Sub-Inspector भर्ती 2025: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नियुक्ति पत्र वितरण पर लगाई रोक, 5 अक्टूबर को आएगा फाइनल फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में चल रही Sub-Inspector भर्ती 2025 के चयनितों को नियुक्ति पत्र वितरित करने पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने Sub-Inspector भर्ती को लेकर दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान रोक लगायी है. बुधवार 30 सितंबर को यह केस फाइनल हियरिंग के लिए लगाया गया था लेकिन स्टेट की ओर से डेट आगे बढ़ाने की गुजारिश कर दी गयी. इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया और Sub-Inspector भर्ती का नियुक्ति पत्र वितरित करने पर रोक लगा दी. कोर्ट ने इस मामले में फाइनल हियरिंग का समय 5 अक्टूबर को दिन में दो बजे तय किया है.
बता दें कि पिछले साल Sub-Inspector भर्ती के लिए यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था. उत्तर प्रदेश उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती 2025 का विज्ञापन 12 अगस्त 2025 को जारी किया गया था. इसके लिए 15 लाख 75 हजार 7 सौ 6 आवेदन प्राप्त हुए थे. लिखित परीक्षा गत 14 व 15 मार्च को दो-दो पालियों में हुई थी, जिसमें 10 लाख 77 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे. भर्ती बोर्ड ने अनंतिम आंसर की जारी की. इस पर प्रतियोगी छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया था. तमाम छात्रों ने इस पर आपत्ति दर्ज करायी थी.
भर्ती बोर्ड द्वारा Sub-Inspector भर्ती की प्रोविजनल उत्तर कुंजी 23 मार्च को जारी की गई थी. फाइनल उत्तर कुंजी लिखित परीक्षा परिणाम के दिन यानी 7 मई को जारी हुई तो कई प्रश्नों के उत्तर में बदलाव कर दिया गया. इस पर छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने का कोई मौका नहीं था. लिखित परीक्षा कई पालियों में होने की वजह से नार्मलाइजेशन की फॉर्मूला भी लागू किया गया था. इसका असर यह हुआ कि कई प्रतियोगी छात्र .20 अंकों से सेलेक्ट होने से वंचित हो गये. अंतिम परिणाम 14 जुलाई को जारी किया गया.
Sub-Inspector भर्ती के ऐसे तमाम छात्रों की तरफ से इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट याचिकाएं दाखिल की गयीं. उन्होंने कई सवालों के जवाब पर आपत्ति दर्ज करायी और कहा कि इन सवालों के सही जवाब जो प्रदेश सरकार की ही दूसरी भर्ती परीक्षाओं में सही माने जा चुके हैं, उन्हें ही सही घोषित कर दिया जाय तो वे लिखित परीक्षा में पास हो जाएंगा.
इसे लेकर हाई कोर्ट में कई दर्जन याचिकाएं दाखिल हो गयीं तो एक जैसा नेचर होने के चलते कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ कनेक्ट कर दिया और सुनवाई करने लगी. पहले इन केसेज को जस्टिस मनीष कुमार निगम की बेंच सुन रही थी. बाद में इन सभी याचिकाओं को एक साथ जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की बेंच के सामने शिफ्ट कर दिया गया.

पिछली सुनवाई पर स्टेट की तरफ से सुनवाई की तिथि आगे बढ़ाने की गुजारिश की गयी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया था. एक बार फिर से सुनवाई की डेट आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया तो याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि चूंकि Sub-Inspector भर्ती फाइनल हो चुकी है. सरकार चयनितों को नियुक्ति पत्र वितरित करने की तैयारी कर रही है. नियुक्ति पत्र वितरित हो जाने के बाद यदि कोर्ट का फैसला इन अभ्यर्थियों के पक्ष में आता है तो तमाम जटिलताएं खड़ी हो जाएंगी.
