Village Assembly की जमीन निजी संस्थाओं को आवंटित करने का विवाद पहुंचा हाई कोर्ट, नोटिस जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार ने Village Assembly की जमीन निजी संस्थानों को आवंटित करने के खिलाफ संदीप कुमार की याचिका पर विपक्षियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता ने भदोही जिले के तहसील ज्ञानपुर स्थित कैंप इटहरा के सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी है. इससे चकबंदी कार्यवाही के दौरान गांव सभा (Village Assembly) की जमीन निजी संस्थाओं को आवंटित कर दी गई थी.
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम, 1953 की धारा 48(3) के तहत आवेदन देकर गांव सभा (Village Assembly) की जमीन आवंटन को चुनौती दी थी, लेकिन उप जिलाधिकारी ने सहायक चकबंदी अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उस आवेदन को खारिज कर दिया. आवेदन खारिज करने का आधार यह बताया गया कि इससे जुड़ा एक विवाद पहले से हाईकोर्ट में लंबित है.
याचिकाकर्ता पक्ष ने इस तर्क को गलत बताते हुए कहा कि पूर्व में लंबित मामला प्लॉट संख्या 345 और 1135 की भूमिधरी भूमि से संबंधित है, जबकि वर्तमान विवाद पुराने प्लॉट संख्या 347एम , 360, 343एम , 344/1एम और 362एम से जुड़ा है, जो Village Assembly की भूमि के रूप में दर्ज हैं. यह भी आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी संख्या 5 ने प्रतिवादी संख्या 3 और 4 के साथ मिलीभगत कर झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके आधार पर उप संचालक चकबंदी, भदोही ने याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज किया.
न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रतिवादी संख्या 3 और 4 को एक सप्ताह के भीतर रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट से नोटिस भेजने का निर्देश दिया. सभी प्रतिवादियों को छह सप्ताह में प्रतिवाद शपथपत्र दाखिल करने तथा उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने की अनुमति दी गई है.
भूमि सीमांकन को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से मांगी जानकारी, सुनवाई 31 को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भागीरथी निवासी ग्राम हरिपुर उर्फ मिश्रपुर, परगना केवाई, तहसील हंडिया, जिला प्रयागराज की भूमि सीमांकन को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है और अगली सुनवाई की तिथि 31अगस्त नियत की है. यह आदेश जस्टिस सीके राय ने याची अधिवक्ता अभिषेक यादव को सुनकर दिया है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि गाटा संख्या 442, रकबा 0.1480 हेक्टेयर भूमि पर वे व अन्य संयुक्त रूप से भूमिधर हैं और खतौनी में उनका नाम दर्ज है. उनके अनुसार भूमि के स्वामित्व व हक-हुकूक को लेकर कोई विवाद नहीं है और वे मौके पर काश्तकारी कब्जे में हैं.
याचिका में बताया गया है कि आस-पास के खातेदारों ने जानबूझकर मेड़ तोड़कर उनकी भूमि में अतिक्रमण कर लिया, जिससे सीमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया. इस पर उप जिलाधिकारी हंडिया ने यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 24 के तहत 11 सितंबर 2025 को सीमांकन का आदेश पारित किया था, तथा 24 अप्रैल 2026 को इसका निष्पादन आदेश भी जारी हुआ, लेकिन याचिकाकर्ता के अनुसार अब तक इसका पालन नहीं हुआ है.