अदालत के पूर्व आदेश के अनुपालन में हमीरपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आलोक सिंह कोर्ट में उपस्थित हुए.

सुनवाई के दौरान बीएसए की ओर से अधिवक्ता ऋषु मिश्रा ने बताया कि याची को ज्वाइन कराने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया है. याचिका अर्थहीन हो चुकी है. इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया. हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के senior counsel 50 हजार रुपये इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पक्ष में जमा करें. यह धनराशि घायल counsel जागृति शुक्ला की मदद के रूप में दी जाएगी.

Senior counsel जब तक यह राशि जमा नहीं नहीं करते याची को नौकरी ज्वाइन करने की अनुमति नहीं होगी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक यह राशि जमा नहीं की जाती तब तक याचिकाकर्ता को बीएसए हमीरपुर के आदेश के आधार पर ज्वाइन करने की अनुमति नहीं होगी. अदालत ने आदेश की प्रति बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय और सचिव अखिलेश कुमार शर्मा को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया. बाद में senior counsel आरके ओझा कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने 50 हजार रुपये जमा करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

Advocate Council ऋतेश श्रीवास्तव समेत 5 अधिवक्ता हाईकोर्ट बार से निष्कासित, एडवोकेट रोल और चैम्बर आवंटन सूची से नाम हटाए जाने का प्रस्ताव भी पारित

इलाहाबाद हाईकोर्ट के Advocate Council ऋतेश श्रीवास्तव समेत उनके चार सहयोगी Advocate Council केके यादव, दीपक शुक्ला, विवेक कुमार पाल एवं अनुज कुमार सेन की सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव बार एसोसिएशन की अचानक बुलाई गई आम सभा में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. बार एसोसिएशन के लाइब्रेरी हाल में हुई सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी पांचों अधिवक्ताओं की हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की सदस्यता से निष्कासित किए जाने के साथ ही उनका नाम एडवोकेट रोल तथा चैम्बर आवंटन की सूची से हटाए जाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया है.

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सभा की अध्यक्षता राकेश पांडे बबुआ और संचालन महासचिव अखिलेश कुमार शर्मा ने किया . आमसभा में अध्यक्ष एवं महासचिव दोनों को अधिकृत किया गया कि उनके अन्य सहयोगियों को भी शीघ्रातिशीघ्र चिन्हित करके उनके विरुद्ध भी उचित कार्यवाही की जाए. साथ ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नियमावली में संशोधन पर विचार हेतु आमसभा की तिथि 06 जुलाई तय की गई है. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की वार्षिक आम सभा 10 जुलाई को कराए जाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया है. जिसमें वार्षिक बजट व चुनाव की घोषणा पर विचार होगा.

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आम सभा में पूर्व महासचिव जे बी सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष हरबंश सिंह, विष्णु प्रताप पाण्डेय, सुभाष चन्द्र यादव, शशि प्रकाश सिंह, प्रशान्त सिंह, मनीष द्विवेदी, सुमित कुमार श्रीवास्तव, अभिजीत कुमार पाण्डेय, रीमा गुप्ता, आई के चौबे, रामानुज तिवारी, अरुण कुमार त्रिपाठी, बीरेन्द्र कुमार मिश्र के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमलेश कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्षगण अमित कुमार सिंह, राज कुमार तिवारी, हनुमान प्रसाद मिश्र, दिनेश वरूण, संयुक्त सचिव प्रशासन बैरिस्टर सिंह, संयुक्त सचिव लाइब्रेरी शशि कुमार द्विवेदी, संयुक्त सचिव प्रेस रामेश्वर दत्त पाण्डेय, संयुक्त सचिव महिला बिन्दू कुमारी, कोषाध्यक्ष अंजनी कुमार मिश्र, कार्यकारिणी सदस्य अंजली सिंह तोमर, कनक कुमार त्रिपाठी, दिवांशु तिवारी, बलदेव शुक्ल, अभिषेक तिवारी, तृप्ति यादव, आरती गुप्ता, अखण्ड प्रताप त्रिपाठी, गया प्रसाद मिश्र, गिरीश चन्द्र शुक्ला, अनिरूद्ध सिंह, अवनीश चन्द्र त्रिपाठी, कृष्ण मोहन पाण्डेय, आदित्य धर द्विवेदी, अमित सिंह सेंगर आदि उपस्थित रहे.

यह जानकारी संयुक्त सचिव प्रेस रामेश्वर दत्त पाण्डेय की ओर से दी गई. उधर, अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव ने बताया कि आम सभा बुलाने के लिए बाइलाज के अनुसार सात दिन की नोटिस दी जानी चाहिए. आपात बैठक बुलाकर की गई कार्रवाई अवैध है. किसी भी Advocate Council की सदस्यता समाप्त करने से पहले आरोपों की जांच की जानी चाहिए और पक्ष सुनकर दोषी पाए जाने की रिपोर्ट आम सभा में रखी जानी चाहिए. आम सभा नियम विरुद्ध बुलाई गई और बिना वोट विभाजन किए प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया.सारी प्रक्रिया सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम व बार एसोसिएशन के बाइलाज का खुला उल्लंघन है.

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