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Marriage के Promise पर बने हर संबंध को दुष्कर्म नहीं, इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि वादा शुरू से ही झूठा था

आपसी सहमति से बने संबंध में रेप का केस चलाना अनुचित, हाई कोर्ट ने पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का केस रद्द किया

Marriage के Promise पर बने हर संबंध को दुष्कर्म नहीं, इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि वादा शुरू से ही झूठा था
Madan Pal Singh J.

Marriage के Promise पर बने हर संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता. इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि Marriage का Promise शुरू से ही झूठा था और महिला की सहमति केवल उसी Promise के आधार पर ली गई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आपसी सहमति से दो बालिग लोगों के बीच फिजिकल रिलेशन स्थापित होता है और यह संबंध लम्बे समय तक चलता रहता है तो उसे शादी के Promise पर दुष्कर्म करने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है.

इस कमेंट के साथ जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने शादी के Promises पर दुष्कर्म के आरोपों में घिरे उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर अमित कुमार के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है. मथुरा के कोसी कलां की रहने वाली एक युवती ने 8 जनवरी 2020 को वाराणसी के महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था.

उसका आरोप था कि 2013 में कोसी कलां में तैनात रहे इंस्पेक्टर अमित कुमार ने शादी का Promise किया और अपनी पहली शादी छिपाई. युवती के मुताबिक सितंबर 2019 में उसे वाराणसी के एक होटल में बुलाकर मिल्क शेक में नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया गया.

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आरोप लगाया कि इसी दौरान उनकी कुछ न्यूड क्लिप बना ली गयी. इन्हीं अश्लील फोटो-वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर वह ब्लैकमेल करके फिजिकल रिलेशन बनाता रहा. इस चक्कर में युवती गर्भवती हो गयी. इसका पता चलने पर आरोपी उपनिरीक्षक ने उसका गर्भपात करा दिया और युवती को धमकी दी कि इसका जिक्र करने पर उसे कड़ा सबक सिखायेगा.

विवेचना अधिकारी ने शादी का Promise करके रिलेशन बनाना प्रमाणित मानते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रकरण की जांच की और साक्ष्य जुटाये. इसके बाद विवेचना अधिकारी ने शादी का Promise करके रिलेशन बनाना प्रमाणित मानते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया. आरोप पत्र को कोर्ट ने नोटिस लिया और समन जारी किया. वाराणसी की कोर्ट के इसी आदेश के साथ चार्जशीट और पेंडिंग केस रद करने की मांग में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी थी. इस पर ​जस्टिस मदन पाल की बेंच सुनवाई कर रही थी.

सुनवाई के दौरान तथ्यों को परखने के बाद कोर्ट ने कहा कि शादी के Promise पर बने हर संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता. इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि Promise शुरू से ही झूठा था और महिला की सहमति केवल उसी Promise के आधार पर ली गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि युवती 27 वर्ष की शिक्षित वयस्क है और 2013 से आरोपी को जानती थी. वह बिना किसी को बताए अकेले विमान से वाराणसी गई और होटल के कमरे में रुकी.

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इसके बाद भी उसने कोई शिकायत नहीं की और आरोपी के संपर्क में रही. वह आरोपी के मेरठ स्थित पैतृक घर भी गई, वहां भी कोई शिकायत नहीं की. व्हाट्सएप चैट में युवती ने खुद लिखा कि वह आरोपी के तलाक तक इंतजार करेगी. इससे कोर्ट ने माना कि उसे आरोपी की पहली शादी की जानकारी थी.

कोर्ट में पेश किये गये फोटोग्राफ में युवती आरोपी के साथ खुश दिख रही है. जांच में ब्लैकमेलिंग के आरोप वाले कथित अश्लील फोटो-वीडियो न तो पेश किए गए और न ही जांच अधिकारी बरामद कर पाए. आरोपी ने शादी से कभी इनकार नहीं किया. उसका पहली पत्नी से तलाक 14 दिसंबर 2023 को मेरठ की पारिवारिक अदालत से मंजूर हुआ.

कोर्ट ने आरोपी के इस पक्ष को भी दर्ज किया कि मुकदमा उसकी पहली पत्नी के उकसावे पर दर्ज कराया गया. साथ ही यह तथ्य भी रेखांकित किया कि आरोपी के पूरक हलफनामे के अनुसार युवती की बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी हो चुकी है, जिसकी जानकारी सुनवाई के दौरान अदालत को नहीं दी गई थी.

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राज्य सरकार और शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि पीड़िता का बयान स्पष्ट और एकरूप है और आरोपी ने शादी का Promise करके संबंध बनाए. शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोपी को 24 से अधिक आपराधिक मामलों वाला बताया और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए. आरोपी के वकील ने जवाब में कहा कि ये दलीलें केवल चरित्र पर केंद्रित हैं, मामले के गुण-दोष पर नहीं.

हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता. अदालत ने कहा कि ऐसे मामले में, जहां कोई आपराधिक दायित्व तय नहीं होता, कार्यवाही जारी रखना कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. इसके साथ ही आरोपपत्र और पूरी कार्यवाही रद्द कर दी गई और अर्जी मंजूर हो गई.

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