+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

किसी कर्मचारी के Seasonal Collection Amin या वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी के तौर पर की गई सेवा को उन्हें पेंशन का फायदा देने के लिए गिना जाना चाहिए

किसी कर्मचारी के Seasonal Collection Amin या वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी के तौर पर की गई सेवा को उन्हें पेंशन का फायदा देने के लिए गिना जाना चाहिए
Anish-Kumar-Gupta J.

किसी कर्मचारी द्वारा Seasonal Collection Amin या वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी के तौर पर की गई सेवा को उन्हें पेंशन का फायदा देने के लिए गिना जाना चाहिए. उनकी नियुक्ति का नाम चाहे वे दिहाड़ी मजदूर हो, अस्थायी हो या कुछ और, पेंशन और रिटायरमेंट के फायदे पाने के उनके दावे पर विचार करने के लिए जरूरी नहीं है. अदालतों द्वारा विभिन्न केसों का निस्तारण करते हुए तय की गयी इस व्यवस्था को नजीर मानते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की बेंच ने झांसी के Collection Amin को रिटायरमेंट से जुड़े भुगतान और पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया है.

जस्टिस गुप्ता की बेंच सीजनल संग्रह अमीन के पद पर नियुक्ति होने के बाद सेवानिवृत्त होने से करीब दो साल पहले नियमित किये गये कर्मचारी अलख प्रकाश मिश्रा की तरफ से दाखिल दो अपीलों पर एक साथ सुनवाई कर रही थी. पहली याचिका में कर्मचारी को नियमित करने की मांग की गयी थी. चूकिं याची की नियुक्ति पहले ही कन्फर्म की जा चुकी थी, इसलिए कोर्ट ने रिट A संख्या 15905/2014 को याचिका को खारिज कर दिया. दूसरी रिट A संख्या 20364/2019 में याचिकाकर्ता ने सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति देय राशि की मांग की थी.

याचिकाकर्ता को 1984 में Seasonal Collection Amin के रूप में नियुक्त किया गया था

तथ्यों के अनुसार याचिकाकर्ता को 1984 में Seasonal Collection Amin के रूप में नियुक्त किया गया था. इसके बाद से उन्हें समय-समय पर Seasonal Collection Amin के रूप में लगातार काम पर रखा जाता रहा. याचिकाकर्ता और समान स्थिति वाले अन्य लोगों को 15.12.1991 से 28.02.1992 की अवधि के लिए अस्थायी आधार पर Collection Amin के पद पर नियुक्ति दी गई थी. 1992 के बाद याचिकाकर्ता की अस्थायी नियुक्ति को आगे नहीं बढ़ाया गया.

इसे भी पढ़ें….राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति के बिना पारित यूपी का किराया विनियमन कानून 2021 आंशिक रूप से असंवैधानिक करार

इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता ने रिट याचिका संख्या 5973/1992 (अलख प्रकाश शर्मा बनाम अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, वित्त और राजस्व, झांसी और अन्य) दायर की, जिसका निपटारा इस न्यायालय द्वारा 2006 में किया गया. इसमें डीएम को निर्देश दिया गया था कि वह याची को Collection Amin के तौर पर सर्विस को रेगुलर करने की मांग में दी गयी अर्जी का दो महीने में निस्तारण करें और स्पीकिंग आर्डर दें. इस दौरान एक और तथ्य रखा गया कि याचिका दाखिल होने के बाद कोर्ट के अंतरिम आदेश के चलते याची 2006 तक एड-हॉक/ Collection Amin के तौर पर काम करता रहा.

कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने झांसी के डीएम को अर्जी दी, जिसे खारिज कर दिया गया. याचिकाकर्ता के रेगुलर होने के दावे का निपटारा इस टिप्पणी के साथ किया गया कि उत्तर प्रदेश कलेक्शन अमीन्स सर्विस रूल्स, 1974 के तहत कलेक्शन अमीन के पद के लिए चयन करते समय, Seasonal Collection Amin के 35% कोटे के खिलाफ सीनियरिटी लिस्ट और योग्यता के आधार पर याचिकाकर्ता के रेगुलर होने के दावे पर विचार किया जाएगा. झांसी के डीएम के इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट A संख्या 60795/2007 दायर करके चुनौती दी.

