Cockroach Janta Party के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचे भाजपा नेता, कोर्ट ने कहा: यूपी राज्य से संबंधित कुछ नहीं, नहीं कर सकते सुनवाई
संगठन का गठन करने वालों को याचिका में बताया देश विरोधी तत्व, एनआईए से जांच कराने की थी मांग, सक्षम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की छूट

Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) का उत्तर प्रदेश राज्य से कोई संबंध न होना और खुद याचिकाकर्ता का मूलरूप से कर्नाटक प्रांत का निवासी होने के आधार पर याचिका खारिज करने की बात आयी तो याचिकाकर्ता ने सक्षम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की छूट देने की मांग की. कोर्ट ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए याचिका निस्तारित कर दी है.
Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक के खिलाफ यह आपराधिक जनहित याचिका भाजपा नेता और आरएसएस से जुड़े एस विग्नेश शिशिर की तरफ से दाखिल की गयी थी. Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक के खिलाफ इस याचिका पर सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की बेंच ने की.
याचिका में भारत संघ, सचिव, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली समेत कुल 21 को पार्टी बनाया गया था. हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर खुद मौजूद रहे. प्रतिवादियों की तरफ से भी वकीलों की फौज ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा.
यह आपराधिक जनहित याचिका में टारगेट Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को किया गया था जो सोशल मीडिया पर काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक बताये जाते हैं. याचिका में कहा गया कि Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके महाराष्ट्र प्रांत के पुणे के मूल रूप से रहने वाले हैं.
Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) एक गैर-पंजीकृत संगठन
वह वर्तमान समय में संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे हैं. वह Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) नामक एक गैर-पंजीकृत संगठन के संस्थापक हैं. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि श्री दीपके ने Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) की स्थापना तो किया है लेकिन उनके पीछे तमाम दूसरी ताकतें लगी हैं.

याचिका में कहा गया कि Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) एक विदेशी और ‘डीप-स्टेट’ द्वारा वित्तपोषित संगठन है. इसे राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा स्थापित किया गया है. ये तत्व ऐसी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ चला रहे हैं जिनसे भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है. याचिकाकर्ता ने कई अन्य आरोप लगाए और मांग की कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा इस मामले की गहन और व्यापक जाँच करायी जानी चाहिए.
याचिका में कहा गया था कि Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) के नाम से फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ह्वाटसएप, टेलीग्राम, सिग्नल मैसेंजर और ट्विटर के साथ अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर कई एकाउंट संचालित किए जा रहे हैं. इन खातों के माध्यम से युवा पीढ़ी (Gen Z) को उकसाया जा रहा है.
देश के युवा Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) से प्रभावित होकर उसे ज्वाइन कर रहे हैं. इस तरह की गतिविधियां राष्ट्र-विरोधी की श्रेणी में आती हैं. उन्होंने याचिका में यह भी प्रार्थना की है कि भारत सरकार द्वारा ऐसे खातों को तत्काल बंद/ब्लॉक कर दिया जाए. याचिकाकर्ता द्वारा कई अन्य अनुषंगी आरोप और प्रार्थनाएँ भी की गई थी.
रिट याचिका का अवलोकन करने कोर्ट की निगाह में जो बात सबसे पहले खटकी वह थी याचिकाकर्ता बंगलुरु का स्थायी निवासी होना. कॉज टाइटल और एफीडेविट दोनों में ही याचिकाकर्ता ने अपना पता फर्स्ट मेन, फर्स्ट क्रॉस, नेहरू नगर, शेषाद्रिपुरम, बंगलुरु दर्शाना था. बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता जो बेंगलुरु का निवासी है और एक ऐसे मुद्दे को उठा रहा है जो राष्ट्रीय महत्व का है उसे अगर वह चाहता तो सबसे पहले कर्नाटक हाई कोर्ट में जाना चाहिए था.
वर्तमान रिट याचिका में, हमें उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित कुछ भी विशेष नहीं मिलता है और तदनुसार, हमारी राय है कि ‘फोरम नॉन कन्वीनियंस’ के आधार पर यह रिट याचिका इस कोर्ट के समक्ष विचारणीय नहीं है.
बेंच ने की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने लखनऊ के एक पते से कुछ शिकायतें की हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले भी इस कोर्ट के समक्ष पेश हुआ है और स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बंगलुरु का स्थायी निवासी है और उसने इस आधार पर इस कोर्ट से प्राथमिकता और रियायत की मांग भी की है.
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जब कोर्ट की यह राय कि Cockroach Janta Party (काकरोच जनता पार्टी) पर सुनवाई अधिकार क्षेत्र के आधार पर रिट याचिका विचारणीय नहीं है, याचिकाकर्ता को बता दी गई, तो उसने प्रार्थना की कि उसे रिट याचिका वापस लेने की अनुमति दी जाए. साथ ही उसे उस कोर्ट के समक्ष एक नई रिट याचिका दायर करने की स्वतंत्रता भी दी जाए जिसके पास उचित अधिकार क्षेत्र हो.
कोर्ट ने इसी के आलोक में इस रिट याचिका का निपटारा इस स्वतंत्रता के साथ कर दिया कि याचिकाकर्ता उचित अधिकार क्षेत्र वाले किसी कोर्ट के समक्ष एक नई आपराधिक जनहित रिट याचिका दायर कर सकता है.
CRIMINAL WRIT-PUBLIC INTEREST LITIGATION No. – 7 of 2026 S.Vignesh Shishir V/s Union Of India Thru. Secy. Ministry Of Home Affairs New Delhi And 21 Others