कोर्ट ने इसे सीरियसली लिया और ओपन कोर्ट में कहा कि जब तक इन रिट याचिकाओं पर फाइनल डिसीजन नहीं आ जाता है Sub-Inspector भर्ती के अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र का वितरण नहीं किया जायेगा. प्रश्नों को लेकर आपत्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी है कि एक प्रश्न के लिए 2.5 अंक मिलने हैं जबकि सैकड़ों अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनका सेलेक्शन .12 या .29 अंकों से रह गया है.
कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिनका चयन अगली प्रक्रिया में तो हुआ लेकिन 14 जुलाई को जब अंतिम परिणाम जारी किया गया तो कई अभ्यर्थी कुछ एक नंबर या दो नंबर से असफल हो गए. अभ्यर्थियों ने बदलाव किए गए प्रश्नों को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई थी लेकिन भर्ती बोर्ड ने कंसीडर नहीं किया. इस पर अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दाखिल की.
Sub-Inspector के हाइट चेस्ट मेजरमेंट के खिलाफ दाखिल याचिका पर फाइनल हियरिंग 6 को
Sub-Inspector सिर्फ प्रश्नों के गलत उत्तर को लेकर ही विवादित नहीं है बल्कि शारीरिक दक्षता परीक्षा और डाक्यूमेंट वेरीफिकेशन के दौरान हाइट और चेस्ट नापने पर भी तमाम आपत्तियां हाई कोर्ट में दाखिल की जा चुकी हैं. करीब दो सौ से अधिक याचिकाओं के बेंच पर जस्टिस मनीष कुमार निगम की बेंच सुनवाई कर रही है. जस्टिस निगम ने इस पर भी फाइनल हियरिंग की डेट 6 अक्टूबर को दोपहर दो बजे तय किया है. इन याचिकाओं में हाइट नापने को लेकर तमाम सवाल खड़े किये गये हैं.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि तमाम याचिकाकर्ता ऐसे हैं जो पहले से ही पुलिस विभाग में काम कर रहे हैं. Constable और Sub-Inspector भर्ती के लिए उंचाई बराबर है. वह सिपाही पद पर नौकरी कर रहे हैं और Sub-Inspector भर्ती में उनकी उंचाई कम बताकर उन्हें छांट दिया गया है. ऐसा सेना से रिटायर हुए लोगों के साथ भी किया गया है.
इन याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि उंचाई मापने और सीना फुलाने के पहले चरण में फेल होने पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज करायी गयी तो दोबारा जांच की गयी. खास बात यह है कि दोनों बार परिणाम अलग अलग आए. इस पर कोर्ट ने कहा कि यह तो तय है कि एक बार गलती की गयी है. इसमें तमाम होमगार्ड भी याचिकाकर्ता हैं जो होमगार्ड नियुक्ति के समय की गयी माप में सफल थे और सेम क्राइटेरियर होने के बाद भी Sub-Inspector पद पर उन्हें असफल घोषित कर दिया गया है. कोर्ट ने इन सभी मुद्दों को विचारणीय माना है.
एपीओ 2025 मेंस और पीसीएस 2025 के फाइनल रिजल्ट पर भी रोक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं एपीओ भर्ती 2025 की मेंस परीक्षा और यूपी पीसीएस 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगा दी है. इन दोनों परीक्षाओं को लेकर दाखिल याचिकाओं में आरक्षण नियमों और मेधावी आरक्षित वर्ग के अनारक्षित वर्ग में समायोजन को लेकर कानूनी सवाल उठाये गये हैं.
इस केस की सुनवाई जस्टिस मनीष कुमार निगम की बेंच कर रही है. कोर्ट ने सभी पक्षकारों को एक सप्ताह के भीतर लिखित बहस दाखिल करने का आदेश दिया है. बता दें कि वर्तमान समय में पीसीएस 2025 का इंटरव्यू चल रहा है. इसका फाइनल रिजल्ट अक्टूबर महीने में घोषित किये जाने की संभावना है.