इसका निपटारा 2012 में हुआ. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि झांसी के डीएम का नजरिया सही नहीं है. कारण यह है कि अगर डीएम Collection Amin की उपलब्ध खाली जगहों के लिए रेगुलर सिलेक्शन नहीं करना चाहते थे, तो उन्हें याचिकाकर्ता को Seasonal Collection Amin के तौर पर काम करने से रोकने का अधिकार नहीं था, जब तक कि Seasonal Collection Amin के कोटे में रेगुलर सिलेक्शन न हो जाए.

इसे भी पढ़ें….School Uniform के साथ हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत गारंटीकृत नहीं

कोर्ट ने डीएम के आदेश को रद्द कर दिया था और डीएम को निर्देश दिया कि  वे याचिकाकर्ता को Seasonal Collection Amin के तौर पर काम पर रखें, जैसा कि आमतौर पर तहसीलदार या झांसी के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाता है. इस बीच, अगर Seasonal Collection Amin के 35% कोटे में खाली जगहें उपलब्ध हैं, तो रेगुलर अपॉइंटमेंट के लिए याचिकाकर्ता और अन्य सीजनल कलेक्शन अमीन के दावों पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि चूंकि याचिकाकर्ता को 2006 से काम करने से रोक दिया गया था, इसलिए उसके रेगुलर सिलेक्शन के दावे पर विचार करते समय, 2006 से पहले उसके द्वारा दी गई सेवाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा. इसका मतलब है कि रेगुलर सिलेक्शन के लिए 2006 से पहले के चार ‘फसली’ (कृषि वर्ष) के दौरान उसके काम पर विचार किया जाएगा.

निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, याचिकाकर्ता ने फिर से झांसी के डीएम के सामने एक आवेदन दिया. इस आवेदन का निपटारा करते हुए कहा गया कि Seasonal Collection Amin के तौर पर नियुक्ति काम की जरूरत के आधार पर और सरकार की मंजूरी मिलने पर ही की जानी है. फिलहाल, ‘सीजनल कलेक्शन अमीन’ की नियुक्ति के लिए मंजूरी नहीं है. जब भी ऐसी मंजूरी मिलेगी, याचिकाकर्ता को ‘सीजनल संग्रह अमीन’ के तौर पर नियुक्त किया जाएगा.

इसे भी पढ़ें…. नियुक्ति सही और नियुक्त व्यक्ति ने सरकारी आदेशों के अनुसार अगले उपलब्ध वर्किंग डे पर जॉइन किया, तो बीच में पड़ने वाली छुट्टी सर्विस की निरंतरता को खत्म नहीं कर सकती

याचिकाकर्ता ने डीएम के आदेश को चुनौती देते हुए रिट याचिका संख्या 15905/2014 दायर की. इस रिट याचिका के लंबित रहने के दौरान, याचिकाकर्ता और अन्य लोगों को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए 03.09.2016 के आदेश से दो साल की प्रोबेशन अवधि के लिए Collection Amin के पद पर रेगुलराइज (स्थायी) कर दिया गया. इसके बाद उसने 05.09.2016 को ज्वाइन किया. दो साल की प्रोबेशन अवधि संतोषजनक ढंग से पूरी होने पर 2018 में उसे संग्रह अमीन के पद पर कन्फर्म (स्थायी) कर दिया गया. इसके बाद 2019 में वह Collection Amin के पद से रिटायर हो गया.

इसके बाद याचिकाकर्ता ने पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े अन्य बकाया भुगतान, जिसमें Seasonal Collection Amin, टेम्पररी कलेक्शन अमीन और रेगुलर कलेक्शन अमीन के तौर पर उनकी कुल सेवा अवधि को ध्यान में रखे जाने की बात करते हुए दावा किया. याचिकाकर्ता के इस दावे पर विचार नहीं किया गया तो उसने रिट याचिका संख्या 20364/2019 दायर की.

याचिकाकर्ता के वकील ने इस कोर्ट के 08.10.2021 के फैसले (रिट A नंबर 5817/2020 – कौशल किशोर चौबे और 4 अन्य बनाम यूपी राज्य और 4 अन्य) और 21.10.2024 के फैसले (रिट A नंबर 9522/2024 राजेंद्र बहादुर सिंह और 4 अन्य बनाम यूपी राज्य और अन्य) का हवाला देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 1984 से Seasonal Collection Amin  के तौर पर दी गई अपनी सेवाओं को जोड़कर पेंशन लाभ का हकदार है.

