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Police Charge Sheet दाखिल होने पर सीओ या तो पुनर्विवेचना आदेश दे या कोर्ट में करें पेश, हाईकोर्ट का निर्देश DGP 4 सप्ताह में जारी करें सर्कुलर

Police Charge Sheet दाखिल होने पर सीओ या तो पुनर्विवेचना आदेश दे या कोर्ट में करें पेश, हाईकोर्ट का निर्देश DGP 4 सप्ताह में जारी करें सर्कुलर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि जब तक पुलिस द्वारा तैयार की गई Charge Sheet संबंधित न्यायालय में दाखिल नहीं हो जाती, तब तक आरोपियों को दी गई अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी. इस मामले में पुलिस Charge Sheet सीओ को दी गई पोर्टल पर दाखिल दिख रही है किंतु उसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया. न ही सर्किल आफिसर ने पुनर्विवेचना का आदेश दिया. इसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और प्रदेश के डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस को सर्कुलर जारी कर निर्देश देने को कहा है कि पुनर्विवेचना का आदेश नहीं है तो पुलिस Charge Sheet कोर्ट में पेश की जाय.

जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने गुलाब चंद सैनी केस की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है. बता दें कि कोर्ट के आदेश पर याचिका दाखिल दफ्तर कर दी गई थी. याची की ओर से अर्जी दाखिल कर इस आदेश को वापसी लेने की मांग की गयी थी. पुलिस के विधि प्रकोष्ठ ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट दी थी कि केस क्राइम संख्या 0390/2022 (धारा 420, 467, 468, 471, 406 व 506  भारतीय दंड संहिता में Charge Sheet दाखिल हो चुकी है. इस रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने 3 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज कर दी थी.

सर्किल आफिसर की तरफ से Charge Sheet कोर्ट में जमा करने का सिग्नल नहीं दिया गया

जांच में सामने आया कि विवेचक ने Charge Sheet तैयार कर सर्किल ऑफिसर के कार्यालय में जमा कर दी थी. सर्किल आफिसर की तरफ से Charge Sheet कोर्ट में जमा करने का सिग्नल नहीं दिया गया इसके चलते Charge Sheet फाइल उन्हीं के टेबल पर पड़ी रही जबकि विवेचना पूर्ण दिखायी जा रही थी. विभागीय पोर्टल पर गलत तरीके से इसे “दाखिल” दिखाया गया था, जबकि किसी भी न्यायालय में वास्तव में Charge Sheet पेश नहीं हुई थी.

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कोर्ट ने इस गंभीर प्रशासनिक चूक पर संज्ञान लेते हुए कहा कि जब तक Charge Sheet सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं होती आरोपियों की अंतरिम सुरक्षा बनी रहेगी. नियमानुसार पुलिस Charge Sheet दाखिल होने पर याचिका अर्थहीन हो जाती है. विवेचना के दौरान ही आपराधिक याचिका पोषणीय रहती है.

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इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक  को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर सभी सर्किल ऑफिसरों और संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सर्कुलर जारी करें जिसमें स्पष्ट किया जाए कि विवेचक द्वारा सौंपी गई Charge Sheet पर तत्काल कार्रवाई की जाए या तो पुनः जांच के लिए वापस भेजी जाए या फिर सक्षम न्यायालय में तुरंत प्रस्तुत की जाए. कोर्ट ने याचिका पर पारित आदेश वापस ले लिया और अंतरिम संरक्षण जारी रखने का आदेश दिया है. इस सर्कुलर की प्रति हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी जाएगी.

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