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45 साल पुराने Murder मामले में दो दोषियों को हाई कोर्ट ने माना किशोर, सजा रद्द कर मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया

45 साल पुराने Murder मामले में दो दोषियों को हाई कोर्ट ने माना किशोर, सजा रद्द कर मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेजा गया

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 28 सितंबर 1980 को सुल्तानपुर जिले में हुई बहुचर्चित चार Murder और कातिलाना हमले से जुड़े 45 साल पुराने आपराधिक मामले में दो जीवित बचे दोषियों सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद को किशोर मान लिया और उन्हें सुनायी गयी सजा को रद कर दिया है. जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने अपील संख्या 921/1981 पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया और मामले को किशोर न्याय बोर्ड के पास सुनवाई के लिए भेज दिया.

यह मामला 28 सितंबर 1980 का है, जब सुल्तानपुर जिले के थाना अचलगंज (वर्तमान थाना कुरवार क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पिपरी) में पुरानी रंजिश के चलते एक खूनी संघर्ष हुआ था. इस सनसनीखेज घटना में शमशद, अब्दुल रफीक, हामिद उल्लाह और दिलशेर की हत्या (Murder) कर दी गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

सत्र न्यायालय ने 14 दिसंबर 1981 को इस Murder मामले में फैसला सुनाते हुए कई आरोपियों को दोषी करार दिया

सुल्तानपुर के सत्र न्यायालय ने 14 दिसंबर 1981 को इस Murder मामले में फैसला सुनाते हुए कई आरोपियों को दोषी करार दिया था और आजीवन कारावास समेत विभिन्न सजाएं सुनाई थीं. Murder मामले में इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी, जो लंबी कानूनी प्रक्रिया के तहत पिछले 45 वर्षों से लंबित थी. इस दौरान कई अपीलकर्ता-दोषी इस दुनिया में नहीं रहे और उनके मामले में अपील का शमन हो चुका था.

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सुनवाई के दौरान दोषियों सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद की ओर से किशोर न्याय अधिनियम के तहत उनके नाबालिग होने का दावा पेश किया गया था. अदालत के निर्देश पर किशोर न्याय बोर्ड ने दोनों की शैक्षणिक और अन्य साक्ष्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी थी. बोर्ड की रिपोर्ट और रिकॉर्ड्स की जांच के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि घटना की तिथि (28 सितंबर 1980) को Murder के आरोपी सिराज अहमद की उम्र 17 वर्ष 10 महीने और अब्दुल वाहिद की उम्र 17 वर्ष 11 महीने थी. इस प्रकार दोनों कानून की नजर में किशोर थे.

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि निचली अदालत द्वारा Murder मामले में तय किए गए दोषसिद्धि (Conviction) के फैसले में कोई अवैधता या त्रुटि नहीं है, इसलिए दोषियों का अपराध साबित रहता है. हालांकि, घटना के समय वे किशोर होने के कारण सामान्य वयस्क जेल की सजा के पात्र नहीं हैं. इसलिए, अदालत ने उनकी पूर्व में सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया है.

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Murder मामले को संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के पास वापस भेज दिया गया है, जो कानून के प्रावधानों के तहत उचित जुर्माना या दंड तय करेगा.हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों—सिराज अहमद और अब्दुल वाहिद को निर्देश दिया है कि वे इस फैसले की प्रमाणित प्रति के साथ 28 अक्टूबर 2026 को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश हों. बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि वह आदेश की प्रति मिलने के छह हफ्ते के भीतर इस पर उचित आदेश पारित करे.

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