इसे भी पढ़ें….निलंबन काल में अटैचमेंट प्लेस पर अटेंडेंस न देना, जांच में सहयोग न करने वाले को Teacher भत्ते व पेंशन का हक नहीं

वकील ने सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रेम सिंह बनाम यूपी राज्य’ (2019 AIR SC 516) मामले के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि किसी कर्मचारी द्वारा नियमित होने से पहले ‘वर्क-चार्ज कर्मचारी’ के तौर पर दी गई सेवाओं को पेंशन लाभ की गणना के लिए माना जाएगा. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता 1984 से ‘सीजनल संग्रह अमीन’ और उसके बाद 1989 से ‘टेम्पररी संग्रह अमीन’ के तौर पर काम कर रहा था और बाद में उसे Collection Amin के पद पर नियमित किया गया, इसलिए उसने पेंशन लाभ के लिए पात्र होने लायक पर्याप्त सेवा पूरी की है.

राज्य के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के ‘उदय प्रताप ठाकुर और अन्य बनाम बिहार राज्य और अन्य’ मामले के फैसले का हवाला दिया. (सिविल अपील नंबर 31155/2023), जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 28.04.2023 के अपने फैसले और आदेश के जरिए ‘प्रेम सिंह’ मामले के फैसले को साफ किया है. कोर्ट ने कहा है कि एड-हॉक/वर्क-चार्ज कर्मचारी की पिछली सर्विस को सिर्फ पेंशन के लिए जरूरी सर्विस (क्वालिफाइंग सर्विस) के तौर पर गिना जाएगा. पेंशन की कैलकुलेशन के लिए अस्थायी वर्क-चार्ज या एड-हॉक/अस्थायी काम के तौर पर की गई पिछली सर्विस के सालों को नहीं गिना जा सकता.

इसे भी पढ़ें…. एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस के बजाय सीधे हाईकोर्ट आने की प्रवृत्ति चिंताजनक, हाई कोर्ट ने कहा मजिस्ट्रेट की अदालत में जाना वैकल्पिक उपचार

स्टैंडिंग काउंसेल का कहना था कि अगर ‘उदय प्रताप ठाकुर’ मामले के फैसले के हिसाब से पिछली सर्विस की कैलकुलेशन की जाए (यानी पाँच साल की सर्विस को एक साल माना जाए) और यह भी मान लिया जाए कि याचिकाकर्ता ने 1984 से 2016 तक (यानी रेगुलर होने की तारीख तक) लगातार अस्थायी तौर पर काम किया है, तो यह 32 साल की सर्विस होगी. इसका 1/5 हिस्सा लगभग 6 साल और 5 महीने होगा. इसमें याचिकाकर्ता की रेगुलर सर्विस (2 साल, 10 महीने और 16 दिन) जोड़ने पर भी, याचिकाकर्ता पेंशन का फ़ायदा पाने के लिए जरूरी 10 साल की सर्विस पूरी नहीं कर पाएगा.

सभी तथ्यों को परखने के बाद कोर्ट ने कहा कि, यदि हम 1984 से 2008 तक और 2012 से 2016 तक याचिकाकर्ता की पिछली सर्विस को ध्यान में रखें, तो यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता ने पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े अन्य लाभों के लिए पात्रता हेतु 10 साल की जरूरी सर्विस का बेंचमार्क पूरा कर लिया है. पेंशन की गणना केवल याचिकाकर्ता द्वारा की गई नियमित सर्विस के आधार पर ही की जा सकती है इसलिए, याचिकाकर्ता को पेंशन से जुड़े लाभ केवल 05.09.2016 से 31.07.2019 तक उनके द्वारा की गई सर्विस के आधार पर ही दिए जाएँगे.

प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता को पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े लाभ देने के लिए पात्र मानें. जहाँ तक पेंशन और रिटायरमेंट के बकाया भुगतान की राशि का सवाल है, इसकी गणना याचिकाकर्ता द्वारा 05.09.2016 से 31.07.2019 तक की गई नियमित सेवा के आधार पर की जाएगी. कोर्ट ने इस आदेश का पालन करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है.

WRIT – A No. – 20364 of 2019; Alakh Prakash Mishr Vs State of U.P. and 2 others
Along with :
Writ – A No. 15905 of 2014: Alakh Prakash Mishra Vs State of U.P. and 4 others

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *