औराई के BJP MLA की तहरीर पर दर्ज केस की सुनवाई पर रोक, चेयरमैन का टिकट दिलवाने के लिए कथित तौर पर 23 लाख रुपये लेने के आरोप को को बताया था छवि खराब करने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले की औराई सीट से BJP MLA दीनानाथ भाष्कर द्वारा नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का टिकट दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 23 लाख रुपये लिये जाने का वीडियो जारी होने के बाद BJP MLA की तरफ से दर्ज करायी गयी एफआईआर पर चल रहे केस प्रोसीडिंग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम डी. चौहान की बेंच ने भदोही स्थित विशेष अदालत द्वारा पारित 16 दिसंबर 2025 के संज्ञान व सम्मन आदेश के साथ-साथ इस मामले की पूरी आपराधिक कार्यवाही पर 2 नवंबर 2026 तक के लिए रोक लगा दी है.
यह याचिका विनीत जायसवाल उर्फ राजू जायसवाल और विपुल पांडे की तरफ से दाखिल की गयी थी. बता दें कि इस संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट औराई के भाजपा विधायक (BJP MLA) दीनानाथ भाष्कर की तरफ से एक वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज करायी गयी थी. BJP MLA मूल रूप से भदोही के रहने वाले हैं लेकिन उनका मकान वाराणसी में भी है जहां वह रात्रि प्रवास करते हैं. प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दी गयी तहरीर में BJP MLA ने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ एक वीडियो लोकल यूट्यूब चैनल पर वायरल कराया गया.
इसमें आरोप लगाया गया था कि 29 मई 2023 को विनीत जायसवाल उर्फ राजू जायसवाल BJP MLA के आवास पर पूर्व विधायक रविन्द्र नाथ त्रिपार्ठी, आशीष सिंह बघेल और हौसला प्रसाद पाठक की मौजूदगी में मिले और उन्हें 23 लाख रुपये कैश उन्हें सौंपा. यूट्यूब पर अपलोड किये गये वीडियो में आरोप लगाया गया था कि यह रुपये भाजपा विधायक को श्री जायसवाल ने अपनी पत्नी को नगर पालिका परिषद भदोही से चेयरमैन पद का टिकट दिलाने के लिए पैरवी करने के लिए दिये गये थे.
(BJP MLA ने तहरीर में आरोप लगाया था कि वीडियो वायरल करने से पहले उनसे कोई बातचीत नहीं की गयी थी. इसके अलावा एक आडियो भी वायरल किया गया जो उनके और विनीत जायसवाल के बीच मोबाइल पर बातचीत पर आधारित बताया गया था. BJP MLA ने आरोप लगाया गया था कि यह सब उनकी राजनीतिक छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया गया था. चूंकि वह अनुसूचित जाति के हैं, इसलिए उन्हें अपमानित करने की नीयत से बिना किसी प्रमाण के ऐसा किया गया.
BJP MLA ने तहरीर में विनीत जायसवाल के अलावा कथित पत्रकार विपुल पांडे को आरोपित किया था
BJP MLA ने तहरीर में विनीत जायसवाल के अलावा कथित पत्रकार विपुल पांडे को आरोपित किया था. इसके आधार पर औराई थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था और पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनो आरोपियों के खिलाफ चार्ज शीट कोर्ट में पेश की. ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट को संज्ञान लिया और समन जारी किया. ट्रायल कोर्ट के संज्ञान और समन आदेश के साथ ही केस की सम्पूर्ण प्रोसीडिंग रोकने की मांग में इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी थी.
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में तर्क दिया कि कथित घटना 29 मई 2023 की है, जबकि BJP MLA ने एफआईआर बिना किसी स्पष्टीकरण के करीब छह महीने की देरी के बाद 15 नवंबर 2023 को दर्ज कराई गई. याचियों के अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक दल के अध्यक्ष से शिकायत करना मानहानि नहीं है और वर्तमान कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है. उन्होंने यह भी दलील दी कि मामले के तथ्यों के आधार पर एससीएसटी एक्ट का कोई अपराध नहीं बनता है.
विपक्षी अधिवक्ता यह स्पष्ट करने में विफल रहे कि मामले में एससी एसटी एक्ट के प्रावधान कैसे लागू होते हैं. हाईकोर्ट ने याचियों के वकीलों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए माना कि मामला विचारणीय है और विपक्षी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.