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इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: शिक्षकों के Adjustment और आपत्तियों को 2 महीने में निस्तारित करे उत्तर प्रदेश सरकार

जिलावार प्राप्त, निस्तारित और लंबित सभी आपत्तियों पर नया शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश, 16 को होगी सुनवाई

इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: शिक्षकों के Adjustment और आपत्तियों को 2 महीने में निस्तारित करे उत्तर प्रदेश सरकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के Adjustment से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह जिलावार प्राप्त, निस्तारित और निस्तारण के लिए लंबित सभी आपत्तियों की वर्तमान स्थिति का खुलासा करते हुए एक नया शपथ पत्र दाखिल करे. कोर्ट ने अपेक्षा की है कि सरकार अगले दो महीनों के भीतर सभी आपत्तियों का निस्तारण कर देगी. जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की और भविष्य की कार्ययोजना पर मुहर लगाई.

कोर्ट न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिक्षकों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता अभिषेक श्रीवास्तव ने अदालत को अवगत कराया कि उन सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों के संबंध में एक बड़ी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है जिन्होंने प्रस्तावित Adjustment के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी.

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सरकार की तरफ से Adjustment के संबंध में पेश किये गये तथ्य:-

प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 68 जिलों के संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं.

इन शिक्षकों का Adjustment इस कानूनी आवश्यकता के तहत किया जा रहा है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों.

शेष 7 जिलों के संबंध में Adjustment आदेश अगले दस दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे.

इसके अलावा, फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत जिलों से प्राप्त आपत्तियों के संबंध में विशेष जानकारी दी गई. इन जिलों के सभी शिक्षकों की आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया है और आदेश आज ही वेबसाइट पर अपलोड किए जा रहे हैं या किए जा चुके हैं. सरकार ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों के भीतर संस्था में किसी अन्य शिक्षक के जुड़ जाने के कारण कुल 4234 शिक्षकों/आपत्तिकर्ताओं को सरप्लस घोषित किया गया है.

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दो जजों की बेंच ने Adjustment और आपत्तियों के निस्तारण में ट्रांसपेरेंसी के लिए जारी किये निर्देश:

  • शपथ पत्र और समय-सीमा: राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह जिलावार प्राप्त, निस्तारित और निस्तारण के लिए लंबित सभी आपत्तियों की वर्तमान स्थिति का खुलासा करते हुए एक नया शपथ पत्र दाखिल करे. अदालत ने अपेक्षा की है कि सरकार अगले दो महीनों के भीतर सभी आपत्तियों का निस्तारण कर देगी.
  • वेबसाइट पर अपलोड: फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत जिलों के शिक्षकों द्वारा दी गई आपत्तियों पर पारित आदेश अनिवार्य रूप से कल तक वेबसाइट पर अपलोड किए जाने का निर्देश दिया गया है.
  • अपील करने का अधिकार: फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत के जो शिक्षक आपत्तियों के निस्तारण से असंतुष्ट हैं, वे दो सप्ताह के भीतर यानी 27.10.2026 तक इस कार्यवाही में उचित प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकते हैं. इसकी एक अग्रिम प्रति मुख्य स्थायी अधिवक्ता को देनी होगी.
  • जवाब दाखिल करने की समय-सीमा: राज्य सरकार को इसके बाद दो सप्ताह का समय मिलेगा और सभी जवाब 03.11.2026 तक अनिवार्य रूप से दाखिल कर दिए जाएंगे.
  • ब्लॉकवार सुनवाई: प्राप्त सभी आपत्तियों और जवाबों को जिलावार और ब्लॉकवार सारणीबद्ध (tabulate) करके अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि 16.11.2026 से शुरू होने वाली क्रमिक तारीखों पर सुनवाई हो सके.
  • अदालत की चेतावनी: यह स्पष्ट कर दिया गया है कि फिरोजाबाद, कुशीनगर और बागपत के जो सरप्लस शिक्षक निर्धारित समय (27.10.2026) के भीतर राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ आपत्ति दर्ज नहीं करेंगे, उन्हें अगली तारीख पर न्यायालय द्वारा Adjustment किए जाने की अनुमति दी जा सकती है.
  • 4234 शिक्षकों को सुरक्षा: जिन 4234 शिक्षकों को पिछले पांच वर्षों में अन्य शिक्षक के जुड़ने के कारण सरप्लस घोषित किया गया है, उन्हें तब तक परेशान नहीं किया जाएगा जब तक कि सभी आपत्तियों का पहली बार पूरी तरह से निस्तारण नहीं हो जाता.

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न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16.11.2026 की तारीख मुकर्रर की है. साथ ही, पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश को अगली तारीख तक के लिए बढ़ा दिया गया है. इस निर्णय से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया में न्यायसंगत और पारदर्शी रवैया अपनाने पर जोर दिया है.

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