जैन इंटर कॉलेज, जेवर के 7 Assistant teachers के चयन मंजूरी और वेतन भुगतान पर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को आंशिक रूप से बदला
सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ स्टेट ने दाखिल की थी स्पेशल अपील, कोर्ट ने कहा संयुक्त शिक्षा निदेशक मूल चयन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सत्यता की जांच करें

कोर्ट ने सात Assistant teachers की नियुक्तियों और उनके वेतन भुगतान से जुड़े मामले में स्पष्ट किया कि वैधानिक अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी किए बिना सीधे परमादेश के जरिए वेतन जारी करने का निर्देश देना उचित नहीं है, क्योंकि नियुक्ति पर मुहर लगाना कोई केवल प्रशासनिक या यांत्रिक कार्य नहीं है, बल्कि इसमें कानून के तहत उचित रूप से विचार किया जाना आवश्यक है.
यह पूरा विवाद वर्ष 2016 की चयन प्रक्रिया से जुड़ा है. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में स्थित जैन इंटर कॉलेज, जेवर एक अल्पसंख्यक संस्थान (Minority Institution) है. संस्थान में Assistant teachers के कुल स्वीकृत पदों के विरुद्ध रिक्तियों को भरने के लिए प्रबंध समिति द्वारा कार्रवाई की गई थी.
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराकर आवेदन लिये गये और फिर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 26 और 27 दिसंबर 2016 को साक्षात्कार आयोजित किए गए. विज्ञापित 8 रिक्तियों में से 7 पदों पर Assistant teachers चयन प्रक्रिया पूरी की गई और चयनित अभ्यर्थियों का पूरा रिकॉर्ड जिला विद्यालय निरीक्षक के पास 28 दिसंबर 2016 को अनुमोदन के लिए भेज दिया.
डीआईओएस कार्यालय द्वारा 25 जनवरी 2017 को इस प्रस्ताव पर कुछ आपत्तियां और स्पष्टीकरण मांगे गए थे, जिनका जवाब प्रबंध समिति द्वारा 20 फरवरी 2017 को संतोषजनक ढंग से दे दिया गया था. चयन प्रक्रिया पूरी होने और रिकॉर्ड भेजे जाने के लगभग 8 महीने बाद, 19 जुलाई 2017 को संस्थान में एक नई प्रबंध समिति का गठन हुआ. इस नई प्रबंध समिति ने पूर्व समिति द्वारा की गई Assistant teachers नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को रद्द करने का प्रस्ताव पारित कर दिया.
इसी आधार पर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने 31 अक्टूबर 2017 को अपने आदेश के जरिए Assistant teachers की नियुक्ति को अस्वीकार कर दिया और प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके अतिरिक्त, एक अन्य आधार यह भी बनाया गया था कि पद कथित तौर पर Lapse हो चुके हैं. इसके खिलाफ प्रभावित शिक्षकों (पंकज कुमार व अन्य) ने एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी.

एकल पीठ ने 18 जुलाई 2025 को अपने आदेश में माना कि अल्पसंख्यक संस्थान द्वारा नियमों के तहत चयन प्रक्रिया पूरी की गई थी और डीआईओएस द्वारा समय पर कोई आपत्ति न उठाए जाने पर इसे ‘डीम्ड अप्रूवल’ (Deemed Approval) माना जाना चाहिए. साथ ही, एकल पीठ ने Assistant teachers को तत्काल प्रभाव से वेतन भुगतान का आदेश दिया था.
राज्य सरकार की ओर से पेश अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि नई प्रबंध समिति ने खुद माना था कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं, इसलिए डीआईओएस द्वारा अनुमोदन अस्वीकार करना पूरी तरह वैध था.
वहीं, उत्तरदाताओं (चयनित Assistant teachers) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि चयन पारदर्शी तरीके से हुआ था और केवल बाद की प्रबंध समिति के राजनीतिक या आपसी विवादों के कारण पूर्व में हुए वैध चयनों को मनमाने ढंग से नकारा नहीं जा सकता. इसके अलावा, मुकदमे के दौरान ही 8 जनवरी 2024 को एक नए प्रस्ताव के जरिए उस पुरानी रद्दीकरण वाले प्रस्ताव को भी निरस्त किया जा चुका है.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में Assistant teachers की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किए:
यांत्रिक तरीके से निर्णय नहीं लिया जा सकता: न्यायालय ने माना कि संयुक्त शिक्षा निदेशक को Assistant teachers की नियुक्ति केवल इस आधार पर अनुमोदन खारिज नहीं करना चाहिए था कि बाद की प्रबंध समिति ने कोई नया प्रस्ताव पारित कर दिया है. प्राधिकरण को रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से यह जांच करनी चाहिए थी कि चयन कानून के दायरे में हुआ था या नहीं.
पदों का अस्तित्व: राज्य सरकार की ओर से ‘पदों के लैप्स होने’ वाले तर्क पर कोई विशेष बल नहीं दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संस्थान में स्वीकृत पद रिक्त थे और विज्ञापन भी नियमों के अनुसार ही जारी किया गया था.
वेतन भुगतान से पहले अनुमोदन अनिवार्य: खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश में आंशिक संशोधन किया जिसमें बिना अनुमोदन के सीधे वेतन भुगतान का आदेश दिया गया था. अदालत ने कहा कि वेतन जारी करने का निर्देश देने से पहले सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत अनुमोदन होना कानूनी रूप से आवश्यक है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एकल पीठ के आदेश में संशोधन किया और निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश: न्यायालय ने संयुक्त शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि वे एक महीने के भीतर सभी संबंधित पक्षों (प्रबंध समिति और चयनित अभ्यर्थियों) को सुनकर मामले में नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर आदेश पारित करें.
साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच: संयुक्त शिक्षा निदेशक को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे Assistant teachers नियुक्ति पर केवल 19 जुलाई 2017 के बाद की प्रबंध समिति के प्रस्ताव या किसी निराधार संदेह के आधार पर फैसला न लें, बल्कि मूल चयन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की सत्यता की जांच करें.
वेतन और एरियर का भुगतान: यदि संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा Assistant teachers नियुक्तियों को अनुमोदित (Approve) कर दिया जाता है, तो मूल याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर वर्तमान वेतन का भुगतान किया जाएगा और उनके द्वारा किए गए कार्य के आधार पर बकाए वेतन (Arrears) का भुगतान अगले तीन महीने के भीतर कर दिया जाएगा.