राहुल गांधी को ग्रेट ब्रिटेन का Citizen बताने वाली याचिका खारिज, दस्तावेजी सुबूत पेश नहीं कर पाया याचिकाकर्ता
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने खुद वापस ली गयी मानते हुए याचिका खारिज किया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ग्रेट ब्रिटेन का Citizen बताते हुए उनका रायबरेली संसदीय सीट से निर्वाचन रद करने की मांग में दाखिल की गयी एक और याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया है. जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने सुनवाई के बाद रिकॉर्ड पर रखे गये तथ्यों को परखने के बाद पाया कि याचिका में कोई दम नहीं है. याचिकाकर्ता रिकॉर्ड पर कोई भी ऐसा दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रहे जिससे से यह साबित हो कि राहुल गांधी के पास ग्रेट ब्रिटेन के Citizen है.
इसके बाद याचिकाकर्ता ने मौजूदा रिट याचिका वापस लेने का आग्रह किया. कोर्ट ने इसे खुद वापस ली गयी याचिका मानते हुए खारिज कर दिया. यह रिट सी याचिका रजनीश कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गयी थी. उन्होंने इस केस में खुद अपना पक्ष रखा. इसके अलावा भारत निर्वाचन आयोग, भारत सरकार और राहुल गांधी के वकीलों ने बहस में अपने तर्क रखे.
राहुल गांधी को ग्रेट ब्रिटिश का Citizen बताते हुए उनके रायबरेली सीट से लोक सभा का चुनाव लड़ने और सार्वजनिक पद संभालने के अधिकार को चुनौती दी गयी थी

इस रिट याचिका में लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी को ग्रेट ब्रिटिश Citizen बताते हुए उनके रायबरेली संसदीय सीट से लोक सभा का चुनाव लड़ने और उनके सार्वजनिक पद संभालने के अधिकार को चुनौती दी गयी थी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने माना कि उन्होंने 2015 और 2019 में भी ऐसी ही रिट याचिकाएं दायर की थीं. उन याचिकाओं में राहुल गांधी उर्फ राहुल विंची की Citizenship खत्म होने का मुद्दा उठाया गया था और यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि वे ब्रिटिश Citizen हैं.
यह भी माना कि 2015 की याचिका में इस कोर्ट की एक कोऑर्डिनेट बेंच ने मिसलेनियस मामले में… बेंच नंबर 11064 MB of 2015 (अशोक पांडे बनाम राहुल गांधी @ राउल विंची) में, 01.12.2015 के आदेश के जरिए, इस विषय पर अलग-अलग केस कानूनों पर विचार करते हुए – जिसमें ‘स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश और अन्य बनाम शाह मोहम्मद और अन्य’ (1969) 1 SCC 771 और ‘स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम पीर मोहम्मद’ AIR 1963 SC 645 में सुप्रीम कोर्ट के फसले शामिल हैं – कोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका को खारिज कर दिया.
कोर्ट ने कहा कि Citizenship Act, 1955 की धारा 9(2) के साफ प्रावधानों को देखते हुए, याचिकाकर्ता की ऐसी शिकायतों के समाधान का रास्ता केंद्र सरकार के पास है. 2019 की याचिका में राहुल गांधी @ राउल विंची की Citizenship खत्म होने और संसद से उनकी सदस्यता रद्द होने का वही मुद्दा याचिकाकर्ताओं द्वारा Misc. बेंच नंबर 11251 MB of 2019 (रजनीश कुमार सिंह बनाम राष्ट्रपति के सचिव और अन्य) में उठाया गया था.
इस मामले में इस कोर्ट की एक समान बेंच ने 19/04/2019 के आदेश के जरिए यह नोट किया कि अशोक पांडे (Misc. बेंच नंबर 11064 of 2015 के याचिकाकर्ता) पहले ही 15.12.2015 को एक रिप्रेजेंटेशन (आवेदन) दाखिल कर चुके थे और वह केंद्र सरकार के पास विचाराधीन था. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सामने नया रिप्रेजेंटेशन दाखिल करके अपना पक्ष रखने की छूट देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था.
सोमवार को सुनाये गये फैसले में दो जजों की बेंच ने यह भी कोट कराया कि, ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता नंबर 2 (अशोक पांडे) का रिप्रेजेंटेशन 03.05.2019 को दाखिल किया गया था और केंद्र सरकार ने 29.06.2019 को उन्हें इसकी पावती भी भेजी थी. सरकार के पास उस रिप्रेजेंटेशन के लंबित रहने के दौरान, ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ताओं ने 2024 के आम चुनावों के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर सहित कई अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.

