स्थान चिन्हित किए बिना प्रदेश में Liquor shop आवंटित करने को लेकर आबकारी आयुक्त प्रयागराज तलब, हाई कोर्ट ने मांगी नायाब नीति सुनवाई 12अगस्त को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिना स्थान चिन्हित किए Liquor shop का ठेका देने के मामले को गंभीरता से लिया है और आबकारी आयुक्त प्रयागराज को Liquor Policy के साथ 12अगस्त को हाजिर होने का निर्देश दिया है. यह आदेश जस्टिस प्रकाश पाडिया और जस्टिस विनय सरन की खंडपीठ ने विजय कुमार कुलश्रेष्ठ की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता श्रीकृष्ण शुक्ल ने बहस की. खंडपीठ ने Liquor shop के लाइसेंस देने की मौजूदा नीति पर सवाल उठाते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की है.
याचिकाकर्ता विजय कुमार कुलश्रेष्ठ ने कोर्ट में शिकायत की थी कि उनके घर के ठीक सामने एक Liquor shop खोल दी गई है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है. इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने समय-समय पर कई आदेश पारित किए. कोर्ट के 21 मई 2026 के आदेश के अनुपालन में आगरा के जिला आबकारी अधिकारी कृष्ण पाल यादव व्यक्तिगत हलफनामे के साथ कोर्ट में पेश हुए थे. उस दिन अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि याचिकाकर्ता के घर के सामने स्थित Liquor shop को तुरंत बंद कर दिया जाएगा.
Liquor shop के लाइसेंस बिना यह स्पष्ट किए जारी किए जाते रहे हैं कि दुकान किस विशिष्ट स्थान पर स्थापित की जानी है
अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन के अनुरोध पर मामले को 6 जुलाई 2026 के लिए स्थगित कर दिया गया था, इस निर्देश के साथ कि उस दिन भी वही अधिकारी उपस्थित रहे. कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बार-बार Liquor shop के लाइसेंस बिना यह स्पष्ट किए जारी किए जाते रहे हैं कि दुकान किस विशिष्ट स्थान पर स्थापित की जानी है.
इसी को देखते हुए कोर्ट ने प्रयागराज स्थित आबकारी आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई पर राज्य में Liquor shop के लाइसेंस जारी करने से संबंधित नीति (पॉलिसी) के साथ स्वयं कोर्ट में उपस्थित रहे. मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को तय की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीकृष्ण शुक्ला और राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन तथा स्थायी अधिवक्ता राजेश कुमार पाल ने पैरवी की.