4 अप्रैल 2026 का रामपुर Shooting incident: आरोपी कुलदीप सिंह की इलाहाबाद हाईकोर्ट से Bail मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर जिले के बिलासपुर थाना क्षेत्र में हुए Shooting incident में आरोपी कुलदीप सिंह को सशर्त मंजूर कर ली है. यह आदेश जस्टिस अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने दिया है. कुलदीप सिंह पर Shooting incident में भारतीय न्याय संहिता की धारा 352, 109(1) और 3(5) के तहत आरोप हैं. घटना 4 अप्रैल 2026 को दर्ज एफआईआर से जुड़ी है, जो घायल व्यक्ति प्रेम सिंह के बेटे की शिकायत पर दर्ज कराई गई थी.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और उसका बेटा खेत में विवाद के दौरान पहुंचे और गोली (Shooting incident) चला दी, जिससे प्रेम सिंह को गोली लगी. बचाव पक्ष का कहना था कि पक्षों के बीच संपत्ति को लेकर बंटवारे का मुकदमा लंबित था, और इसी विवाद के चलते जब पक्षकार खेत जोत रहे थे तब आरोपी ने उन्हें रोका था.
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता की दलील थी कि कुलदीप सिंह को झूठा फंसाया गया है. गोली चलाने (Shooting incident) की विशिष्ट भूमिका सह-अभियुक्त गुरशन सिंह की बताई गई है, जिससे हथियार भी बरामद हुआ है. कुलदीप सिंह पर केवल उकसाने का आरोप है. आरोपी ने स्वयं घटना (Shooting incident) में चोट लगने का दावा करते हुए सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत आवेदन दिया था.
Shooting incident में आरोपी 5 अप्रैल 2026 से जेल में बंद है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. आरोपी के विरुद्ध दो पुराने आपराधिक मामले हैं एक में स्वीकारोक्ति के आधार पर सजा हुई थी, जबकि दूसरे में अभी समन तक जारी नहीं हुआ है. अपर शासकीय अधिवक्ता ने Bail का विरोध किया. उनका कहना था कि उकसाने की भूमिका आरोपी की ही है, प्रत्यक्षदर्शी का बयान भी Shooting incident में आरोपी के खिलाफ है, चोटें गंभीर प्रकृति की हैं और हथियार सह-अभियुक्त से बरामद हुआ है. इसलिए Bail अर्जी खारिज की जानी चाहिए.
कोर्ट ने Shooting incident में बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए Bail अर्जी स्वीकार कर ली
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने पाया कि आरोपी की भूमिका Shooting incident में केवल उकसाने की है, जबकि मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है. इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए Bail अर्जी स्वीकार कर ली. कोर्ट ने आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने और मामले की निष्पक्ष व त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया.