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आवंटन सूची की वैधता को लेकर असमंजस, Chamber Allocation राशि पर अधिवक्ताओं में असंतोष, चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मांगों पर विचार करने का अनुरोध

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं को मिलने वाले नए Chamber Allocation के लिए प्रक्रिया और रूल्स तय किया गया. दूसरी तरफ अधिवक्ता मृत्यंजय तिवारी ने मुख्य न्यायाधीश अरूण भंसाली व आवंटन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी को पत्र लिखकर कुछ गंभीर मांगे रखी है. मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में कहा गया है कि नये Chamber भवन का निर्माण राज्य फंड से किया गया है. इसलिए Chamber आवंटन की फीस लेने का औचित्य नहीं है. रखरखाव के लिए लिया फंड की जरूरत है तो कमेटी राज्य सरकार से वार्षिक फंड मांग सकती है.

आवंटन सूची की वैधता को लेकर असमंजस, Chamber Allocation राशि पर अधिवक्ताओं में असंतोष, चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मांगों पर विचार करने का अनुरोध

दूसरी मांग है कि करोड़ों की लागत से बने पुराने Chamber को छोड़कर जो अधिवक्ता नये Chamber में नहीं जाना चाहते उन्हें खाली करने के लिए विवश न किया जाए. तीसरे इससे पहले भी निश्चित राशि जमा कराकर Chamber आवंटित किया गया था. नया Chamber आवंटित करते समय वह राशि 12 फीसदी ब्याज सहित समायोजित की जाय. इन सुझावों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की प्रार्थना की गई है.

देवेंद्र नारायण पाण्डेय व मृत्यंजय तिवारी ने आवंटन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी से मुलाकात भी की. Chamber आवंटन को लेकर बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं का कहना है कि मौजूदा स्थिति में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन सूची में अधिवक्ताओं के नामों को शामिल करने को लेकर सुनने को तैयार नहीं है. दोनों एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं. अधिवक्ताओं को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें? उनके पास अभी कोई विकल्प नहीं नजर आ रहा है.

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन ने Chamber आवंटन के लिए अधिवक्ताओं की जो सूची जारी की है. वह सूची 2025 में हुए बार एसोसिएशन के चुनाव वाली मतदाता सूची ही है. उस समय भी इस सूची को लेकर बवाल खड़ा हुआ था. विवाद की स्थिति को देखते हुए सूची पर आपत्ति मांगी गई. बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने आपत्ति दर्ज कराई लेकिन बहुत से ऐसे अधिवक्ता पात्र होते हुए भी इसमें शामिल नहीं हो सके.

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चुनाव अधिकारी ने मतदान के एक दिन पहले संशोधित सूची जारी की थी. इसमें उन्होंने ऐसे लोगों के नाम शामिल किए जो मतदाता होने के पात्र भी नहीं थे. सुमित कुमार सहित कई अधिवक्ताओं के अनुसार चुनाव कमेटी ने 2023, 2024 और 2025 में सदस्यता लेने वालों को मतदान का अधिकार दे दिया, जो कि गलत था. ऐसे लोग मतदाता सूची में शामिल होने लायक नहीं थे. अधिवक्ताओं ने चुनाव कमेटी पर वोटर लिस्ट तैयार करने में खेले करने का आरोप लगाया था.

अधिवक्ता वीरेंद्र कुमार गौतम और अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह सहित कई अधिवक्ताओं का कहना है कि चुनाव के बाद चुनी गई नई कार्यकारिणी ने वोटर लिस्ट में नाम न शामिल हो पाने वाले अधिवक्ताओं से आपत्ति मांगी थी. अधिवक्ताओं ने आपत्ति भी दी और एक संशोधित वोटर लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

उस संशोधन लिस्ट में बार के पदाधिकारी और हाईकोर्ट प्रशासन से जुड़े अधिवक्ताओं के नाम शामिल कर लिए गए, जो कि लिस्ट में शामिल होने की पात्रता नहीं रखते थे. इस सूची पर भी हंगामा खड़ा हुआ. बार एसोसिएशन ने अपनी नाक बचाने के लिए एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उसकी ओर से कोई वोटर लिस्ट जारी नहीं की गई है.

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उधर, हाईकोर्ट प्रशासन ने जब बार एसोसिएशन से Chamber के लिए पात्र अधिवक्ताओं की सूची मांगी तो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय के अनुसार 2025 के चुनाव में मतदान के लिए जारी वोटर लिस्ट को ही हाईकोर्ट प्रशासन को दे दिया गया है. हाईकोर्ट प्रशासन ने अब उसी को संभावित लिस्ट के रूप में जारी कर दिया है.

इस सूची के जारी होने के बाद जो जिन अधिवक्ताओं के नाम इसमें शामिल नहीं हैं. वे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार और बार एसोसिएशन के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें वहां कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल रहा है. अब जबकि, शुक्रवार यानी 29 मई 2026 को चैंबर आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पोर्टल लांच कर दिया गया है तो पात्र अधिवक्ताओं के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में ‘आईसीएएस प्रणाली लागू, ऑनलाइन होगा अधिवक्ता Chamber Allotment

प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट के नवनिर्मित अधिवक्ता कक्ष एवं मल्टी-लेवल पार्किंग भवन के लिए शुक्रवार को एकीकृत कक्ष आवंटन प्रणाली (आईसीएएस) का शुभारंभ किया गया. सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जस्टिस विक्रम नाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस डिजिटल प्रणाली का उद्घाटन किया. नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब अधिवक्ता Chamber का आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होगा. इससे अधिवक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे घर बैठे आवेदन एवं Chamber आवंटन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर सकेंगे.

प्रोग्राम में बहुस्तरीय पार्किंग एवं अधिवक्ता कक्ष निर्माण समिति के अध्यक्ष जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी ने स्वागत भाषण देते हुए परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की. चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने इसे जस्टिस परिसर में बार और बेंच के बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. इस अवसर पर जस्टिस विक्रम नाथ ने “उच्च न्यायालय अधिवक्ता कक्ष एवं पार्किंग नियम, 2026” का ई-प्रकाशन भी किया. प्रोग्राम में आईसीएएस की कार्यप्रणाली का ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतीकरण किया गया तथा आवंटन प्रक्रिया का वर्चुअल टूर भी कराया गया.

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अपने संबोधन में जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि Chamber आवंटन की प्रक्रिया गर्मी की छुट्टियों में पूरी कर ली जाए ताकि जुलाई में अदालत खुलने तक अधिवक्ता नए आधुनिक एसी Chamber में बैठ सकें. उन्होंने कहा कि नए भवन में बड़ी कैंटीन और बेहतर पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध है. जस्टिस जेजे मुनीर, अजय भनोट और सलिल कुमार राय सहित बार एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे.

हर्षित पांडेय खुर्जा विकास प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता नियुक्त

खुर्जा विकास प्राधिकरण बुलंदशहर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हर्षित पांडेय को अपना पैनल अधिवक्ता नियुक्त किया है. इन्हें प्राधिकरण की ओर से हाईकोर्ट में मुकद्दमों की पैरवी के लिए अधिकृत किया गया है. इस आशय का आदेश प्राधिकरण के सचिव ने जारी किया है.

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