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याचिकाकर्ता की 2007 में मृत्यु के बाद Heirs को को पक्षकार बनाने की अर्जी स्वीकार, विलंब क्षमा अर्जी भी हाई कोर्ट ने की मंजूर

याचिकाकर्ता की 2007 में मृत्यु के बाद Heirs को को पक्षकार बनाने की अर्जी स्वीकार, विलंब क्षमा अर्जी भी हाई कोर्ट ने की मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अनीस कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने याची कांस्टेबल भुवन चंद्र पांडेय के Heirs को पक्षकार बनाने की अर्जी स्वीकार कर ली है. यह याचिका मूल रूप से कांस्टेबल भुवन चंद्र पांडेय ने वर्ष 2007 में दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की मृत्यु 18 मार्च 2014 को हो चुकी है. याचिकाकर्ता के विधिक Heirs की ओर से प्रतिस्थापन अर्जी और विलंब क्षमा अर्जी दाखिल की गई. कोर्ट ने विलंब के लिए दिए गए कारणों को पर्याप्त मानते हुए विलंब क्षमा अर्जी स्वीकार कर ली.

केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई, जिसके बाद कोर्ट ने प्रतिस्थापन अर्जी को भी मंजूरी दे दी. अब मृतक याचिकाकर्ता के वैधानिक Heirs मामले में पक्षकार के रूप में शामिल किए जाएंगे. रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि वह Heirs को पक्षकारों की सूची में शामिल करे.

भारत सरकार की ओर से याचिकाकर्ता की मृत्यु के आधार पर मामले को उपशमित करने की अर्जी भी दाखिल की गई थी, लेकिन चूंकि प्रतिस्थापन अर्जी बिना किसी आपत्ति के पहले ही मंजूर हो चुकी थी, इसलिए कोर्ट ने उपशमन अर्जी को खारिज कर दिया. कोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई 2026 की तारीख नियत की है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विश्व प्रताप सिंह और भारत सरकार की ओर से अरविंद कुमार गोस्वामी ने पक्ष रखा.

अवमानना मामले में गाजीपुर के डीएम को 24 जुलाई को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के जिलाधिकारी के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका में सुनवाई करते हुए उन्हें अदालत के आदेश का पालन करने के लिए 10 दिन का अतिरिक्त समय दिया है. जस्टिस विकास बुधवार की अदालत में यह आदेश पारित किया गया. यह याचिका मंसूर अंसारी की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 12 मार्च 2026 को क्रिमिनल अपील में पारित आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया गया.

उक्त आदेश में गाजीपुर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-1)/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट की अदालत द्वारा 2 सितंबर 2025 को पारित आदेश रद्द कर दिया गया था, याचिकाकर्ता की अर्जी मंजूर की गई थी और जिलाधिकारी द्वारा संपत्ति की कुर्की के आदेश को निरस्त कर संपत्ति तत्काल मुक्त करने का निर्देश दिया गया था.

कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता प्रभुति कांत त्रिपाठी को अवमानना याचिका की प्रति तामील करने और एक माह में निर्देश प्राप्त करने का आदेश दिया था. इसके बाद 22 मई 2026 को कोर्ट ने गाजीपुर के नए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को पक्षकार बनाने की अर्जी स्वीकार करते हुए उन्हें विपक्षी पक्ष संख्या 2 के रूप में शामिल किया और उन्हें अनुपालन न करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

मंगलवार को हुई सुनवाई में अतिरिक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने आदेश के पालन हेतु 10 दिन का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई 2026 को सूची के शीर्ष पर रखने का निर्देश दिया है, ताकि विपक्षी पक्ष अनुपालन शपथपत्र दाखिल कर सके. कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तिथि तक अनुपालन शपथपत्र दाखिल नहीं किया गया तो अदालत संबंधित अधिकारियों को तलब करने के लिए बाध्य होगी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय पैरवी कर रहे हैं.

अबुजेर उर्फ शब्बू की अग्रिम जमानत अर्जी वापस, ट्रायल कोर्ट में चार सप्ताह में हाजिर होकर  दाखिल जमानत अर्जी पर आदेश तक जारी वारंट आदेश पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट में अबुजेर उर्फ शब्बू की अग्रिम जमानत अर्जी की न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने सुनवाई की. कुछ बहस के बाद आवेदक के अधिवक्ता ने अर्जी  वापस लेने की अनुमति मांगी, साथ ही नियमित जमानत के लिए संबंधित कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता की मांग की. चूंकि आवेदक के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं, इसलिए अंतरिम सुरक्षा की भी प्रार्थना की गई.राज्य की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता ने इस प्रार्थना पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

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कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आवेदक आज से चार सप्ताह के भीतर संबंधित कोर्ट में पेश होकर जमानत के लिए आवेदन करता है तो‌ थाना मुबारकपुर, जनपद आजमगढ़ से संबंधित मामले में  उसकी जमानत अर्जी  शीघ्रता से विचार कर निस्तारण किया जाएगा. इस अवधि के दौरान, यानी चार सप्ताह के लिए, आवेदक के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक रहेगी. आवेदक की ओर से अधिवक्ता निर्विकल्प पांडेय और प्रारब्ध पांडेय ने पैरवी की.

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