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18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को POCSO Act की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष जागरूकता अभियान का शुभारंभ

18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को POCSO Act की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष जागरूकता अभियान का शुभारंभ

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा POCSO Act  (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012) के संबंध में विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है. अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को POCSO Act के विधिक प्रावधानों, उनके अधिकारों एवं दायित्वों तथा उल्लंघन के कानूनी परिणामों के प्रति जागरूक करना है.

यह अभियान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस विक्रम नाथ के नेतृत्व तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक जस्टिस अरुण भंसाली और इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस अरिंदम सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है.

POCSO Act के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना जाता है

अभियान के माध्यम से छात्रों, विशेष रूप से किशोर बालकों एवं युवा पुरुषों को यह समझाने पर जोर दिया जा रहा है कि POCSO Act के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना जाता है तथा ऐसे मामलों में बच्चे की सहमति को कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है. सहमति, स्नेह, मित्रता अथवा विवाह की इच्छा से संबंधित भ्रांतियों को दूर करना और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ यौन संबंधों के कानूनी परिणामों के प्रति युवाओं को संवेदनशील बनाना अभियान का मुख्य उद्देश्य है.

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चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने अपने संदेश में कहा कि कई युवा इस बात से अनजान रहते हैं कि POCSO Act 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है. बच्चों से जुड़े ऐसे कृत्य, जिन्हें बच्चे सहमति से किया गया अथवा मामूली समझ सकते हैं, गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकते हैं. बच्चों को यौन शोषण से बचाने तथा युवाओं को कानून की अज्ञानता के कारण आपराधिक कार्यवाही में फंसने से रोकने के लिए POCSO Act प्रावधानों की जानकारी आवश्यक है.

जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने कहा कि जागरूकता ही शोषण तथा कानून के उल्लंघन से बचाव का प्रभावी माध्यम है. उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों एवं दायित्वों को समझने, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विधिक सहायता प्रणाली एवं बाल संरक्षण तंत्र से सहायता लेने का आग्रह किया. अभियान के प्रथम चरण में प्रदेश के सभी जिलों के न्यायिक अधिकारियों ने स्कूलों का दौरा कर प्रातःकालीन प्रार्थना सभाओं में POCSO Act के प्रावधानों और कानूनी परिणामों की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर दिए. किशोरों में सूझबूझ एवं जिम्मेदार आचरण को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया.

अभियान का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों, जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारियों, बाल संरक्षण एजेंसियों एवं अन्य हितधारकों के समन्वय से किया जा रहा है. प्रभावी संचालन एवं समन्वय के लिए जिला स्तरीय निगरानी समितियों का गठन किया गया है, जिनमें जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक शामिल हैं. प्रत्येक स्कूल में एक अध्यापक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है. नोडल अधिकारियों को अभियान के उद्देश्यों एवं POCSO Act के प्रमुख प्रावधानों के संबंध में संवेदनशील बनाया जा रहा है.

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अभियान के अंतिम चरण में गांधी जयंती के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा प्रभात फेरी, नुक्कड़ नाटक, ड्राइंग एवं पेंटिंग प्रतियोगिता सहित विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. प्राधिकरण के अनुसार यह पहल प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचेगी. POCSO Act के संबंध में सरल, स्पष्ट और सही जानकारी उपलब्ध कराकर बच्चों को शोषण से बचाने और कानून की जानकारी के अभाव में युवाओं के आपराधिक कार्यवाही में संलिप्त होने की संभावना को कम करने का प्रयास किया जा रहा है.

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