Arms License की मूल पत्रावली गायब कराने के मामले में अफजाल अंसारी को राहत, हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक
गाजीपुर के थाना कोतवाली में 22 जुलाई 2026 को अफजाल अंसारी के खिलाफ Arms License की मूल पत्रावली गायब कराने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी. आरोप है कि उन्होंने संबंधित Arms लिपिक के साथ मिलीभगत कर Arms License की मूल पत्रावली गायब कराई. इसी एफआईआर को रद्द कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर अफजाल अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
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Arms License की मूल पत्रावली गायब कराई
याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत से Arms License की मूल पत्रावली होने के संबंध में निर्देश प्राप्त करने और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया. इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई तक अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी. इस मामले में तत्कालीन Arms लिपिक गौरीशंकर लाल और Arms लिपिक द्वितीय सुग्रीव तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है. तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 409, 120-बी, 419 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 21, 25 और 30 के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
राशन कार्ड निरस्त करने का रिकॉर्ड नहीं, बिना नोटिस कार्रवाई अवैध, राशन कार्ड बहाल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली निवासी कलाम सिंह का पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बहाल करने का आदेश देते हुए कहा कि बिना नोटिस दिए और रिकॉर्ड के अभाव में राशन कार्ड निरस्त करने की कार्रवाई कानून के खिलाफ है. जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 21 मई 2018 के निरस्तीकरण आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को तत्काल राशन कार्ड पुनः जारी करने तथा पात्र पाए जाने पर अंत्योदय राशन कार्ड देने पर भी विचार करने का निर्देश दिया.
याची की ओर से अधिवक्ता आनंद शंकर मिश्र ने दलील दी कि याची अत्यंत गरीब परिवार से है और पिछले 28 वर्षों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत नियमित राशन प्राप्त कर रहा था. उसका पात्र गृहस्थी राशन कार्ड बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए केवल “डिस्प्लेसमेंट” का आधार बताकर निरस्त कर दिया गया, जबकि वह आज भी उसी गांव में निवास करता है.
उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान के प्रमाणपत्र से भी यह सिद्ध होता है कि याची ने गांव नहीं छोड़ा है. याची ने कई बार अंत्योदय राशन कार्ड जारी करने के लिए आवेदन और प्रतिनिधित्व भी दिया लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. इस प्रकार राशन कार्ड निरस्तीकरण प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और याची राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन पाने का अधिकार रखता है.
सुनवाई के दौरान जिला पूर्ति अधिकारी, शामली ने अदालत को बताया कि याची का राशन कार्ड डिस्प्लेसमेंट के आधार पर निरस्त किया गया था, लेकिन निरस्तीकरण से संबंधित मूल रिकॉर्ड और फाइल उपलब्ध नहीं है इसलिए यह सत्यापित नहीं किया जा सकता कि कार्ड किस प्रक्रिया से निरस्त किया गया था अथवा याची को कोई अवसर दिया गया था या नहीं.
खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट है कि याची के गांव छोड़ने का कोई आधार नहीं है और रिकॉर्ड के अभाव में प्रशासन की कार्रवाई टिकाऊ नहीं मानी जा सकती. अदालत ने 21 मई 2018 का निरस्तीकरण आदेश रद्द करते हुए पात्र गृहस्थी राशन कार्ड तत्काल बहाल करने तथा नवीनीकृत कार्ड जारी करने का निर्देश दिया. साथ ही अंत्योदय राशन कार्ड के दावे पर शीघ्र निर्णय लेने का आदेश भी दिया.