इलाहाबाद हाई कोर्ट बार Association अध्यक्ष और रजिस्ट्रार जनरल के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट बार Association, इलाहाबाद के अध्यक्ष राकेश पांडेय और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मनजीत सिंह श्योराण के खिलाफ सिविल अवमानना याचिका दाखिल की है. याचिकाकर्ता के अनुसार, हाईकोर्ट प्रशासन ने 22 नवंबर 2024 को कार्यालय ज्ञापन संख्या 998/एडमिन. जी-1/इलाहाबाद जारी किया था, जिसमें शपथपत्र दाखिल करने वालों के फोटो सत्यापन और पहचान संख्या जारी करने की प्रक्रिया तय की गई थी.
इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जिस अधिवक्ता के पास हाईकोर्ट द्वारा जारी ‘एओआर’ (एडवोकेट ऑन रोल) नंबर है, उसे फोटो पहचान संख्या जारी करने से इन्कार नहीं किया जाएगा. याचिकाकर्ता का आरोप है कि 31 मई 2026 को हाईकोर्ट बार Association के फोटो सत्यापन केंद्र के कर्मचारियों ने उनके एओआर नंबर (A/R1302/2012) के आधार पर शपथकर्ता को फोटो पहचान संख्या जारी करने से इन्कार कर दिया. कर्मचारियों ने कोई वैध कारण बताए बिना यह सुविधा देने से मना कर दिया.
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 4 अगस्त 2026 को दोनों प्रतिवादियों बार Association अध्यक्ष और रजिस्ट्रार जनरल को लिखित प्रतिवेदन देकर स्थिति से अवगत कराया और कार्यालय ज्ञापन का पालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया, लेकिन याचिका के अनुसार कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई.
याचिका में प्रार्थना की गई है कि प्रतिवादियों को अदालत के आदेश (कार्यालय ज्ञापन संख्या 998) की जानबूझकर अवमानना के लिए उचित रूप से दंडित किया जाए, तथा अंतरिम रूप से फोटो सत्यापन केंद्र के कर्मचारियों को एओआर धारक अधिवक्ताओं को पहचान संख्या जारी करने का निर्देश दिया जाए.
हाईकोर्ट बार Association पूर्व गवर्निंग काउंसिल सदस्य ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर की आपत्ति
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार Association, के चुनाव 2026-27 के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से Association के आजीवन सदस्य और पूर्व गवर्निंग काउंसिल सदस्य ऋतेश श्रीवास्तव ने अनंतिम मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. श्रीवास्तव का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से हाईकोर्ट में लगातार वकालत कर रहे हैं और पूर्व चुनावों में वैध मतदाता रह चुके हैं, बावजूद इसके इस बार उनका नाम सूची से गायब है.
Association की वेबसाइट पर उनकी सदस्यता समाप्त होने की जानकारी दी गई है, जबकि उनका कहना है कि संगठन के नियमों में सदस्यता समाप्ति का कोई प्रावधान ही नहीं है. सदस्य को केवल नियम 51 और 52 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के जरिए ही निष्कासित किया जा सकता है, जिसमें विशेष सूचना, दो-तिहाई बहुमत से गुप्त मतदान और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है.
श्रीवास्तव का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया, न कोई विशेष बैठक बुलाई गई, न ही उन्हें सुना गया और न ही गुप्त मतदान हुआ. उन्होंने बताया कि Association के तत्कालीन संयुक्त सचिव (प्रेस) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति से स्पष्ट होता है कि सदस्यता समाप्ति का निर्णय ध्वनि मत से लिया गया, जो नियमानुसार तय प्रक्रिया का उल्लंघन है.
उन्होंने आरोप लगाया कि पदाधिकारियों ने जानबूझकर उनकी सदस्यता को अवैध रूप से समाप्त किया, ताकि उनके पक्ष में चल रही चैंबर आवंटन प्रक्रिया को रद्द किया जा सके. उनका कहना है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब वे एसआरएन अस्पताल, प्रयागराज में वकीलों पर हुए हमले के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे थे.
श्रीवास्तव ने पिछले तीन वर्षों में हर वर्ष दायर और बहस किए गए पांच मामलों का विवरण अलग से संलग्न करते हुए मांग की है कि अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम शामिल किया जाए. इस आशय का पत्र मुख्य चुनाव अधिकारी को दिया गया है.]