Church of North India विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज की पक्षकारों की सहमति, 3 माह में दूसरी अपील निस्तारित करने का निर्देश

यह प्रकरण इलाहाबाद हाई कोर्ट को पेंडिंग है. बेंच ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया. मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक सितंबर 2026 के आदेश के विरुद्ध दायर विशेष अनुमति याचिका से संबंधित था. सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका एसएलपी (सिविल) संख्या 32280/2026 के रूप में दर्ज थी.
Church of North India और अन्य बनाम राइट रेव. डॉ. पीटर बलदेव मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दूसरी अपील लंबित
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट में दूसरी अपील संख्या 652/2026 लंबित है. इसके साथ निचली अपीलीय अदालत के निर्णय और डिक्री पर रोक लगाने के लिए आवेदन भी विचाराधीन है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि वह दूसरी अपील के साथ स्थगन आवेदन, स्थगन आदेश को समाप्त करने के लिए दायर होने वाले किसी आवेदन तथा उस पर दाखिल आपत्तियों का भी शीघ्र निस्तारण करे.
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कहा गया कि यदि दूसरी अपील और स्थगन आवेदन का समयबद्ध तरीके से गुण-दोष के आधार पर निस्तारण कर दिया जाता है, तो वे संतुष्ट होंगे. पक्षकारों ने यह भी कहा कि तब तक वादी प्रयागराज के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में लंबित मूल वाद संख्या 247/2023 की कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाएगा और न ही उसका संचालन करेगा. यह सहमति सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज कर ली गई है.
पक्षकारों की सहमति और हाई कोर्ट से शीघ्र सुनवाई के अनुरोध को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका का निस्तारण कर दिया. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि लंबित आवेदन, यदि कोई हों, तो वे भी निस्तारित माने जाएंगे. पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणुगोपाल ने पैरवी की.
कानपुर गौशाला सोसाइटी के खिलाफ अपीलीय आदेश रद्द, हाई कोर्ट ने फिर से फैसले के लिए वापस भेजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर गौशाला सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय प्राधिकारी के 12 अगस्त 2026 के आदेश को गलत मानते हुए रद्द कर दिया है और मामले को दोबारा सुनवाई कर निर्णय के लिए वापस भेज दिया है. जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह आदेश पारित किया.
कोर्ट ने पाया कि अपीलीय प्राधिकारी ने जल्दबाजी में कार्यवाही करते हुए 16 मार्च 2023, 8 मार्च 2025 और 25 जुलाई 2026 की रिपोर्टों के आधार पर आदेश पारित कर दिया, जबकि ये सभी रिपोर्टें एकपक्षीय थीं और याचिकाकर्ता को इन पर आपत्ति दर्ज कराने का कोई अवसर नहीं दिया गया. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि पंजीकृत सोसाइटी होने के बावजूद निरीक्षण याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में किया गया. साथ ही, यह मुद्दा भी तय किया गया था कि गौशाला सोसाइटी धर्मार्थ संस्था है या नहीं, लेकिन विवादित आदेश में इस पर कोई निर्णय नहीं दिया गया.
कोर्ट ने कहा कि विवादित आदेश केवल अनियमित नहीं बल्कि अवैध है, क्योंकि तय किए गए मुद्दों पर निर्णय नहीं लिया गया और एकपक्षीय रिपोर्टों के आधार पर आदेश पारित कर दिया गया, बिना याचिकाकर्ता को उनका जवाब देने का मौका दिए. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपील ज्ञापन में संशोधित करने की छूट दी है और नए फैसले तक भूमि की प्रकृति के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश.याचिका का निस्तारण कर दिया गया.