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आम सभा में चर्चा होने से पहले तक रोका जाय हाई कोर्ट में अधिवक्ताओं को Chamber Allotment की प्रक्रिया, 517 अधिवक्ताओं से हस्ताक्षरित ज्ञापन चीफ जस्टिस को सौंपा

इलाहाबाद हाईकोर्ट अधिवक्ता Chamber Allotment नियमावली के विरोध में अधिवक्ताओं ने परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अंबेडकर चौराहे पर बैठक की. बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में  अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश, महानिबंधक व बार एसोसिएशन को 517 अधिवक्ताओ से हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपा.

आम सभा में चर्चा होने से पहले तक रोका जाय हाई कोर्ट में अधिवक्ताओं को Chamber Allotment की प्रक्रिया, 517 अधिवक्ताओं से हस्ताक्षरित ज्ञापन चीफ जस्टिस को सौंपा

अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन की आम सभा बुलाने की मांग की. कहा कि आवंटन समिति व बार के पदाधिकारियों की सहमति बार एसोसिएशन की सहमति नहीं है. बार कार्यकारिणी ने आम सभा में कोई प्रस्ताव नहीं रखा और हाईकोर्ट को गुमराह किया. जिससे Chamber Allotment नियमावली में कई आपत्तिजनक खामियां मौजूद हैं जो अधिवक्ता व्यवसाय की गरिमा को कमतर करती है और नैसर्गिक न्याय के विपरीत है. मुख्य न्यायाधीश से अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जबतक बार एसोसिएशन की आम सभा नियमावली पर विचार नहीं कर लेती जबरन थोपा न जाय.

गर्मी की छुट्टी में अधिवक्ता शहर से बाहर है, अधिवक्ताओं की पीठ पीछे Chamber Allotment प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और आपत्ति का समय जुलाई तक बढ़ाया जाय. ज्ञापन में आपत्ति की गई है कि टैक्स सहित मासिक किराया और किराया न देने पर वकालत का अधिकार छीनने का नियम एडवोकेट एक्ट का मखौल है. यह काला पानी जैसी सजा के समान है. सिक्योरिटी के नाम पर पगड़ी की वसूली गैरकानूनी है. मर्यादा का हनन है.

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ज्ञापन में कहा गया है कि दरवाजे पर न्याय देने वाली न्यायपालिका अधिवक्ताओं को ही अदालत में बैठने की अनुमति नहीं दे रही. कैसा न्याय है. केस की मनमानी रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए गए हैं. ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता अविनाश कुमार वर्मा, वैजंत मिश्र, धर्मेंद्र सिंह यादव, सुभाष सिंह, अनिल कुमार, चित्रांशु श्रीवास्तव, मयंक श्रीवास्तव, लोरिक यादव, सुशील कुमार, दिलीप श्रीवास्तव, आलोक पाण्डेय,आदि शामिल थे.

आल इंडिया लायर्स यूनियन के आशुतोष कुमार त्रिपाठी, राजकुमार त्रिपाठी,आदि तमाम वकीलों ने भी ज्ञापन सौंपा और Chamber Allotment नियमावली पर रोक की मांग की. इसपर विचार के लिए आमसभा बुलाने की मांग की. पूर्व संयुक्त सचिव संतोष कुमार मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने Chamber Allotment में बार पदाधिकारियों व Chamber Allotment समिति की मनमानी व गैर कानूनी नियम बनाने का विरोध किया और कहा कि सरकार के पैसे से बने चेंबर का आवंटन कुछ नामिनल राशि लेकर या  निःशुल्क किए जाने की मांग की.

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राय साहब यादव ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के अधिवक्ताओं को वकालत करने से रोकने की प्रक्रिया बंद की जाय. वरिष्ठ अधिवक्ता सीपी उपाध्याय ने भी मनमानी का कडा विरोध किया है. महेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि बार की सहमति से उचित व्यवस्था बनाकर आवंटन किया जाय. ऑल इंडिया लायर्स यूनियन Chamber Allotment रूल्स 2026 पर आपत्ति दाखिल किया और Chamber Allotment एप्लीकेशन आमंत्रण तत्काल रोकने की मांग किया है. जब तक हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की विशेष जनरल बॉडी मीटिंग में एलाटमेंट रूल्स,2026 पर सहमति नहीं हो जाती है कोई भी एक पक्षीय कार्रवाई अभी रोक दिया जाए.

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन उपाध्यक्ष राजकुमार त्रिपाठी ने आपत्ति स्वीकार किया और चीफ जस्टिस को बार के कवर लेटर के साथ भेजने को कहा. इसके बाद आपत्ति को रजिस्ट्रार जनरल के आफिस में रिसीव कराया गया. इसके पूर्व बाबासाहेब डॉक्टर बी आर अंबेडकर की मूर्ति पर पूर्व उपाध्यक्ष  बार एसोसिएशन धर्मेंद्र सिंह यादव द्वारा नए चैंबर रूल्स के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में भाग लिया और इलू ने चेंबर रूल्स के विरोध में किए जा रहे  आंदोलन को समर्थन किया.

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ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन द्वारा Chamber Allotment को लेकर उठाई गई आपत्तियां:-

  • 1. अधिवक्ताओं के लिए कोई  कामन रूम और कामन एरिया का प्रावधान न करना और कामन एरिया में उनके जाने पर दंडात्मक प्रावधान.
  • 2. महिला अधिवक्ताओं के लिए रेस्ट रूम, क्रेच की व्यवस्था नहीं करना फ्री वॉशरूम की व्यवस्था नही करना आदि.
  • 3. एआईएलयू की मुख्य और गंभीर आपत्ति में नए 2026 रूल्स में अलोकतांत्रिक, संविधान विरोधी तथा अधिवक्ताओं के गरिमा और व्यवसाय  विरोधी प्रावधानों को लेकर है. जैसे यदि तीन लगातार महीनों तक किराया में डिफॉल्ट होने पर अधिवक्ता से दंडात्मक किराया वसूल करना और उसका रोल नंबर खत्म करने की प्रक्रिया आरंभ कर देना यह उसकी व्यावसायिक स्वतंत्रता, बार एसोसिएशन की आजादी तथा व्यक्त की गरिमा के विरुद्ध प्रावधान है जो एक संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार नहीं की जा सकती है.
  • अपनी आपत्ति में लिखा है कि अधिवक्ताओं को दोषी मानकर उन्हें दंडित करना यह पूरी तरह उनकी अनुशासनात्मक कमेटी के क्षेत्राधिकार को आतिक्रमण करते हुए अलोकतांत्रिक प्रावधान, बार एसोसिएशन और अन्य हितधारकों से विचार विमर्श का इस रूल्स में कोई जिक्र नहीं है ना तो स्टेट गवर्नमेंट के साथ क्या कंसल्टेशन हुआ इसका जिक्र है.
  • 4. आपत्ती में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के चेंबर आवंटन रूल्स का भी जिक्र किया गया और बताया गया कि जो काम सरकार को करना चाहिए वह Chamber Allotment कमिटी के माध्यम से कराया जा रहा है जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए बहुत ही गंभीर बात है. ऐसे रूल्स की गंभीरता को देखते हुए आपत्ति की प्रतिलिपि कानून मंत्रालय, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, लीडर आफ अपोजिशन राहुल गांधी, रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट, सेक्रेटरी बार काउंसिल उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तथा भारत के 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के अध्यक्ष /महासचिव को भी भेजा गया है.

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