महामाया ट्रस्ट Managing Committee विवाद में 26 मई 2026 को पारित एकलपीठ का आदेश रद्द, याचिका मूल नंबर पर फिर से बहाल

यह विवाद वाराणसी के सहायक निबंधक, फर्म्स, सोसाइटीज एंड चिट्स द्वारा 2 मई 2026 को पारित उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें प्रतिवादी संख्या 3 को सहायक सचिव पद से हटाए जाने के फैसले को रद्द कर दिया गया था. Managing Committee से जुड़े इसी आदेश को चुनौती देते हुए प्रबंध समिति ने रिट याचिका दाखिल की थी.
एकलपीठ ने यह कहते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया था कि Managing Committee का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है और नए चुनाव संबंधी कार्यवाही सहायक निबंधक के पास भेजी जा चुकी है, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. अपीलकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राधा कांत ओझा ने तर्क दिया कि एकलपीठ का आदेश दो आधारों पर गलत था.
Managing Committee का कार्यकाल ही समाप्त हो चुका था
पहला, सहायक निबंधक का आदेश बाय-लॉज के प्रावधानों के विपरीत था; दूसरा, जब Managing Committee का कार्यकाल ही समाप्त हो चुका था, तो सहायक निबंधक के पास अपील स्वीकार कर प्रतिवादी संख्या 3 को बहाल करने का कोई औचित्य नहीं था. राज्य की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह ने चुनाव कराए जाने की बात पर आपत्ति जताई, हालांकि यह स्वीकार किया गया कि Managing Committee का कार्यकाल समाप्त हो चुका है.
खंडपीठ ने पाया कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सहायक निबंधक के आदेश की वैधता और कार्यकाल समाप्ति के बाद उस आदेश का औचित्य एकलपीठ द्वारा तय किया जाना आवश्यक था. नए चुनावों के दावे, जिसे प्रतिवादी विवादित बता रहे हैं, के आधार पर याचिका का निस्तारण उचित नहीं था.
इसके परिणामस्वरूप कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए एकलपीठ के आदेश को रद्द कर दिया और याचिका को उसके मूल क्रमांक पर पुनः बहाल कर दिया. प्रतिवादियों को प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है और मामले को 3 अगस्त 2026 को एकलपीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है.