+91-9839333301

legalbulletin@legalbulletin.in

| Register

तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के दोषी अभियुक्त आबिद की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंजूर की Conditional bail

तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के दोषी अभियुक्त आबिद की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंजूर की Conditional bail

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वर्ष 2005 में हुए बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में दोषी ठहराए गए अभियुक्त आबिद को Conditional bail प्रदान कर दी है. जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने यह आदेश आपराधिक अपील में दाखिल अर्जी पर दिया. 25 जनवरी 2005 को थाना धूमनगंज, इलाहाबाद में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या कर दी गई थी.

इस घटना में देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी जान गई थी तथा तीन अन्य घायल हुए थे. मृतक की पत्नी पूजा पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ था. प्रारंभ में स्थानीय पुलिस ने जांच की बाद में इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई. इसके खिलाफ राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने सर्वोच्च न्यायालय की शरण ली और केस के जल्द निबटाने के लिए जांच सीबीआई से कराने की गुहार लगायी.

इसे भी पढ़ें… सिर्फ 2 केस पर Gangster Act की कार्यवाही कानून के अनुरूप नहीं, हाई कोर्ट की प्रयागराज के आईजी को निर्देश सरकारी कामकाज में सतर्क और सावधान रहें

पूजा पाल की तरफ से पेश हुए अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था. इसके बाद इसकी जांच सीबीआई ने संभाली और नए सिरे से जांच करके 10 अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल किया. ट्रायल कोर्ट ने आबिद सहित अन्य को धारा 120-बी, 147, 148, 307, 302 आपीसी के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

इसे भी पढ़ें… फाइनल रिपोर्ट में IO द्वारा बताए गए कारणों पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए, कोर्ट को उस खास सामग्री की पहचान करनी चाहिए जो उसे जांच एजेंसी के नतीजों से असहमत होने के लिए प्रेरित करती है

सजा सुनाये के बाद से जेल में बंद आबिद ने हाई कोर्ट की डबल बेंच के समक्ष Conditional bail के लिए आवेदन प्रस्तुत किया. Conditional bail के लिए आबिद की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में आबिद का नाम नहीं था. उसका केस में नाम सह-अभियुक्तों के बयान के आधार पर नाम जोड़ा गया. इसके बाद कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं हुई. उसके पास से कोई भी आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं की गई.

तर्क दिया गया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तुकेश सिंह बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2025) में सुनाये गये फैसले के अनुसार केवल डॉकेट पहचान दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती. कोर्ट को जानकारी दी गयी कि आबिद के खिलाफ 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें से 8 में वह बरी हो चुका है. दो केस में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है. ऐसे में सिर्फ केस लंबित होने को Conditional bail अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता. सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि प्रतिदिन 200 से अधिक अपीलें सूचीबद्ध होती हैं. इस स्थिति में निकट भविष्य में अपील की हर सुनवाई संभव नहीं है.

कोर्ट ने कहा मुख्य आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद और पूर्व विधायक अशरफ दोनों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है, जिससे उनके विरुद्ध मुकदमा समाप्त हो गया. शेष आठ दोषी न तो सांसद हैं न विधायक. इससे उन्हें राहत के रूप में Conditional bail मंजूर की जानी चाहिए. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आबिद को जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया.

इसे भी पढ़ें… Cockroach Janta Party के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंचे भाजपा नेता, कोर्ट ने कहा: यूपी राज्य से संबंधित कुछ नहीं, नहीं कर सकते सुनवाई

हत्या के आरोपी की Conditional bail मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जालौन जिले के हत्याकांड में आरोपी सलीम अहमद की Conditional bail मंजूर कर ली है. जस्टिस जय प्रकाश तिवारी की एकल पीठ ने यह आदेश दिया. जालौन जिले के कोतवाली कोंच थाने में 9 अगस्त 2025 को एक व्यक्ति की हत्या का मामला दर्ज किया गया था. आरोप है कि आरोपियों ने मृतक को जालौन रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर बुलाकर उसकी हत्या की. मृतक के बेटे ने एफआईआर दर्ज कराई थी. जांच के दौरान सलीम अहमद का नाम सामने आया और उस पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) भी लगाई गई.

अदालत ने जमानत मंजूर की कहा सलीम अहमद का नाम एफआईआर में नहीं था. सह-आरोपी के बयान के आधार पर नाम जोड़ा गया. अभियोजन पक्ष के पास कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है जिससे संलिप्तता दिखाई दे. इस मामले के सभी अन्य सह-आरोपियों गोविंद सिंह, अमन कुमार सिंह उर्फ मिक्की, अजय सिंह उर्फ पंकज और रामप्रसाद अहिरवार को हाईकोर्ट  से पहले ही Conditional bail मिल चुकी है. साथ ही आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास भी नहीं है. आरोपी 16 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में है.

बलात्कार के आरोपी की Conditional bail मंजूर

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में आरोपी सत्यम आदिवासी उर्फ पिंकू को Conditional bail प्रदान कर दी. जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है. प्रयागराज जिले के बारा थाने में वर्ष 2025 में एफआईआर  दर्ज किया गया था. याची अधिवक्ता तनुज शाही ने तर्क दिया कि प्रत्यक्षदर्शियों में से किसी ने भी पीड़िता की कोई चीख या आवाज नहीं सुनी.

देवरानी व पड़ोसी के दरवाजा खटखटाने पर पीड़िता ने स्वयं दरवाजा खोला था. चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट भी बलात्कार की पुष्टि नहीं करती.आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है. ऐसे में उसे पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है जबकि आरोपी 11 नवंबर 2025 से जेल में बंद है. कोर्ट ने सभी तथ्यों, जेलों में अत्यधिक भीड़ और सुप्रीम कोर्ट के कपिल वधावान केस तथा इस हाईकोर्ट के माया तिवारी केस  के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए Conditional bail मंजूर की.

इसे भी पढ़ें… 90 दिन बाद भी नहीं दी गई जानकारी, हाईकोर्ट का यूपी सीएम से आग्रह : समय आ गया है कि बड़े Officers को आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *