illegal detention में रखे याची को 31 Oct को पेश करने का निर्देश
गलत पहचान से नजरबंदी को दी गई है चुनौती, हाई कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसएसपी गोरखपुर को निर्देश दिया है कि अवैध रूप से निरूद्ध (illegal detention) राम केवल पुत्र विपत को पेश करें व शिकायतकर्ता राम सरन 31अक्टूबर भी दो बजे हाजिर हों. याची राम केवल की बहन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा कि आरोप राम केवल पुत्र राम किशुन पर है. किंतु याची जो विपत का पुत्र है गलत पहचान के कारण अवैध रूप (illegal detention) से नजरबंद किया गया है. उसकी रिहाई की जाय.
यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने राम केवल की तरफ से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है. चितौना गांव के राम सरन ने राम केवल पुत्र राम किशुन पर आरोप लगाते हुए खोराबार थाने में एफआईआर दर्ज कराई कि उसने अपने को विपत पुत्र बताकर 24 फरवरी 23 को जमीन का बैनामा कर धोखाधड़ी की है.
पुलिस ने असली आरोपी के बजाय शिकायतकर्ता के चाचा को गिरफ्तार कर लिया. कोर्ट ने आदेश की प्रति सीजेएम गोरखपुर के जरिए एसएसपी गोरखपुर, एसएचओ खोराबार व एसएचओ गगहा को अनुपालनार्थ भेजने का निर्देश दिया है.
पद छोड़ चुके कर्मचारियों के सीपीएफ भुगतान पर निर्णय लेने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस्तीफा देकर नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों के सीपीएफ भुगतान पर दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने याचियों को चार हफ्ते में व्यक्तिगत प्रत्यावेदन देने और सक्षम अधिकारी को उसपर दो माह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है.
यह आदेश जस्टिस अजित कुमार ने अरूण कुमार पाल और 11 अन्य की याचिका पर दिया है. याचियों के अधिवक्ता एमए सिद्दीकी का कहना था कि याचीगण प्रबंधन वित्त एवं स्मारक समिति, मुख्यालय रमाबाई पार्क लखनऊ में विभिन्न पदों पर कार्यरत थे. जिनके वेतन से सीपीएफ अंशदान कटता था. उन्होंने इस्तीफा दे दिया. समिति ने इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया.
इसी बीच कुछ कर्मचारियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पुलिस को सौंपी गई. पुलिस ने सूचना जारी की तो याचियों के फंड का भुगतान लटका दिया गया.जबकि भ्रष्टाचार से उनका कोई लेना-देना नहीं है. याचियों ने प्रत्यावेदन दिया है किन्तु उसपर कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है. याचिका में सीपीएफ के भुगतान की मांग की गई थी.