इसी तरह एस. विग्नेश शिशिर ने इस कोर्ट में एक और याचिका (WPIL नंबर 544/2024) दायर की. इसमें भी वही मांग की गई थी कि राहुल गांधी (उर्फ राउल विंची) के खिलाफ ‘को वारंटो’ (अधिकार-पृच्छा) की रिट जारी की जाए. इस याचिका में अशोक पांडे, विग्नेश के वकील थे. जाहिर है, इस WPIL को भी वापस ले लिया गया था, ताकि याचिकाकर्ता प्राइवेट-प्रतिवादी के खिलाफ अपनी शिकायतें रखने के लिए Citizenship Act, 1955 की धारा 9(2) के तहत बताए गए सक्षम अधिकारी के पास जा सके.
इसके बाद एक और WPIL (नंबर 831/2024) दायर की गई. इसमें भी ‘को वारंटो’ की रिट की मांग की गई थी, लेकिन आधार अलग था. इसमें कहा गया कि राहुल गांधी (उर्फ राउल विंची) को गुजरात राज्य में मानहानि के एक मामले में दोषी ठहराया गया था. हालांकि, असल बात यह है कि इस दूसरी WPIL को भी इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगा दी थी.
इन्हीं हालात में, यह रिट याचिका दायर की गई है. इसमें याचिकाकर्ता (जो खुद अपनी पैरवी कर रहे हैं) ने कहा है कि चूंकि सक्षम अधिकारी ने 2015/2019 से उनके द्वारा दायर आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की है, इसलिए यह कोर्ट खुद मामले के गुण-दोष के आधार पर फैसला करे.
हमें इस रिट याचिका पर विचार करने में संदेह था, क्योंकि हमारी राय में, याचिकाकर्ताओं ने ही – भले ही अलग-अलग तरीकों से – कम से कम चार रिट याचिकाओं में एक जैसी मांगें की थीं. साथ ही, यह तथ्य भी है कि प्राइवेट रेस्पॉन्डेंट राहुल गांधी उर्फ राउल विंची की नागरिकता से जुड़ा मुद्दा अभी भी केंद्र सरकार के पास लंबित है. हालाँकि, चूंकि याचिकाकर्ता ने खुद इस कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने का मौका देने पर ज़ोर दिया, इसलिए हमने उनकी बात को बहुत धैर्यपूर्वक सुनकर उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया.
बेंच ने अपने चार पेज के जजमेंट में कोट कराया
याचिकाकर्ता की दलील का मुख्य आधार यह था कि राहुल गांधी उर्फ राउल विंची ने 21 अगस्त 2003 को ब्रिटेन के ‘कंपनीज हाउस’ (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज) में ‘M/s Backops Limited’ नाम की एक UK-स्थित कंपनी रजिस्टर करायी थी. इसमें कथित तौर पर राहुल गांधी उर्फ राउल विंची ने खुद को डायरेक्टर, मुख्य शेयर-होल्डर और ब्रिटिश नागरिक बताया था. याचिकाकर्ता के अनुसार, जब राहुल गांधी उर्फ राउल विंची ब्रिटिश Citizen हैं, तो वे इस देश के Citizen कैसे बने रह सकते हैं और लोकसभा सदस्य बनने के लिए चुनाव कैसे लड़ सकते हैं?
बेंच ने कहा कि पहली नजर में याचिकाकर्ता की दलीलें बहुत आकर्षक और दूरगामी परिणामों वाली लगीं, लेकिन जब उनसे उनकी दलील का आधार पूछा गया, तो वे कंपनी बनाने से संबंधित या ब्रिटेन के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रिकॉर्ड या इस बात का कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सके कि राहुल गांधी उर्फ राउल विंची ने खुद को ब्रिटिश Citizen बताया है.
याचिकाकर्ता ने केवल कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा जारी एक कथित कन्फर्मेशन लेटर (पुष्टि पत्र) का सहारा लिया, जिसमें ‘राउल विंची’ की पढ़ाई की पुष्टि की गई थी. कोर्ट ने कहा कि यह दस्तावेज किसी भी तरह से मौजूदा याचिका में लगाए गए आरोपों को साबित नहीं करता है.
WRIT – C No. – 5447 of 2026; Ashok Pandey And Another V/s Sri Rahul Gandhi @ Raul Vinci New Delhi And 2 Others