+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

Medical Officer के लिए PG डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश का विकल्प 2016-17 की पॉलिसी के बाद बंद, चिकित्सक की याचिका खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा नीट पीजी में शामिल होने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं

Medical Officer के लिए PG डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश का विकल्प 2016-17 की पॉलिसी के बाद बंद, चिकित्सक की याचिका खारिज

Medical Officer के लिए पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (NEET-PG) में शामिल होना अनिवार्य है. 2016-17 में प्रवेश की व्यवस्था में लागू हो चुके परिवर्तन के चलते किसी Medical Officer को इससे इतर जाकर लाभ नहीं दिया जा सकता है. इस कमेंट के साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की बेंच ने Medical Officer डॉ राजेन्द्र प्रसाद विश्वकर्मा की याचिका को खारिज कर दिया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस याचिका का खारिज होना किसी भी प्रकार से याचिकाकर्ता Medical Officer की आगामी नीट परीक्षाओं में बैठने की पात्रता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं डालेगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2016-2017 के बाद पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया में नीतिगत बदलाव हो चुके हैं, जिसके तहत अब चयन केवल नीट (NEET-PG) परीक्षा के माध्यम से ही संभव है.

इसे भी पढ़ें…रिमांड मजिस्ट्रेट ने मांगी माफी, जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच ने की अस्वीकार, कहा न्यायिक कार्य के भारी दबाव की आड़ में अपने कर्तव्यों से नहीं बच सकते

याचिकाकर्ता डॉ. राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा (PMHS) के तहत एलोपैथिक Medical Officers (क्लास-II) के रूप में कार्यरत हैं. उनकी नियुक्ति 8 दिसंबर 2006 को हुई थी. वर्ष 2015 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, उत्तर प्रदेश द्वारा 8 दिसंबर 2015 को एक विज्ञापन जारी किया गया था. इसके तहत वर्ष 2016-2017 के लिए एमबीबीएस डिग्री धारक Medical Officer से पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन मांगे गए थे.

याची ने भी इसके लिए आवेदन किया था, लेकिन उनके आवेदन पर इस आधार पर विचार नहीं किया गया कि उनके सेवा रिकॉर्ड में कुछ प्रतिकूल प्रविष्टियाँ थीं और उनके खिलाफ अदालत में एक रिट याचिका लंबित थी. इसके बाद याची ने वर्ष 2017 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका संख्या 8896/2017 दाखिल की, जिसे 28 फरवरी 2017 को इस छूट के साथ निस्तारित किया गया कि वह सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद Medical Officer ने विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 मार्च 2017 को खारिज कर दिया गया

कोर्ट के आदेश के बाद Medical Officer ने विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा 28 मार्च 2017 को खारिज कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने एक अन्य रिट याचिका (संख्या 19900/2017) दाखिल की. 27 मार्च 2019 को यह याचिका मंजूर कर ली गई और प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे याची के दावे पर नए सिरे से विचार करें.

इसे भी पढ़ें…विशेषज्ञ समिति के निष्कर्षों के खिलाफ अदालतें अपीलिया प्राधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकती हैं और न ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दोबारा करने का आदेश दे सकती हैं

न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन में, जब सक्षम प्राधिकारी ने याचिकाकर्ता के मामले पर नए सिरे से विचार किया, तो 14 फरवरी 2020 को उनके दावे को फिर से खारिज कर दिया गया. 23 मई 2011 के शासनादेश के तहत उम्मीदवारों की पात्रता तय करते समय पिछले पांच वर्षों के गोपनीय चरित्र रोल (ACR) का मूल्यांकन किया जाता है. वर्ष 2013-2014 में प्रतिकूल प्रविष्टि होने के कारण उन्हें योग्य नहीं पाया गया था.

राज्य सरकार द्वारा 30 दिसंबर 2016 को जारी शासनादेश के जरिए यह स्पष्ट किया गया था कि वर्ष 2016-2017 का सत्र पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए आखिरी सत्र था. इसके बाद विभाग स्तर पर सीधे डिप्लोमा में प्रवेश बंद कर दिए गए और सभी सीटों के लिए नीट-पीजी परीक्षा के माध्यम से महानिदेशालय, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के स्तर पर काउंसलिंग अनिवार्य कर दी गई.

इसे भी पढ़ें… साल पुराने Murder मामले में दो दोषियों को हाई कोर्ट ने माना किशोर, सजा रद्द कर मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया

अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे और प्रस्तुत तर्कों का बारीकी से अध्ययन किया. न्यायालय ने पाया कि 30 दिसंबर 2016 के शासनादेश के बाद अब विभाग में बिना नीट परीक्षा के सीधे पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश देने की कोई व्यवस्था शेष नहीं है. चूँकि नीतिगत बदलाव हो चुके हैं और वर्ष 2016-17 के बाद से प्रवेश पूरी तरह से राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (NEET-PG) के अधीन हैं, इसलिए वर्तमान समय में याचिकाकर्ता को वर्ष 2016-17 के किसी पुराने बैच या रिक्त सीटों के विरुद्ध सीधे प्रवेश देना कानूनी रूप से संभव नहीं है.

इन तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने Medical Officer की वर्तमान रिट याचिका को खारिज कर दिया. हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस याचिका का खारिज होना किसी भी प्रकार से याचिकाकर्ता की आगामी नीट परीक्षाओं में बैठने की पात्रता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं डालेगा. यदि याचिकाकर्ता नियमों के अनुसार अन्यथा पात्र हैं, तो वे नियमानुसार एनओसी प्राप्त कर नीट-पीजी परीक्षा में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं.

इसे भी पढ़ें…किसी Decision में वैधानिक कारणों या साक्ष्यों का उचित विश्लेषण नहीं तो वह कानून की नजर में टिक नहीं सकता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *