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वित्तीय वर्ष के 2 माह बीते, नहीं छपा Advocate Welfare Stamp, अधिकारी लगा रहे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पलीता

वित्तीय वर्ष के 2 माह बीते, नहीं छपा Advocate Welfare Stamp, अधिकारी लगा रहे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पलीता

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की पहल पर राज्य सरकार ने Advocate Welfare Stamp योजना लागू की. फंड के लिए दस रुपए का स्टैंप जारी किया गया. लगभग साढ़े तीन लाख Advocate के लिए कल्याण फंड बना. महाधिवक्ता पदेन अध्यक्ष व प्रमुख सचिव विधि पदेन सचिव बने. बार काउंसिल के नामित सदस्य भी समिति में रखे गए. इसी फंड से वकालत छोड़ने वाले Advocate को भविष्य निधि का भुगतान होता है और 70 साल की आयु तक Advocate की मौत पर उत्तराधिकारी को पांच लाख रुपए की सहायता दी जाती है.

वित्तीय वर्ष की मार्च में समाप्ति से पहले Advocate कल्याण स्टैप राजस्व विभाग छाप देता था. इस वर्ष अधिकारियों की लापरवाही के चलते दो माह बाद भी स्टैंप नहीं छप सका. हाईकोर्ट सहित अदालतों में बिना स्टैंप वकालतनामे दाखिल करने की अनुमति दी गई है. सवाल उठता है कि Advocate कल्याण स्टैप का पैसा फंड में जमा न होने से क्या सरकार अपने बजट से Advocate को सहायता दे सकेगी या लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की जायेगी.

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फिलहाल अदालती कामकाज टिकट मिलने पर जमा करने के आश्वासन पर चल रहा है. किंतु नुकसान तो कल्याण योजना और राज्य सरकार का होने वाला है. जिम्मेदार अधिकारी चुप बैठे हैं और सरकारी योजना को बंद करने पर आमादा है, यह वही जाने. Advocate भविष्य निधि स्थापना का प्रस्ताव उप्र बार काउंसिल सदस्य शंभूनाथ श्रीवास्तव ने वर्ष 2000 मे किया था, इसके बाद वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नियुक्त हुए, इसी दौरान महाधिवक्ता, बार काउंसिल के अध्यक्ष व सदस्यों के प्रयास से भविष्य निधि की स्थापना की गई. ट्रेजरी के जरिए स्टैंप का शुल्क जमा होता है और हर वर्ष सरकार इकट्ठा धन अधिवक्ता निधि में जमा करती है और योजनाओं पर अमल किया जाता है.

Advocate संगठनों की मुख्य न्यायाधीश से मांग जांच कर फर्जी वकीलों को बाहर करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट के विभिन्न Advocate Association संगठनों ने सभी जिला अदालतों में गहन जांच पडताव के बाद एडवोकेट रोल तैयार कर लागू करने की मांग की है. चीफ जस्टिस अरुण भंसाली से हाईकोर्ट की तरह सभी जिलों में एडवोकेट रोल लागू कर कड़ाई से पालन करने का अनुरोध किया है.

यह मांग पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश की Advocate पर टिप्पणी और फिर बार कौंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष सांसद मनन मिश्र के इस बयान पर दिया कि 40 फीसदी अधिवक्ता फर्जी हैं. प्रयागराज अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एन के चटर्जी, आदर्श अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सभाजीत सिंह, महासचिव पीयूष त्रिपाठी, वरिष्ठ उपाध्यक्षा पूजा मिश्रा, अधिवक्ता समन्वय समिति के अध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह ने बार काउंसिल के अध्यक्ष के बयान के आधार पर जांच कराकर काली भेड़ें बाहर करने की मांग की और कहा कि फर्जी वकीलों के कारण नोबल प्रोफेशन की छवि धूमिल हो रही है.

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न्यायपालिका की स्वतंत्रता व निष्पक्षता बनाये रखनेके लिए पंजीकृत वास्तविक अधिवक्ताओं को ही वकालत करने का अधिकार सुरक्षित किया जाना जरूरी है. इसके लिए हाईकोर्ट अपनी निगरानी में निष्पक्ष जांच कराये ताकि न्यायपालिका की गिरती साख बचाई जा सके.

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